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ट्रंप की ईरान को चेतावनी: ‘जल्द समझदार बनो और डील साइन करो वरना भुगतो’

वॉशिंगटन:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। बुधवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि वह जल्द से जल्द ‘समझदार’ बने और समझौते की मेज पर आए। यह बयान तब आया है जब दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष को खत्म करने की तमाम कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो अमेरिका उसकी आर्थिक घेराबंदी को और सख्त कर देगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट साझा की है। इस पोस्ट में उन्होंने ईरान की वर्तमान स्थिति पर कटाक्ष किया है। ट्रंप ने लिखा कि ईरान अपना पक्ष सही से नहीं रख पा रहा है। उन्होंने दोहराया कि वह ईरान को परमाणु हथियार बनाने की इजाजत कभी नहीं देंगे। ट्रंप का यह अंदाज उनके पुराने सख्त तेवरों की याद दिलाता है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि तेहरान के पास अब समय बहुत कम बचा है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक ताजा रिपोर्ट ने इस तनाव को और हवा दे दी है। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने अपने करीबियों को ईरान के बंदरगाहों की पूर्ण नाकेबंदी करने के निर्देश दिए हैं। अमेरिकी अधिकारी अब ऐसी रणनीति तैयार कर रहे हैं जिससे ईरान को पूरी तरह घुटने टेकने पर मजबूर किया जा सके। ट्रंप का मानना है कि केवल आर्थिक दबाव ही ईरान को बातचीत के लिए विवश कर सकता है। उनके सामने बमबारी करने या युद्ध से पीछे हटने जैसे विकल्प भी थे। लेकिन उन्होंने आर्थिक घेराबंदी को सबसे सुरक्षित और असरदार रास्ता माना है।

दूसरी तरफ ईरान भी झुकने को तैयार नहीं दिख रहा है। ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को स्वीकार करे। तेहरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है। हालांकि आंकड़ों की कहानी कुछ और ही कहती है। ईरान के पास वर्तमान में लगभग 440 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है जो 60 प्रतिशत तक संवर्धित है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसे थोड़ा और संवर्धित किया गया तो इससे कई परमाणु बम बनाए जा सकते हैं। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन इस खतरे को जड़ से खत्म करना चाहता है।

ईरान के अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि वे इस नाकेबंदी को बर्दाश्त कर लेंगे। उनका कहना है कि उनके पास व्यापार के लिए वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को रोककर अपनी ताकत का प्रदर्शन भी किया था। इस संघर्ष ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मचा दिया है। ग्लोबल ट्रेड रूट बाधित होने से तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 3 प्रतिशत तक बढ़ गईं।

ईरान की अर्थव्यवस्था इस युद्ध और नाकेबंदी की वजह से पूरी तरह चरमरा गई है। ईरानी मुद्रा रियाल अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। बुधवार को एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 18 लाख रियाल से भी ज्यादा हो गई। पिछले दो दिनों में ही रियाल की वैल्यू 15 प्रतिशत तक गिर चुकी है। महंगाई दर भी 65 प्रतिशत के पार पहुंच गई है। आम जनता के लिए बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी अब एक चुनौती बन गया है।

राजनीतिक रूप से भी ईरान इस समय एक बड़े संकट से गुजर रहा है। अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई बड़े नेता मारे जा चुके हैं। अब सत्ता की बागडोर खामेनेई के बेटे मोज्तबा के हाथों में है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके बाद ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के कट्टरपंथी कमांडरों का दबदबा और बढ़ गया है। यह कट्टरपंथी गुट समझौते के बजाय संघर्ष को लंबा खींचने के पक्ष में है।

इधर अमेरिका में भी ट्रंप पर घरेलू दबाव बढ़ता जा रहा है। गैस की बढ़ती कीमतों ने अमेरिकी जनता को परेशान कर दिया है। एक हालिया सर्वे के मुताबिक ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 34 प्रतिशत पर आ गई है। लोग चाहते हैं कि यह अनिश्चितता जल्द खत्म हो। ट्रंप ने इसी हफ्ते ऊर्जा कंपनियों के प्रमुखों के साथ भी बैठक की है ताकि तेल उत्पादन और शिपिंग की समस्याओं को सुलझाया जा सके।

ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में अपनी एक तस्वीर भी लगाई है। इसमें वह काले चश्मे पहने हुए हैं और उनके हाथ में एक मशीन गन है। तस्वीर के नीचे लिखा है “नो मोर मिस्टर नाइस गाय”। यह दिखाता है कि ट्रंप अब किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं हैं। वह चाहते हैं कि ईरान परमाणु मुद्दे पर पहले दिन से ही चर्चा शुरू करे। जबकि ईरान चाहता है कि पहले युद्ध पूरी तरह खत्म हो और शिपिंग की बाधाएं हटें।

यूरोपीय संघ और एशियाई देश भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। कई सरकारें अपने नागरिकों को ईंधन की सब्सिडी देने के लिए अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। लेकिन जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री रास्तों से डर खत्म नहीं होता तब तक बाजार में स्थिरता आना मुश्किल है। फिलहाल गेंद ईरान के पाले में है। ट्रंप के सख्त रुख ने साफ कर दिया है कि या तो ईरान समझौता करे या फिर पूरी तरह बर्बाद होने के लिए तैयार रहे। दुनिया अब 4 मई का इंतजार कर रही है जब इस पूरे घटनाक्रम पर कुछ और स्पष्टता आने की उम्मीद है।