Religion

सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन की दूरदर्शिता: अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गूंजेगी पवित्र कुरान की तिलावत

मुख्य बिंदु:

  • यूट्यूब चैनल का नाम: Sawt al-Quran al-Karim
  • किसकी आवाज: शाहजादा हुसैन बुरहानुद्दीन
  • विशेष शैली: खलफ अन हमजा
  • विजन: विश्व स्तर पर 1 लाख हुफाज़ तैयार करना

दाऊदी बोहरा समुदाय ने कुरान के पवित्र ज्ञान को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए एक नई डिजिटल पहल की शुरुआत की है। समुदाय ने यूट्यूब पर ‘सौत अल-कुरान अल-करीम’ (Sawt al-Quran al-Karim) चैनल लॉन्च किया है। इस चैनल पर पवित्र कुरान की तिलावत (पाठ) को एक बेहद खास अंदाज में पेश किया गया है। यह आवाज किसी और की नहीं बल्कि सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के सबसे छोटे बेटे शाहजादा हुसैन बुरहानुद्दीन की है। यह पूरा प्रोजेक्ट ‘महाद अल-जहरा’ संस्थान की देखरेख में तैयार किया गया है। यह संस्थान दशकों से कुरान के अध्ययन और उसे कंठस्थ कराने के काम में जुटा है।

सदियों पुरानी परंपरा अब एक क्लिक पर

इस डिजिटल पहल की सबसे बड़ी विशेषता ‘खलफ अन हमजा’ (Khalaf ‘an Hamza) रिवायत है। यह कुरान पढ़ने की उन दस प्राचीन और प्रामाणिक परंपराओं में से एक है जिसे विद्वानों ने सदियों से सहेज कर रखा है। कुरान की इस शैली को पढ़ना बहुत कठिन माना जाता है। इसमें उच्चारण की बारीकियों और ध्वनियों का बहुत सटीक ध्यान रखना पड़ता है। अब तक इंटरनेट पर इस शैली में पूरी कुरान की रिकॉर्डिंग बहुत कम उपलब्ध थी। इस चैनल के माध्यम से दुनिया भर के छात्रों और शोधकर्ताओं को इस दुर्लभ परंपरा को सुनने और समझने का मौका मिलेगा।

महाद अल-जहरा: कुरान शिक्षा का केंद्र

दाऊदी बोहरा समुदाय में कुरान की शिक्षा को बढ़ावा देने में ‘महाद अल-जहरा’ का बहुत बड़ा योगदान है। इस संस्थान की स्थापना 1976 में दिवंगत सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन साहब ने की थी। उनका उद्देश्य था कि समुदाय के लोग कुरान को बेहतरीन तरीके से पढ़ने और उसे याद करने में महारत हासिल करें। साल 1998 से शाहजादा हुसैन बुरहानुद्दीन इस संस्थान का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में छात्रों को ‘तिलावत’ और ‘हिफ्ज’ (याद करना) के कठिन विषयों में प्रशिक्षित किया जाता है।

शाहजादा हुसैन बुरहानुद्दीन: एक महान विद्वान और कारी

शाहजादा हुसैन बुरहानुद्दीन केवल इस संस्थान के मार्गदर्शक ही नहीं बल्कि खुद भी एक प्रतिष्ठित ‘कारी’ हैं। वह समुदाय के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान ‘अलजामिया-तुस-सैफिया’ के प्रोवोस्ट भी हैं। वह खुद ‘हुफाज़’ (जिन्होंने पूरी कुरान याद की हो) की परीक्षाओं की निगरानी करते हैं। उनकी विशेषज्ञता का लोहा पूरी दुनिया मानती है। वह काहिरा स्थित ‘नकबत कुर्रा अल-कुरान अल-करीम’ के मानद सदस्य भी हैं। यह दुनिया के सबसे सम्मानित कुरान पाठकों का एक वैश्विक संगठन है।

उनकी विद्वता का प्रमाण उनकी तीन खंडों वाली किताब ‘किरात जहिरा ली किताब अल्लाह’ (Qiraat Zahira li Kitab Allah) है। इस किताब में कुरान पढ़ने के नियमों को बहुत ही सरल तरीके से चित्रों और तालिकाओं के माध्यम से समझाया गया है। खास बात यह है कि किताब के हर पन्ने पर क्यूआर कोड (QR Code) दिए गए हैं। छात्र इसे स्कैन करके तुरंत शाहजादा हुसैन की आवाज में उन नियमों को सुन सकते हैं। इस ऐतिहासिक कार्य को मिस्र की मशहूर अल-अजहर यूनिवर्सिटी ने भी मान्यता और प्रमाण पत्र दिया है।

सैयदना का विजन: हर घर में हो एक ‘हाफिज’

इस यूट्यूब चैनल की लॉन्चिंग सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है जिसके तहत वह हर पीढ़ी को कुरान से जोड़ना चाहते हैं। वह हमेशा समुदाय के परिवारों को प्रोत्साहित करते हैं कि घर पर कुरान का अध्ययन किया जाए। उनका एक सपना है कि दुनिया भर में समुदाय के हर घर में कम से कम एक ‘हाफिज’ जरूर हो। उनका लक्ष्य समुदाय में एक लाख हुफाज़ तैयार करने का है।

डिजिटल युग में रूहानियत का प्रसार

इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के आने से अब भौगोलिक दूरियां खत्म हो गई हैं। चाहे कोई अफ्रीका में हो या अमेरिका में वह आसानी से शुद्ध और प्रामाणिक तिलावत सुन सकता है। यह पहल केवल सुनने के लिए नहीं बल्कि सीखने के लिए भी एक बड़ा खजाना है। परिवार अपने घरों में इसे सुनकर अपनी अगली पीढ़ी को कुरान के मूल्यों से जोड़ सकते हैं।

महाद अल-जहरा के वरिष्ठ सदस्य मुर्तजा जाफर ने इस मौके पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह चैनल पवित्र कुरान के विज्ञान को साझा करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। ‘खलफ अन हमजा’ जैसी कठिन शैली को डिजिटल रूप में लाना हमारी परंपराओं को बचाने की कोशिश है। उन्होंने यह भी बताया कि यह तो बस शुरुआत है।

भविष्य की योजनाएं

आने वाले समय में इस चैनल पर कुरान पढ़ने की अन्य प्रसिद्ध शैलियों (Narrations) को भी जोड़ा जाएगा। ‘हफ्स अन आसिम’, ‘वर्श अन नाफी’ और ‘अल-सुसी अन अबी अमर’ जैसी शैलियों पर रिकॉर्डिंग का काम शुरू हो चुका है। इन संसाधनों का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए कुरान की शिक्षा को सरल और सुलभ बनाना है।

आज के भागदौड़ भरे जीवन में जहां लोग तकनीक से जुड़े हैं वहां इस तरह की पहल सराहनीय है। ‘सौत अल-कुरान अल-करीम’ चैनल अब सभी के लिए उपलब्ध है। यह न केवल दाऊदी बोहरा समुदाय बल्कि पूरी दुनिया के कुरान प्रेमियों के लिए एक अनमोल तोहफा है। डिजिटल क्रांति और रूहानी परंपरा का यह संगम समाज में नई ऊर्जा का संचार करेगा।

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