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ईरान-इजरायल युद्ध: अमेरिका की ‘विनाश’ की चेतावनी, तेहरान का सरेंडर से इनकार

दुबई/तेहरान

मध्य पूर्व (Middle East) में छिड़ी भीषण जंग अब एक ऐसे मोड़ पर पहुँच गई है जहाँ शांति की गुंजाइश खत्म होती नजर आ रही है। 26 मार्च 2026 की सुबह तक की रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है। अमेरिका ने ईरान को सीधे शब्दों में ‘हार स्वीकार करने’ की चेतावनी दी है, वहीं तेहरान ने झुकने के बजाय युद्ध को और तेज करने का संकल्प लिया है।

अमेरिका की अंतिम चेतावनी: “स्वीकारें हार या झेलें विनाश”

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक कड़ा संदेश जारी करते हुए कहा है कि यदि ईरान शांति वार्ता की मेज पर नहीं आता है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यह सुनिश्चित करेंगे कि ईरान पर अब तक का सबसे भीषण हमला हो। अमेरिका ने ईरान के सामने 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव रखा था, जिसे तेहरान ने सिरे से खारिज कर दिया है।

अमेरिका का दावा है कि पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है, लेकिन ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी टेलीविजन पर स्पष्ट कर दिया, “हमारी सरकार ने युद्ध खत्म करने के लिए किसी भी बातचीत में हिस्सा नहीं लिया है और न ही हमारी ऐसी कोई योजना है।”

कुवैत एयरपोर्ट पर हमला और खाड़ी देशों में खलबली

बुधवार को ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए इजरायल के साथ-साथ खाड़ी देशों पर भी मिसाइलें दागीं। इस हमले का सबसे भयावह मंजर कुवैत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर देखने को मिला, जहाँ ईरानी हमले के बाद भीषण आग लग गई।

ईरान की इस आक्रामकता ने सऊदी अरब, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को भी युद्ध के सीधे दायरे में ला खड़ा किया है। इन देशों ने पिछले 24 घंटों में कई ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को इंटरसेप्ट किया है। सऊदी अरब ने ईरानी हमलों को ‘कायरतापूर्ण’ करार देते हुए कहा है कि अब “खामोशी कोई विकल्प नहीं है।”

लेबनान में इजरायली ‘बफर जोन’ का विस्तार

एक तरफ ईरान सीधा प्रहार कर रहा है, तो दूसरी तरफ इजरायल ने लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घोषणा की है कि इजरायल दक्षिणी लेबनान में अपने ‘बफर जोन’ का विस्तार कर रहा है। इजरायली वायुसेना बेरूत से लेकर दक्षिणी लेबनान तक हजबुल्ला के ठिकानों और ईरानी संपत्तियों पर भारी बमबारी कर रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर संकट

विश्व के कुल तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा जहाँ से गुजरता है, वह ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ फिलहाल बंद होने की कगार पर है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि यदि यह जलमार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह युद्ध तभी रोकेगा जब उसकी शर्तें पूरी होंगी और वह पूरे मध्य पूर्व में “भारी प्रहार” जारी रखेगा।

मैदान-ए-जंग की ताजा स्थिति

  • समुद्र में टकराव: ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी विमानवाहक पोत ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ पर क्रूज मिसाइलें दागी हैं, जिसके बाद उसे अपनी स्थिति बदलने पर मजबूर होना पड़ा। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि उनका पोत अभी भी ईरान में सैन्य ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन जारी रखे हुए है।
  • तेहरान पर हमले: इजरायल ने ईरानी राजधानी तेहरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं।
  • पाकिस्तान की मध्यस्थता: पाकिस्तान ने अमेरिका का 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव ईरान तक पहुँचाया था, जिसमें प्रतिबंधों में ढील और परमाणु कार्यक्रम पर रोक जैसी शर्तें शामिल थीं, लेकिन ईरान ने इसे ‘अपमानजनक’ मानकर ठुकरा दिया है।

ईरान का नजरिया: “अस्तित्व की लड़ाई”

तेहरान से रिपोर्ट कर रहे विश्लेषकों का कहना है कि ईरान इस युद्ध को एक ‘अस्तित्व की लड़ाई’ (Existential War) के रूप में देख रहा है। ईरानी अधिकारियों को लगता है कि अमेरिका और इजरायल शांति के नाम पर उन्हें निहत्था करना चाहते हैं। तेहरान में सुरक्षा स्थितियां इतनी गंभीर हैं कि मध्यस्थों के लिए ईरानी शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना भी मुश्किल हो रहा है, क्योंकि इजरायल उन्हें चुन-चुनकर निशाना बनाने की शपथ ले चुका है।

निष्कर्ष

मध्य पूर्व अब एक महायुद्ध की ओर बढ़ रहा है। अमेरिका की ‘हिट हार्डर’ की धमकी और ईरान का ‘करो या मरो’ का रुख दुनिया को एक बड़े तेल संकट और मानवीय त्रासदी की ओर धकेल रहा है। क्या कूटनीति की कोई खिड़की खुलेगी या बारूद का यह धुआं पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगा, यह आने वाले कुछ घंटे तय करेंगे।