जामिया में चिराग पासवान का आह्वान: ‘मेड इन इंडिया’ फूड से सजेगी दुनिया की डाइनिंग टेबल
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नई दिल्ली |
देश के प्रतिष्ठित संस्थान जामिया मिल्लिया इस्लामिया का अंसारी ऑडिटोरियम आज एक भविष्यवादी सोच का गवाह बना। अवसर था ‘खाद्य प्रसंस्करण में इको-इनक्लूसिव पैकेजिंग’ पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का, जहाँ भारत सरकार के केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने न केवल आधुनिक तकनीक पर जोर दिया, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के लिए एक स्पष्ट रोडमैप भी पेश किया।

जामिया के ‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल इनक्लूसिव’ (CSSI) द्वारा आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में चिराग पासवान ने युवाओं, शोधकर्ताओं और उद्योगों के बीच एक ‘मजबूत त्रिकोण’ बनाने का आह्वान किया।
“जामिया का छात्र बनना मेरा सौभाग्य होता”
अपने संबोधन की शुरुआत में चिराग पासवान ने जामिया की ऐतिहासिक विरासत को नमन किया। उन्होंने बेहद विनम्रता के साथ कहा, “जामिया जैसे विश्वविद्यालय को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। यहाँ के शिक्षकों और छात्रों के बीच आकर मुझे जो ऊर्जा मिल रही है, वह अतुलनीय है। अगर मुझे अपने जीवन में अवसर मिला होता, तो मैं भी जामिया का छात्र बनना पसंद करता।” उनके इस बयान ने ऑडिटोरियम में मौजूद सैकड़ों छात्रों का दिल जीत लिया। इसके तुरंत बाद उन्होंने गंभीर विमर्श की ओर रुख करते हुए कहा कि 21वीं सदी की अगली तिमाही (2047) युवाओं के कंधों पर है।

ग्लोबल फूड बास्केट: हर मेज पर हो भारतीय स्वाद
केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को दोहराते हुए कहा कि भारत को अब “Global Food Basket” के रूप में खुद को स्थापित करना होगा।
- मात्रा से मूल्य की ओर: पासवान ने कहा कि हरित क्रांति ने हमें अनाज के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया, लेकिन अब समय ‘वॉल्यूम’ (मात्रा) को ‘वैल्यू’ (मूल्य) में बदलने का है।
- जीरो रिजेक्शन पॉलिसी: उन्होंने एक कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह पर भारत का एक भी रिजेक्ट हुआ कंसाइनमेंट देश की छवि को नुकसान पहुँचाता है। हमारा लक्ष्य ऐसी साख बनाना है कि दुनिया कहे— “अगर यह भारत से आया है, तो गुणवत्ता की गारंटी है।”

इको-इनक्लूसिव पैकेजिंग: धरती माँ को बचाने की शपथ
सम्मेलन का मुख्य विषय ‘सतत पैकेजिंग’ (Sustainable Packaging) था। चिराग पासवान ने आगाह किया कि विकास की दौड़ में हम प्रकृति को नहीं भूल सकते।
- पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता: उन्होंने प्लास्टिक के विकल्पों और ऐसी पैकेजिंग सामग्री पर शोध करने को कहा जो पृथ्वी के नाजुक इकोसिस्टम को नुकसान न पहुँचाएँ।
- विरासत की सुरक्षा: मंत्री ने भावुक अपील करते हुए कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम अपनी भावी पीढ़ियों को धरती माँ वैसी ही लौटाएँ, जैसी हमें अपने पूर्वजों से मिली थी।”
- जेंडर और नवाचार: उन्होंने इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और सूक्ष्म उद्यमियों को बड़े उद्योगपतियों में बदलने के लिए मंत्रालय की PMFME जैसी योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया।
शिक्षा जगत और सरकार का तालमेल
जामिया के कुलपति प्रो. मजहर आसिफ़ ने शिक्षा जगत और सरकार के बीच सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चिराग पासवान के नाम की व्याख्या करते हुए उन्हें ‘आशा और ज्ञान का प्रतीक’ बताया। प्रो. आसिफ़ ने कहा कि छोटे गाँवों के किसानों तक तकनीक पहुँचाना अनिवार्य है ताकि बाँस की कोंपलों, केले के फूलों और कटहल जैसे उत्पादों का सही प्रसंस्करण हो सके और किसानों की आय बढ़े।
रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी ने चिराग पासवान की तुलना उनके पिता स्वर्गीय श्री राम विलास पासवान जी से करते हुए कहा कि चिराग में अपने पिता जैसी ही दूरदर्शिता और अपनी जड़ों से जुड़ाव है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जामिया खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में मंत्रालय के साथ शोध और शिक्षण में पूर्ण सहयोग के लिए तैयार है।

सम्मेलन की मुख्य झलकियाँ:
- भागीदारी: देश भर के 300 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
- सम्मान: NCC कैडेट्स द्वारा केंद्रीय मंत्री को ‘क्वार्टर गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया।
- उपस्थिति: डॉ. आभा रानी सिंह (CMD, NMDFC), डॉ. एम. जे. खान (ICFA) और प्रो. तनूजा जैसे गणमान्य व्यक्ति मंच पर मौजूद रहे।
एक नई क्रांति की पदचाप
चिराग पासवान का यह दौरा केवल एक उद्घाटन कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह संकेत था कि भारत अब ‘रॉ मटेरियल’ (कच्चा माल) बेचने वाले देश से ऊपर उठकर ‘प्रोसेस्ड फूड’ की महाशक्ति बनना चाहता है। जामिया जैसे संस्थानों को इस शोध में शामिल करना यह दर्शाता है कि सरकार अब ‘लैब-टू-लैंड’ (प्रयोगशाला से खेत तक) के सिद्धांत पर काम कर रही है।
युवाओं से उनकी अपील— “अत्यंत महत्वाकांक्षी बनें”—साफ करती है कि आने वाले समय में खाद्य प्रसंस्करण केवल उद्योग नहीं, बल्कि रोजगार का सबसे बड़ा केंद्र बनने वाला है।

