ईद और जुमे की नमाज़ एक दिन पड़ने पर क्या है इस्लामी हुक्म? UAE फतवा काउंसिल ने दिया जवाब
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई
जब ईद और जुमे (शुक्रवार) का दिन एक साथ आता है, तो मुसलमानों के बीच यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या जुमे की नमाज़ पढ़ना जरूरी है या ईद की नमाज़ ही काफी है। इसी तरह के सवालों को देखते हुए UAE फतवा काउंसिल ने इस मुद्दे पर स्पष्ट धार्मिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
काउंसिल ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि यदि ईद और जुमे का दिन एक साथ पड़ता है, तो दोनों नमाज़ें अपने-अपने निर्धारित समय पर अदा करना जरूरी है। यानी ईद की नमाज़ पढ़ लेने के बाद भी जुमे की नमाज़ की अनिवार्यता खत्म नहीं होती।
जुमे की नमाज़ की अहमियत पर जोर
फतवा काउंसिल ने कहा कि जुमे की नमाज़ इस्लाम में एक बेहद महत्वपूर्ण फर्ज़ इबादत है, जिसका उल्लेख कुरआन और हदीस में स्पष्ट रूप से मिलता है। इसे किसी भी हालत में छोड़ा नहीं जा सकता, खासकर तब जब व्यक्ति सक्षम हो और उसके पास मस्जिद जाने का अवसर हो।
काउंसिल के मुताबिक, ईद की नमाज़ एक महत्वपूर्ण सुन्नत या वाजिब अमल है, लेकिन जुमे की नमाज़ उससे कहीं अधिक अहम फर्ज़ इबादत है। इसलिए केवल ईद की नमाज़ पढ़कर जुमे को छोड़ देना इस्लामी दृष्टिकोण से सही नहीं माना जाता।
हज़रत मोहम्मद (सल्ल.) की सुन्नत का हवाला
काउंसिल ने अपने फैसले में पैगंबर हज़रत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत का भी हवाला दिया। ऐतिहासिक रिवायतों के अनुसार, जब भी ईद और जुमे का दिन एक साथ आया, तो पैगंबर ने दोनों नमाज़ें अदा कीं और जुमे की नमाज़ को नहीं छोड़ा।
यह उदाहरण इस बात को और मजबूत करता है कि मुसलमानों को दोनों इबादतों को अलग-अलग अदा करना चाहिए।
अलग-अलग मतों का भी जिक्र
हालांकि, काउंसिल ने यह भी माना कि इस मुद्दे पर इस्लामी विद्वानों के बीच कुछ मतभेद मौजूद हैं। कुछ विद्वानों का मत है कि जो लोग ईद की नमाज़ में शामिल हो चुके हैं, वे चाहें तो जुमे की नमाज़ के बजाय घर पर ज़ुहर (दोपहर) की नमाज़ अदा कर सकते हैं।
लेकिन काउंसिल ने स्पष्ट किया कि इस मत को मानने वाले लोग गलत नहीं हैं, बल्कि यह एक मान्य राय है। इसके बावजूद, बहुसंख्यक विद्वानों की राय यही है कि जुमे की नमाज़ को अदा करना बेहतर और अधिक सुरक्षित तरीका है।
मस्जिदों में जुमे की नमाज़ जारी रहेगी
UAE फतवा काउंसिल ने यह भी साफ किया कि देशभर की मस्जिदों में जुमे की नमाज़ नियमित रूप से आयोजित की जाएगी, चाहे वह दिन ईद का ही क्यों न हो। इसका उद्देश्य लोगों को मूल इस्लामी परंपरा के अनुसार इबादत करने का अवसर देना है।
रमजान के आखिरी दिनों में इबादत की अपील
काउंसिल ने मुसलमानों से अपील की कि वे रमजान के बचे हुए दिनों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और इबादत, दान और अच्छे कार्यों में जुटें। साथ ही ईद के मौके को रिश्तों को मजबूत करने, आपसी मेल-जोल बढ़ाने और समाज के जरूरतमंद लोगों—जैसे गरीबों, अनाथों और विधवाओं—की मदद करने का जरिया बनाएं।
अंत में दुआ और संदेश
अपने बयान के अंत में काउंसिल ने संयुक्त अरब अमीरात और पूरी मुस्लिम उम्मत की शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए दुआ की।

