भारत में 24 घंटे में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने की शक्ति : Maulana Hassan Ali Rajani
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अहमदाबाद | न्यूज डेस्क
अहमदाबाद में एक प्रेस विज्ञप्ति के दौरान मौलाना हसन अली रजनी (Maulana Hassan Ali Rajani) ने वैश्विक भू-राजनीति और ईरान की वर्तमान भूमिका पर अत्यंत तीखे और विवादास्पद विचार साझा किए। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ (Strait of Hormuz) की मौजूदा स्थिति की तुलना कर्बला के ऐतिहासिक संदर्भों से करते हुए ईरान समर्थक विचारधारा पर कड़ा प्रहार किया है।
हॉर्मुज़ संकट और भारत की सैन्य शक्ति
मौलाना रजनी ने दुनिया के 70 देशों को संबोधित करते हुए कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करना कोई स्थायी समस्या नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यदि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन की स्थिति बनती है, तो भारत के पास वह अद्वितीय सैन्य शक्ति है कि वह मात्र 24 घंटे के भीतर हॉर्मुज़ को फिर से खोल सकता है। उनके अनुसार, भारत वर्तमान में युद्ध में सीधे हस्तक्षेप से बचने के लिए संयम बरत रहा है, लेकिन इसे कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
ईरान और ‘यजीदी’ विचारधारा पर प्रहार
मौलाना ने ईरान की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें ‘यजीदी’ विचारधारा से जोड़ा। उन्होंने याद दिलाया कि जब भारत के प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान जाने वाले एक नहर के पानी को रोकने की बात कही थी, तब दुनिया भर के ईरान समर्थक तत्वों ने उनकी आलोचना की थी।
“आज जब ईरान ने हॉर्मुज़ जैसा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग बंद कर दिया है, तो क्या आज का यजीद ईरान नहीं है?” – मौलाना हसन अली रजनी
ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान विवाद
भाषण के दौरान मौलाना ने 1400 साल पहले कर्बला के मैदान में 6 महीने के मासूम अली असगर की शहादत का जिक्र किया। उन्होंने हुरमुल्लाह द्वारा किए गए उस कृत्य की तुलना आज के हालातों से करते हुए आरोप लगाया कि ईरान समर्थक तत्व आज भी बच्चों और मासूमों के नाम पर वैश्विक स्तर पर धन संग्रह कर रहे हैं, जो कि अनुचित है।
वैश्विक शिया समुदाय को नसीहत
मौलाना रजनी ने दुनिया भर के शिया समुदाय से अपील की है कि वे ईरानी विद्वानों के प्रभाव में आकर अपने-अपने देशों में विरोध प्रदर्शन न करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि:
- देशभक्ति सर्वोपरि: शिया समुदाय को अपने मूल देश के प्रति वफादार रहना चाहिए।
- विदेशी प्रभाव से बचें: स्थानीय विरोध प्रदर्शनों के लिए ईरानी उकसावे में न आएं।
- रणनीतिक चुप्पी: भारत की वर्तमान चुप्पी युद्ध से बचने की एक सोची-समझी रणनीति है।
मौलाना ने अंत में संकेत दिया कि समय आने पर सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है।

