Religion

केरल के मलप्पुरम में उमड़ा आस्था का महासागर: Lailat-ul-Qadr की रात 1 लाख जायरीनों ने मांगी विश्व शांति की दुआ

मुख्य समाचार (Highlights):

  • ऐतिहासिक समागम: मलप्पुरम की मअदिन अकादमी में भारत का सबसे बड़ा एक दिवसीय ‘शांति और प्रार्थना’ सम्मेलन संपन्न।
  • विश्व संकट पर चिंता: सैयद खलील बुखारी ने कहा—”वैश्विक संकट का असली कारण आध्यात्मिक और नैतिक पतन है।”
  • बड़ा संकल्प: ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद ने दी नशीली दवाओं के खिलाफ जंग और खाड़ी में भारतीयों की सुरक्षा की आवाज।
  • अध्यात्म की गूँज: तौबा और इस्तगफार (क्षमा याचना) की मजलिस में पूरी रात ‘आमीन’ की सदाओं से गूँजा आसमान।

हजार महीनों से अफजल रात: मलप्पुरम में इबादत का अद्भुत संगम

इबादत, सखावत और मगफिरत (क्षमा) की सबसे मुकद्दस रात ‘شب قدر’ (Lailat-ul-Qadr) के मौके पर केरल के मलप्पुरम में एक ऐसा मंजर दिखाई दिया जिसे देख कर रूहानी सुकून और भारतीय गंगा-जमुनी तहजीब पर गर्व होता है। मअदिन अकादमी के तत्वावधान में आयोजित ‘पीस दुआ’ (Peace Prayer) सम्मेलन में देश के कोने-कोने से आए लगभग एक लाख रोजेदारों ने शिरकत की।

यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता, वैश्विक शांति और सामाजिक सुधार का एक विशाल मंच बन गया। दोपहर की नमाज (जोहर) के बाद ‘अस्मा-उल-बदरिन’ मजलिस से शुरू हुआ यह सिलसिला शहरी (सुबह) तक जारी रहा।


वैश्विक संकट: तकनीक में तरक्की, रूहानियत में कमी—सैयद खलील बुखारी

मअदिन अकादमी के संरक्षक और प्रख्यात विद्वान सैयद खलील इब्राहिम बुखारी ने अपने मुख्य संबोधन में दुनिया के मौजूदा हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा:

“आज दुनिया जिन जंगों, फसादों, तानाशाही और सांप्रदायिकता की आग में जल रही है, वह दरअसल तकनीक या पैसे की कमी नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक खालीपन (Spiritual Void) का परिणाम है।”

बुखारी ने जोर दिया कि इंसान ने आर्थिक और तकनीकी मैदान में तो झंडे गाड़ दिए हैं, लेकिन अपनी रूहानी जिम्मेदारियों को भूल गया है। उन्होंने रमजान के संदेश को याद दिलाते हुए कहा कि जब तक हम सीमाओं से ऊपर उठकर ‘आفاقی انصاف’ (Universal Justice) और नैतिक चेतना को बढ़ावा नहीं देंगे, तब तक शांति संभव नहीं है।


ग्रैंड मुफ्ती की अपील: खाड़ी में भारतीयों की सुरक्षा और नशा-मुक्त समाज

भारत के ग्रैंड मुफ्ती شیخ ابوبکر احمد (Kanthapuram A.P. Aboobacker Musliyar) ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और सामाजिक आह्वान किया। उन्होंने केंद्र सरकार से पुरजोर अपील की कि खाड़ी देशों (Gulf Countries) में रह रहे लाखों भारतीय नागरिकों के हितों और उनकी सुरक्षा को हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।

उनके संबोधन के प्रमुख बिंदु:

  1. सामाजिक बुराई पर प्रहार: नशीली दवाओं के बढ़ते चलन को समाज के लिए नासूर बताते हुए उन्होंने सभी मुसलमानों से इसके खिलाफ एकजुट होकर ‘सामूहिक संकल्प’ लेने को कहा।
  2. गरीबों की खुशियां: उन्होंने अपील की कि ईद-उल-फितर की खुशियों में अपने आसपास के गरीबों और बेसहारा लोगों को अनिवार्य रूप से शामिल करें।
  3. जंग के खिलाफ आवाज: उन्होंने मासूम बच्चों और महिलाओं की मौतों पर दुख व्यक्त करते हुए नफरत और तानाशाही को हराने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने की जरूरत बताई।

आमीन की सदाओं से गूँजा आकाश: एक रूहानी अनुभव

मलप्पुरम का वह दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था जब आधी रात के समय हजारों लोग अपने सीनों पर हाथ रखकर, नम आँखों के साथ खुदा के हुजूर में गिड़गिड़ा रहे थे। तौबा और इस्तगफार के इस सत्र में जब सामूहिक ‘आमीन’ की आवाज उठी, तो पूरा परिसर गूँज उठा।

कार्यक्रम में तस्बीह, तरावह, ओवाबीन और अन्य विशेष नमाजें अदा की गईं। 5,555 स्वयंसेवकों की एक विशाल फौज ने एक लाख से अधिक लोगों के लिए सामूहिक इफ्तार और सहरी का बेमिसाल प्रबंधन किया।


प्रतिष्ठित विद्वानों की मौजूदगी

इस रूहानी मजलिस में समस्ता केरल जमियतुल उलमा के सचिव علامہ عبدالقادر, सी. मोहम्मद फैजी, डॉ. हुसैन थकाफी, और प्रोफेसर ए.के. अब्दुल हमीद जैसे दिग्गजों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ई. सुलेमान मुसलियार ने की, जबकि दुआओं का नेतृत्व सैयद अली बाफकी तंगल और सैयद खलील बुखारी ने किया।


निष्कर्ष: शांति का संदेश

मअदिन अकादमी का यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि भारत के सुदूर दक्षिण से उठी यह शांति की आवाज पूरे विश्व के लिए एक मशाल है। ‘शब-ए-कद्र’ की यह रात केवल व्यक्तिगत गुनाहों की माफी की रात नहीं, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण और भाईचारे के संकल्प की रात बन गई।