सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल: सीकर में हिंदू भाइयों ने ईदगाह के लिए दान की अपनी बेशकीमती जमीन
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अशफाक कायममखानी/जयपुर/सीकर।
राजस्थान की रेतीली धरती न केवल अपनी वीरता के लिए जानी जाती है, बल्कि यहाँ की मिट्टी में आपसी भाईचारे और सद्भाव की जड़ें भी बहुत गहरी हैं। जब एक तरफ धर्म के नाम पर दूरियां बढ़ने की खबरें आती हैं, वहीं शेखावाटी के सीकर जिले से आई एक खबर ने मानवता का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया है। सीकर के गुहाला (नीम का थाना) क्षेत्र में चार हिंदू भाइयों ने सांप्रदायिक सौहार्द की एक ऐसी इबारत लिखी है, जिसकी गूंज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है।

मस्जिद में जगह कम पड़ी, तो आगे आए सैनी भाई
मामला गुहाला गाँव के पास स्थित नरसिंह पुरी पंचायत की ‘सवावाली ढाणी’ का है। यहाँ मुस्लिम समुदाय के पास ईद की नमाज अदा करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी। वर्षों से यहाँ के लोग एक छोटी सी मस्जिद में ही नमाज पढ़ते आ रहे थे, लेकिन बढ़ती आबादी के कारण वहां जगह का अभाव महसूस होने लगा।
मुस्लिम समुदाय की इस व्यावहारिक पीड़ा को स्थानीय हिंदू भाइयों ने न केवल समझा, बल्कि उसे दूर करने का बीड़ा भी उठाया। स्थानीय निवासी माली (सैनी) समाज के चार भाइयों— लक्ष्मण राम सैनी, भोपाल राम सैनी, पूरणमल सैनी और जगदीश सैनी ने ईद के पावन मौके पर अपनी बेशकीमती जमीन ईदगाह के विस्तार के लिए दान कर दी।
माला पहनाकर किया गया ‘बड़े भाइयों’ का स्वागत
ईद की नमाज के बाद जब यह घोषणा हुई और नमाजियों को पता चला कि अब उनके पास अपनी ईदगाह के लिए पर्याप्त जमीन है, तो माहौल भावुक हो गया। मुस्लिम समुदाय ने चारों सैनी भाइयों और इस नेक काम में मददगार बने अन्य लोगों का फूल-मालाएं पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह दान केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए मोहब्बत का एक पैगाम है जिसे सालों-साल याद रखा जाएगा।
शेखावाटी: जहाँ दान की परंपरा है सदियों पुरानी
वरिष्ठ पत्रकार अशफाक कायमखानी के अनुसार, शेखावाटी अंचल में स्कूल, अस्पताल, मंदिर और मस्जिद के लिए जमीन दान करने की परंपरा बहुत पुरानी है। यह क्षेत्र हमेशा से ‘गंगा-जमनी तहजीब’ का केंद्र रहा है।
- फतेहपुर और बेसवा: यहाँ मुस्लिम समुदाय ने सरकारी स्कूलों और अस्पतालों के लिए अपनी कीमती जमीनें दान की हैं, जहाँ आज कन्या महाविद्यालय और चिकित्सालय संचालित हो रहे हैं।
- लेड़ी गाँव (लाडनूं): यहाँ के मुस्लिम समुदाय ने माताजी का मंदिर बनवाकर मिसाल कायम की थी।
राजनीतिक हलचलों के बीच मानवता की जीत
रोचक बात यह है कि जहाँ पड़ोसी जिले झुंझुनूं में ईद की नमाज को लेकर कुछ प्रशासनिक और वैचारिक खींचतान देखने को मिली (जहाँ पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने स्वयं मौजूद रहकर नमाज संपन्न करवाई), वहीं सीकर के गुहाला में सैनी भाइयों के इस कदम ने यह साबित कर दिया कि जमीनी स्तर पर आज भी आम इंसान एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़ा है।
यह घटना उन लोगों के लिए एक कड़ा जवाब है जो समाज को बांटने की कोशिश करते हैं। गुहाला के इन चार भाइयों ने अपनी जमीन देकर समाज को एक बड़ा ‘आशियाना’ दिया है, जहाँ अब इबादत के साथ-साथ आपसी विश्वास की जड़ें और मजबूत होंगी।

