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ईरान-इजरायल युद्ध तेज, हमले, धमकियां और तबाही से बढ़ा तनाव

मुस्लिम नाउ ब्यूरो | वेस्ट एशिया डेस्क

पश्चिम एशिया एक बार फिर भीषण युद्ध की आग में झुलस रहा है। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने अब बहु-देशीय संकट का रूप ले लिया है, जहां मिसाइल हमले, राजनीतिक चेतावनियां, और नागरिक इलाकों पर तबाही की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। ताजा घटनाक्रमों ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को हिला दिया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि इजरायल को अपने हमलों की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पिछले दो दिनों में इजरायल ने ईरान के तीन वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों की हत्या कर दी है। इनमें सबसे ताजा नाम खुफिया मंत्री इस्माइल खतिब का बताया जा रहा है। ईरानी नेतृत्व ने इसे सीधी आक्रामकता करार देते हुए बदले की कार्रवाई का संकेत दिया है।

इस बीच, संघर्ष का दायरा खाड़ी देशों तक फैलता नजर आ रहा है। कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी, जो दुनिया के सबसे बड़े तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) केंद्रों में से एक है, पर ईरानी मिसाइलों से हमला किया गया है। कतर एनर्जी के अनुसार, इस हमले में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। यह हमला उस चेतावनी के बाद हुआ है, जिसमें ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी थी।

इजरायल की ओर से भी जवाबी कार्रवाई जारी है। लेबनान में इजरायली हमलों में अब तक 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाकों में लगातार बमबारी से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। हिज़्बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल के दक्षिणी हिस्सों तक रॉकेट दागे हैं, जो अब तक की सबसे लंबी दूरी की हमले माने जा रहे हैं।

इजरायल के भीतर भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। तेल अवीव और नेगेव क्षेत्र में कई जगहों पर मिसाइलों के अवशेष और बिना फटे गोले मिलने की खबर है। केंद्रीय इजरायल के जलजुलिया इलाके में पांच लोग घायल हुए हैं, जबकि दक्षिणी क्षेत्र में एक व्यक्ति की हालत गंभीर बताई जा रही है। एक अन्य घटना में मिडिल इजरायल के मोशाव अदनिम में एक विदेशी नागरिक की मौत हो गई, जो मिसाइल हमले के दौरान घायल हुआ था।

वहीं, वेस्ट बैंक के हेब्रोन के पास बीत अव्वा में भी मिसाइल के टुकड़े गिरने से तीन फिलिस्तीनी महिलाओं की मौत हो गई। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध का असर सीमाओं से परे जाकर आम नागरिकों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है।

ईरान की राजधानी तेहरान में भी हालात बेहद दर्दनाक हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में एक आवासीय इमारत को निशाना बनाया गया, जिसमें तीन महीने के एक मासूम बच्चे समेत एक ही परिवार के कई लोगों की मौत हो गई। ईरान की सरकारी एजेंसी फार्स ने इसे नागरिकों पर सीधा हमला बताया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति भी सक्रिय हो गई है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका के राष्ट्रपति और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से बातचीत की है। उन्होंने नागरिक ढांचे, खासकर ऊर्जा और जल आपूर्ति केंद्रों पर हमलों को तत्काल रोकने की अपील की है। मैक्रों ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं की रक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए।

युद्ध के बीच इराक से भी अहम बयान सामने आया है। इराकी सशस्त्र समूह काताइब हिज्बुल्लाह ने अमेरिका के बगदाद स्थित दूतावास पर हमले अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है। हालांकि, इस फैसले के साथ तीन शर्तें भी रखी गई हैं—बेरूत में इजरायली बमबारी पर रोक, इराकी नागरिक इलाकों की सुरक्षा की गारंटी, और सीआईए एजेंटों की गतिविधियों पर प्रतिबंध। समूह ने चेतावनी दी है कि यदि इन शर्तों का पालन नहीं किया गया तो हमले और तेज हो जाएंगे।

ऊर्जा क्षेत्र पर हमलों ने वैश्विक पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। ग्लोबल विटनेस के विशेषज्ञ पैट्रिक गैली के अनुसार, तेल और गैस क्षेत्रों पर हो रहे हमलों से भारी मात्रा में मीथेन और अन्य जहरीली गैसें वातावरण में फैल रही हैं। उन्होंने बताया कि मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड से 80 गुना अधिक खतरनाक ग्रीनहाउस गैस है, जो जलवायु संकट को और गंभीर बना सकती है।

गैली ने यह भी चेतावनी दी कि युद्ध खत्म होने के बाद भी इसके पर्यावरणीय दुष्प्रभाव लंबे समय तक बने रहेंगे। नष्ट हुए ढांचे के पुनर्निर्माण में भी भारी मात्रा में जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल होगा, जिससे वैश्विक जलवायु पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल की हालिया रणनीति केवल सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक मोर्चे को भी प्रभावित करने वाली है। मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ विशेषज्ञ रॉस हैरिसन के अनुसार, ईरान के संभावित वार्ताकारों को निशाना बनाना और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करना इस बात का संकेत है कि कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को कमजोर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इन हमलों ने अमेरिका को भी एक जटिल स्थिति में डाल दिया है, जहां उसे कई मोर्चों पर एक साथ प्रतिक्रिया देनी पड़ रही है। इससे युद्ध के और विस्तार की आशंका बढ़ गई है।

इसी बीच, ‘द एल्डर्स’ नामक अंतरराष्ट्रीय समूह, जिसमें कई नोबेल पुरस्कार विजेता और पूर्व राष्ट्राध्यक्ष शामिल हैं, ने भी चिंता जताई है। उन्होंने देशों से अपील की है कि वे इस संघर्ष में बिना सोचे-समझे शामिल न हों और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन सुनिश्चित करें। समूह ने पश्चिमी देशों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया है।

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। यह संघर्ष अब केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें खाड़ी देश, इराक, लेबनान और वैश्विक शक्तियां भी शामिल होती जा रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस युद्ध को रोक पाते हैं या क्षेत्र एक और बड़े संकट की ओर बढ़ रहा है।