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ईरान युद्ध तेज, तेहरान ने अमेरिकी हमले को बताया ‘ऑपरेशन एपिक मिस्टेक’, सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, अंतरराष्ट्रीय डेस्क

मध्य पूर्व में चल रहा ईरान, अमेरिका और इज़रायल का सैन्य टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। युद्ध के ताजा घटनाक्रमों में ईरान ने अमेरिकी हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिकी कार्रवाई को “ऑपरेशन एपिक मिस्टेक” करार दिया है।

उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर रणनीतिक गलती है। उनके अनुसार यह हमला इज़रायल की योजना का हिस्सा है और इसकी कीमत आम अमेरिकी नागरिकों को चुकानी पड़ रही है। तेहरान का कहना है कि इस सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव और बढ़ेगा।

ईरान का दावा, मिसाइल क्षमता बरकरार

ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम लगभग खत्म हो चुका है।

रिवोल्यूशनरी गार्ड का कहना है कि उसकी मिसाइल क्षमता अभी भी मजबूत है। संगठन ने दावा किया कि ईरान बड़ी संख्या में मिसाइलें दागने में सक्षम है और इनमें से कई मिसाइलों के वारहेड का वजन एक टन से भी अधिक है।

ईरान के इस बयान से संकेत मिलता है कि संघर्ष अभी और लंबा चल सकता है। क्षेत्र के कई देशों में पहले से ही सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है।

अमेरिका ने तेज हमलों के संकेत दिए

उधर अमेरिका की ओर से भी कड़े संकेत मिले हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कहा है कि युद्ध शुरू होने के बाद मंगलवार का दिन सबसे तीव्र सैन्य कार्रवाई का दिन हो सकता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी और सहयोगी सेनाएं ईरान के सैन्य ढांचे को निशाना बना रही हैं। उनका दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

लेबनान में भी बढ़ा संघर्ष

इस युद्ध का असर लेबनान में भी दिखाई दे रहा है। इज़रायल और Hezbollah के बीच लगातार गोलीबारी जारी है।

रिपोर्टों के अनुसार इज़रायली हमलों में लेबनान में मरने वालों की संख्या लगभग 500 के करीब पहुंच गई है। कई इलाकों में इमारतों को नुकसान पहुंचा है और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं।

राजधानी बेरूत के दक्षिणी हिस्सों में भी कई इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय राहत एजेंसियां लगातार बचाव और राहत कार्य में लगी हुई हैं।

सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमला

संघर्ष का दायरा अब खाड़ी देशों तक फैलता दिख रहा है। Saudi Arabia के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि देश की सुरक्षा एजेंसियां मिसाइल और ड्रोन हमलों की एक लहर से निपट रही हैं।

अधिकारियों के अनुसार हफर अल बातिन क्षेत्र में दो ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया। इसके अलावा छह बैलिस्टिक मिसाइलें प्रिंस सुल्तान एयर बेस की दिशा में दागी गईं। सभी मिसाइलों को वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

यह एयर बेस अमेरिका की सैन्य गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

अमेरिका और सऊदी अरब के बीच बातचीत

इन घटनाओं के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से फोन पर बातचीत की।

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की। बातचीत में सऊदी अरब की रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों पर भी विचार किया गया।

अमेरिका ने सऊदी अरब पर हुए हमलों की निंदा की है और इसे नागरिक क्षेत्रों पर हमला बताया है।

क्षेत्रीय संकट गहराता हुआ

विश्लेषकों का कहना है कि ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अब पूरे मध्य पूर्व को प्रभावित कर रहा है। लेबनान, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो इसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है।

फिलहाल क्षेत्र में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। कई देशों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।