Politics

ईरान के खिलाफ छह अरब देश एकजुट: संप्रभुता के उल्लंघन पर दी ‘कड़ी चेतावनी’

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई

मध्य-पूर्व (Middle East) में बढ़ते युद्ध के बादलों के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। सऊदी अरब, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और जॉर्डन ने एक साझा बयान जारी कर ईरान और उसके समर्थित सशस्त्र गुटों द्वारा किए जा रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। इन देशों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

ईरानी हमलों को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

साझा बयान में कहा गया है कि ईरान द्वारा सीधे तौर पर या उसके ‘प्रॉक्सिस’ (Proxy Factions) के माध्यम से किए जा रहे हमले उनके देशों की क्षेत्रीय अखंडता और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन हैं। विशेष रूप से इराक की धरती से संचालित होने वाले ईरान समर्थक सशस्त्र गुटों द्वारा बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाए जाने पर गहरी नाराजगी जताई गई है।

अरब देशों ने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का सीधा उल्लंघन करार दिया है। यह प्रस्ताव स्पष्ट रूप से मांग करता है कि ईरान बिना किसी शर्त के पड़ोसी देशों के खिलाफ अपनी आक्रामकता और धमकियों को तुरंत बंद करे।

इराक सरकार से ‘कड़ी कार्रवाई’ की मांग

बयान जारी करने वाले देशों ने इराक के साथ अपने भ्रातृ संबंधों का हवाला देते हुए बगदाद सरकार से अपील की है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों के खिलाफ न होने दे। उन्होंने मांग की है कि इराकी सरकार उन मिलिशिया और सशस्त्र समूहों को तुरंत रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जो क्षेत्र में अस्थिरता फैला रहे हैं। यह मांग ऐसे समय में आई है जब इराक से संचालित होने वाले गुटों ने हाल के दिनों में कई अरब देशों की सीमाओं में ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं।

आत्मरक्षा का ‘अधिकार’ और जवाबी कार्रवाई का संकेत

इस साझा बयान की सबसे महत्वपूर्ण बात ‘आत्मरक्षा’ (Self-Defense) का उल्लेख है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए, इन छह देशों ने घोषणा की है कि उनके पास इन “आपराधिक हमलों” के खिलाफ व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से आत्मरक्षा का पूर्ण अधिकार है। यह संदेश ईरान के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि यदि हमले नहीं रुके, तो ये देश मिलकर सैन्य जवाबी कार्रवाई भी कर सकते हैं।

स्लीपर सेल्स और हिजबुल्लाह पर प्रहार

हमलों के अलावा, इन देशों ने ईरान समर्थित ‘स्लीपर सेल्स’ और हिजबुल्लाह से जुड़े आतंकी संगठनों की गतिविधियों की भी कड़ी निंदा की है। बयान में कहा गया है कि क्षेत्र की शांति को भंग करने के लिए रची जा रही इन साजिशों को उनके सुरक्षा बल और खुफिया एजेंसियां नाकाम कर रही हैं। अरब देशों ने अपनी सशस्त्र सेनाओं की सतर्कता की सराहना करते हुए उन्हें “राष्ट्र का मजबूत ढाल” बताया।

क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि छह प्रभावशाली अरब देशों का एक साथ आना ईरान के लिए एक बड़ा कूटनीतिक दबाव है। सऊदी विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में तैयार यह बयान संकेत देता है कि अब खाड़ी देश केवल रक्षात्मक नहीं रहेंगे, बल्कि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘सुरक्षा गठबंधन’ को और मजबूत करेंगे।

मुस्लिम नाउ ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, यह साझा बयान ईरान को एक सख्त संदेश है कि उसके विस्तारवादी इरादे और प्रॉक्सी वॉर की नीति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।