सीआईए का दावा: पिता अली खामेनेई नहीं चाहते थे मोजतबा संभालें ईरान की सत्ता
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, तेहरान
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच अब मनोवैज्ञानिक युद्ध यानी ‘प्रोपेगंडा वार’ भी अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए अब ‘सूत्रों’ के हवाले से ऐसी खबरें फैला रही है जिससे ईरान की जनता में डर और हताशा पैदा की जा सके। ताज़ा दावों में कहा जा रहा है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई इस काबिल ही नहीं हैं कि वह सत्ता की बागडोर संभाल सकें। हैरत की बात यह है कि अमेरिका के पास सीआईए और इजरायल के पास मोसाद जैसी दुनिया की सबसे आधुनिक एजेंसियां मौजूद हैं। इसके बावजूद मोजतबा की काबिलियत पर सवाल उठाने के लिए कोई पुख्ता सबूत देने के बजाय सिर्फ गुमनाम सूत्रों का सहारा लिया जा रहा है।
खाड़ी देशों के कुछ बड़े मीडिया घराने भी इस भ्रामक खेल में शामिल दिख रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी इंटेलिजेंस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जो ब्रीफिंग दी है उसमें चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई खुद अपने बेटे मोजतबा को अपना उत्तराधिकारी बनाने के पक्ष में नहीं थे। सूत्रों ने सीबीएस न्यूज को बताया कि अली खामेनेई को अपने बेटे की काबिलियत और उसके निजी आचरण को लेकर गंभीर चिंताएं थीं। अमेरिका का दावा है कि अली खामेनेई मोजतबा को इस योग्य नहीं मानते थे कि वह इस्लामिक गणराज्य का नेतृत्व कर सके।
बीते दिनों इजरायली मिसाइल हमले में अली खामेनेई की मौत के बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उनकी इस खामोशी ने अटकलों के बाजार को गर्म कर दिया है। वॉशिंगटन के अधिकारी अब यह प्रचार कर रहे हैं कि मोजतबा शायद उसी हमले में घायल हो गए थे जिसमें उनके पिता की जान गई थी। अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने तो यहां तक कह दिया कि मोजतबा का चेहरा उस हमले में बिगड़ गया है और उनकी हालत बहुत खराब है। हालांकि इस बात का कोई भी प्रमाण अभी तक दुनिया के सामने नहीं रखा गया है।
सुप्रीम लीडर बनने के बाद मोजतबा का सिर्फ एक लिखित संदेश सामने आया है। इसमें उन्होंने ईरानी सेना की तारीफ की और अमेरिका व इजरायल के खिलाफ जंग जारी रखने का संकल्प जताया। उनके सामने न आने की वजह से अमेरिकी अधिकारी यह नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहे हैं कि ईरान इस समय बिना नेतृत्व के चल रहा है। अमेरिकी इंटेलिजेंस का यह भी कहना है कि अब ईरान में सारे फैसले वहां की सेना यानी आईआरजीसी ले रही है। उनका दावा है कि 1979 की क्रांति के बाद जो धार्मिक सत्ता ईरान की पहचान थी अब वह खत्म होने के कगार पर है।
डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपनी निजी बातचीत में इसी तरह के संकेत दिए हैं। उन्होंने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान का नेतृत्व पूरी तरह खत्म हो चुका है। ट्रंप ने यहां तक संदेह जताया कि मोजतबा खामेनेई जीवित भी हैं या नहीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ईरान का पहला और दूसरा नेतृत्व खत्म हो गया है और अब जो तीसरा व्यक्ति कमान संभालने की कोशिश कर रहा है उसे तो उसके पिता भी पसंद नहीं करते थे।
कुल मिलाकर यह पूरी रिपोर्ट एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा लगती है। इसका मकसद ईरान के भीतर अस्थिरता फैलाना और वहां के नेतृत्व की छवि को खराब करना है। बिना किसी ठोस वीडियो या तस्वीर के सिर्फ सूत्रों के आधार पर दिए जा रहे ये बयान यह बताते हैं कि अमेरिका अब युद्ध के मैदान के साथ-साथ सूचनाओं के मोर्चे पर भी ईरान को घेरने की कोशिश कर रहा है। ईरान की स्थिरता को चुनौती देने के लिए उसके आंतरिक पारिवारिक और राजनीतिक मतभेदों की काल्पनिक कहानियां गढ़ी जा रही हैं।

