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अमेरिका और इज़रायल के हमलों के बीच ईरान युद्ध का 11वां दिन, होरमुज़ जलडमरूमध्य पर मंडरा रहा वैश्विक संकट

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, अंतरराष्ट्रीय डेस्क

मध्य पूर्व में अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने अब खाड़ी क्षेत्र को भी अपनी चपेट में ले लिया है। युद्ध के 11वें दिन हालात और गंभीर हो गए हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कहा है कि मंगलवार को ईरान के भीतर अब तक का सबसे तीव्र सैन्य हमला हो सकता है। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने होरमुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते तेल आपूर्ति को रोकने की कोशिश की तो उसे “मौत, आग और तबाही” का सामना करना पड़ेगा।

खाड़ी देशों में बढ़ा सुरक्षा अलर्ट

युद्ध के फैलते दायरे के बीच खाड़ी देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। United Arab Emirates ने साफ कहा है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होने दिया जाएगा।

यूएई के अधिकारियों ने बताया कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोकने में सफलता पाई है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार पिछले 11 दिनों में सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल हमलों को इंटरसेप्ट किया गया है।

अबू धाबी के रूवाइस इलाके में ड्रोन हमले के बाद एक औद्योगिक परिसर में आग लगने की भी खबर सामने आई। हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

बहरीन और कतर में भी तनाव

खाड़ी क्षेत्र के दूसरे देशों में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। Bahrain की राजधानी मनामा में एक रिहायशी इमारत पर हमले की खबर आई है जिसमें एक महिला की मौत हो गई।

वहीं Qatar ने बताया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ईरान से दागी गई मिसाइलों का जवाब दे रही है। कतर के गृह मंत्रालय ने लोगों को घरों के अंदर रहने की सलाह दी है।

Saudi Arabia ने भी कई ड्रोन हमलों को रोकने का दावा किया है। सऊदी अधिकारियों के अनुसार वायु रक्षा प्रणाली ने 14 ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया।

होरमुज़ जलडमरूमध्य पर मंडराता खतरा

इस युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों की नजर अब ईरान के खार्ग द्वीप पर टिकी हुई है। यह द्वीप ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र माना जाता है।

जानकारों के अनुसार ईरान अपने कुल तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत इसी टर्मिनल से करता है। यहां से प्रतिदिन करीब 15 लाख बैरल कच्चा तेल वैश्विक बाजार में भेजा जाता है।

अगर इस क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

इस पर Saudi Aramco के प्रमुख अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि अगर होरमुज़ जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहा तो इसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह संकट दुनिया के तेल और गैस उद्योग के लिए बेहद गंभीर हो सकता है।

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी

इस बीच United Nations ने भी स्थिति को लेकर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होरमुज़ जलडमरूमध्य में व्यापार बाधित हुआ तो इसका असर सबसे ज्यादा गरीब और विकासशील देशों पर पड़ेगा।

ऊर्जा, खाद और परिवहन की लागत बढ़ने से दुनिया के कई देशों में महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस समुद्री मार्ग से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

युद्ध से पहले हर दिन इस जलडमरूमध्य से करीब 129 जहाज गुजरते थे। लेकिन हाल के दिनों में यह संख्या बहुत कम हो गई है। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ने लगा है।

युद्ध का दायरा बढ़ने की आशंका

विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व में फैल सकता है। अभी तक कई देश केवल रक्षात्मक कदम उठा रहे हैं, लेकिन हालात तेजी से बदल रहे हैं।

मध्य पूर्व लंबे समय से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का केंद्र रहा है। इसलिए यहां किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

अभी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं। अगर तनाव और बढ़ता है तो यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक चुनौती भी बन सकता है।