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ईरान-इजरायल युद्ध: भीषण हमलों में सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और बासिज कमांडर सुलेमानी की हत्या, खाड़ी में और भीषण टकराव की आशंका

मुख्य समाचार (Highlights):

  • बड़ी कार्रवाई: इजरायली हवाई हमले में ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और बासिज कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी मारे गए।
  • ईरान की पुष्टि: तेहरान की आधिकारिक समाचार एजेंसियों ने लारीजानी की ‘शहादत’ की पुष्टि की; बेटे और सहयोगियों की भी मौत।
  • नेतन्याहू का बयान: इजरायली पीएम ने लारीजानी को ‘गैंगस्टरों के गिरोह का सरगना’ बताया।
  • क्षेत्रीय संकट: खाड़ी देशों (UAE, कुवैत, कतर) पर मिसाइल हमले; होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में भारी उछाल।

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई

मध्य पूर्व इस समय अभूतपूर्व युद्ध संकट के दौर से गुजर रहा है। ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब ईरान ने आधिकारिक तौर पर अपने राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और बसीज फोर्स के कमांडर गुलामरेज़ा सोलैमानी की मौत की पुष्टि कर दी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कुछ ही हफ्ते पहले 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो चुकी है। इन लगातार हमलों ने न सिर्फ ईरान के सत्ता ढांचे को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व को युद्ध की आग में झोंक दिया है।


तेहरान में निशाना बना सत्ता का केंद्र

ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अली लारीजानी तेहरान के पास पर्दिस इलाके में अपनी बेटी के घर पर हुए हमले में मारे गए। इस हमले में उनके बेटे, सुरक्षा कर्मियों और कई अन्य लोगों की भी मौत हुई।

लारीजानी को ईरान की सत्ता का “पावर ब्रोकर्स” माना जाता था—ऐसा नेता जो धार्मिक नेतृत्व, सेना (IRGC), राजनीतिक तंत्र और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच संतुलन बनाए रखता था।

उनकी मौत को ईरान के लिए एक रणनीतिक और राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे युद्ध के दौरान सरकार की स्थिरता का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे थे।


इजरायल का दावा: नेतृत्व खत्म करना है लक्ष्य

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने दावा किया कि लारीजानी को “खत्म” कर दिया गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश में उन्हें “गैंग ऑफ गैंगस्टर्स का बॉस” बताते हुए कहा कि यह अभियान ईरान के नेतृत्व को खत्म करने के लिए चलाया जा रहा है।

इजरायल की सेना ने यह भी कहा कि बसीज प्रमुख गुलामरेज़ा सोलैमानी को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों को दबाने में शामिल थे।

विश्लेषकों के अनुसार, यह रणनीति “डिकैपिटेशन पॉलिसी” का हिस्सा है—जिसका मकसद दुश्मन देश के शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर सत्ता को अस्थिर करना है।


बसीज प्रमुख सोलैमानी की मौत की पुष्टि

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने पुष्टि की है कि बसीज संगठन के प्रमुख गुलामरेज़ा सोलैमानी एक अमेरिकी-इजरायली हमले में मारे गए।

बसीज फोर्स ईरान की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक नियंत्रण का अहम हिस्सा है, जो विरोध प्रदर्शनों को दबाने और सरकार समर्थक नेटवर्क को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इस लिहाज से सोलैमानी की मौत ईरान के अंदरूनी नियंत्रण तंत्र के लिए भी बड़ा झटका है।


खाड़ी देशों में हमले, UAE ने बंद किया हवाई क्षेत्र

ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई के तहत खाड़ी देशों में मिसाइल और ड्रोन हमले तेज हो गए हैं।

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने मंगलवार को कुछ समय के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। बाद में हालात सामान्य होने पर इसे फिर से खोल दिया गया।

UAE रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश की एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइल और ड्रोन हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।

वहीं, UAE विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में कहा कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा और हर खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।


बगदाद और बेरूत भी जंग की चपेट में

इस युद्ध का दायरा अब ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहा।

  • इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास के पास कई विस्फोट हुए
  • लेबनान की राजधानी बेरूत के कई इलाकों पर इजरायली हमले
  • हिजबुल्लाह और अन्य ईरान समर्थित समूहों की सक्रियता में तेजी

इससे साफ है कि यह संघर्ष अब क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले चुका है।


होरमुज़ जलडमरूमध्य पर खतरा, तेल बाजार में उथल-पुथल

ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक—स्ट्रेट ऑफ होरमुज़—को लगभग बंद कर दिया है।

यह वही रास्ता है जिससे दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देशों से अपील की है कि वे इस मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए युद्धपोत भेजें। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कौन-कौन से देश इसमें शामिल होंगे।

इस स्थिति के चलते वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है और कीमतों में तेजी आई है।


अमेरिका में भी असर: काउंटरटेररिज्म प्रमुख का इस्तीफा

इस युद्ध का असर अमेरिका की आंतरिक राजनीति पर भी पड़ा है।

अमेरिका के नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के निदेशक जो केंट ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान “तत्काल खतरा नहीं” था, जिससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका के अंदर भी इस युद्ध को लेकर मतभेद हैं।


लारीजानी की मौत से क्या बदलेगा?

अली लारीजानी सिर्फ एक राजनेता नहीं थे, बल्कि ईरान के सत्ता संतुलन के प्रमुख स्तंभ थे।

उनकी भूमिका:

  • 12 साल तक संसद (मजलिस) के स्पीकर
  • 2015 परमाणु समझौते में अहम भूमिका
  • चीन और रूस से रणनीतिक रिश्ते
  • युद्ध के दौरान सैन्य और राजनीतिक समन्वय

उनकी सबसे बड़ी ताकत थी—कट्टरपंथियों और व्यावहारिक नेताओं के बीच संतुलन बनाना।

अब उनके जाने से:

  • सत्ता और अधिक कठोर हाथों में जा सकती है
  • IRGC का प्रभाव बढ़ सकता है
  • कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं कम हो सकती हैं

ईरान में नेतृत्व संकट गहराया

खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है, लेकिन वे अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।

ऐसे में लारीजानी ही वह चेहरा थे जो जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह भरोसा दिला रहे थे कि सरकार अभी भी स्थिर है।

अब उनकी मौत से यह भरोसा भी कमजोर पड़ गया है।


क्या यह ‘रेजीम चेंज’ की ओर बढ़ रहा है युद्ध?

इजरायल के बयान और रणनीति को देखते हुए कई विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह युद्ध सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) की कोशिश है।

नेतन्याहू ने भी अपने बयान में कहा है कि यह अभियान ईरानी जनता को “उठ खड़े होने” का मौका देने के लिए है।

हालांकि, इतिहास बताता है कि बाहरी हस्तक्षेप से सत्ता परिवर्तन की कोशिशें अक्सर लंबे और खतरनाक संघर्षों में बदल जाती हैं।


निष्कर्ष: युद्ध का अगला चरण और भी खतरनाक

अली लारीजानी और गुलामरेज़ा सोलैमानी की मौत ने इस युद्ध को एक नए और अधिक खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है।

  • ईरान का नेतृत्व कमजोर हुआ
  • खाड़ी देशों में हमले बढ़े
  • वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव
  • कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कम

अब सवाल यह है कि क्या यह संघर्ष सीमित रहेगा या पूरी तरह क्षेत्रीय युद्ध में बदल जाएगा।

मध्य पूर्व का यह संकट न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन चुका है।