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पश्चिम एशिया संकट का साया: क्या सुरक्षित हो पाएगी हज यात्रा 2026?

मुख्य जानकारी:

  • हज की शुरुआत: मई 2026
  • भारतीय जायरीन: 1.75 लाख
  • विशेष सुविधा: स्मार्टवॉच और हाई-स्पीड ट्रेन
  • पहली उड़ान: 18 अप्रैल 2026

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता

पश्चिम एशिया में गहराते सुरक्षा संकट ने इस साल मई में होने वाली पवित्र हज यात्रा पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं। क्षेत्र में जारी अस्थिरता को देखते हुए कई देशों ने अपने नागरिकों को यात्रा पर फिर से विचार करने की सलाह दी है। हालांकि सऊदी अरब सरकार ने साफ कर दिया है कि हज अपने तय समय पर ही होगा।

सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता

अमेरिकी विदेश विभाग ने हज 2026 के लिए एक ट्रेवल एडवाइजरी जारी की है। इसमें अमेरिकी नागरिकों से यात्रा पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया है। एडवाइजरी के मुताबिक क्षेत्र में सुरक्षा का माहौल अभी भी अस्थिर है। हालांकि वर्तमान में युद्धविराम लागू है लेकिन यह बेहद नाजुक स्थिति में है। सुरक्षा विशेषज्ञों को डर है कि किसी भी समय स्थिति बिगड़ सकती है। हज जैसे बड़े आयोजन में लाखों की भीड़ जुटती है। ऐसी स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव

Gulf क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण ईरान और सऊदी अरब के रिश्तों में भी तल्खी देखी जा रही है। हर साल करीब 90 हजार ईरानी नागरिक हज करने सऊदी अरब जाते हैं। संघर्ष शुरू होने से पहले तेहरान ने अपना कोटा बढ़ाने की मांग की थी। लेकिन अब तनाव बढ़ने के कारण ईरानी जायरीनों की भागीदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं। इराक और लेबनान जैसे प्रभावित देशों के यात्री भी अब अपनी योजनाओं को लेकर असमंजस में हैं।

सऊदी अरब की तैयारियां युद्ध स्तर पर

तमाम भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद सऊदी अरब का हज और उमराह मंत्रालय तैयारियों में जुटा है। सऊदी अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि वे जायरीनों के लिए एक सुरक्षित और आध्यात्मिक अनुभव सुनिश्चित करेंगे। सरकार का कहना है कि वे किसी भी लॉजिस्टिक या सुरक्षा संबंधी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

महंगाई की मार और भारत का रुख

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ईंधन की कीमतों में उछाल आया है। माना जा रहा है कि इसका असर हज की कुल लागत पर पड़ेगा। खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया के यात्रियों के लिए हज महंगा हो सकता है। हालांकि भारतीय जायरीनों के लिए राहत की खबर है। केंद्रीय हज कमेटी अतिरिक्त खर्च का बोझ खुद उठाने की तैयारी कर रही है ताकि आम आदमी पर बोझ न पड़े।

भारत के विशेष इंतजाम

भारत से इस साल लगभग 1 लाख 75 हजार जायरीन सऊदी अरब जाएंगे। भारत के महावाणिज्य दूत फहद अहमद श्री के अनुसार इनमें से सवा लाख से ज्यादा लोग हज कमेटी के जरिए जा रहे हैं। बाकी लोग प्राइवेट टूर ऑपरेटरों की मदद लेंगे। इस बार एक बड़ी बात यह है कि करीब 5400 महिलाएं बिना ‘महरम’ (पुरुष साथी) के हज यात्रा पर जा रही हैं।

भारतीय जायरीनों की सुविधा के लिए मदीना में पैगंबर की मस्जिद के पास होटलों में ठहरने का इंतजाम किया गया है। मक्का में भी इसी तरह की शानदार व्यवस्था की गई है। मक्का और मदीना के बीच सफर को आसान बनाने के लिए ‘हरमैन हाई-स्पीड ट्रेन’ का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। पिछले साल जहां 16 हजार भारतीयों ने इस ट्रेन का सफर किया था वहीं इस साल यह संख्या 61 हजार तक पहुंच जाएगी।

तकनीक और आधुनिक सुविधाएं

मीना और अराफात के मैदानों में इस बार जायरीनों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। वहां कूलिंग सिस्टम, सोफा बेड और छायादार रास्तों का इंतजाम किया गया है। सबसे खास बात यह है कि जायरीनों को स्मार्टवॉच दी जाएंगी। यह घड़ी ‘हज सुधा ऐप’ से जुड़ी होगी। अगर कोई रास्ता भटक जाता है या इमरजेंसी आती है तो इस घड़ी के जरिए तुरंत मदद पहुंचाई जा सकेगी।

भारत सरकार ने सऊदी अरब में 200 प्रशासनिक और 350 चिकित्सा कर्मियों की टीम तैनात करने का फैसला किया है। पहली बार 20 से 25 दिनों का शॉर्ट ड्यूरेशन हज पैकेज भी पेश किया गया है। इसमें 10 हजार से ज्यादा लोगों ने दिलचस्पी दिखाई है।

उड़ानों का शेड्यूल

भारत और सऊदी अरब के बीच हज उड़ानें 18 अप्रैल से शुरू हो रही हैं। एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर और सऊदी एयरलाइंस सहित पांच कंपनियां इन उड़ानों का संचालन करेंगी।

भले ही सरहद पर तनाव हो लेकिन लाखों श्रद्धालुओं की आस्था उन्हें हिजाज की सरजमीं तक खींच रही है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति और सुरक्षा के इंतजाम इस पवित्र यात्रा को निर्विघ्न संपन्न करा पाएंगे।