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बांग्लादेश में खसरे का कोहराम: अस्पतालों में सांसों की जंग लड़ रहे मासूम, बेबस मां-बाप और आईसीयू का भारी संकट

महताब लिमोन | ढाका

बांग्लादेश में इस समय खसरे (Measles) ने एक खौफनाक शक्ल अख्तियार कर ली है। राजधानी ढाका समेत पूरे देश के अस्पतालों से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। वार्डों में हर तरफ बच्चों के रोने की चीखें हैं। कहीं कोई मां अपने कलेजे के टुकड़े को सीने से लगाए आईसीयू के लिए भटक रही है, तो कहीं कोई पिता अपनी जुड़वां बेटियों में से एक को खोने के बाद दूसरी की जान बचाने के लिए खुदा से दुआ मांग रहा है। खसरे की यह लहर महज एक बीमारी नहीं, बल्कि मासूमों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।

अस्पतालों में बेबसी का मंजर मुंशीगंज के रहने वाले अबू सईद एक ऑटो चालक हैं। उनके सात महीने के इकलौते बेटे यूसुफ को करीब तीन हफ्ते पहले निमोनिया के इलाज के लिए ‘बांग्लादेश चिल्ड्रन हॉस्पिटल एंड इंस्टीट्यूट’ में भर्ती कराया गया था। निमोनिया से सुधार शुरू ही हुआ था कि मंगलवार को डॉक्टरों ने उसे खसरा होने की पुष्टि कर दी। अब नन्हे यूसुफ की हालत देखकर रूह कांप जाती है। उसके सिर में कैनुला लगा है। नाक में ऑक्सीजन की नली है। दूसरे नथुने में खाने वाली ट्यूब डाली गई है। शरीर पर लाल चकत्ते पड़ चुके हैं।

यूसुफ की मां मौशुमी अपने बेटे के पास बैठी बस आंसू बहा रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे का ऑक्सीजन लेवल गिर रहा है और उसे तुरंत आईसीयू चाहिए। लेकिन अबू सईद जब दौड़कर आईसीयू वार्ड पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि वहां लंबी वेटिंग लिस्ट है। अगले दो-तीन दिनों तक कोई बेड खाली होने की उम्मीद नहीं है। बेबस पिता अब अपनी पत्नी के पास बैठकर फुट-फुटकर रोने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहा है।

एक बेटी खोई, दूसरी वेंटिलेटर पर अस्पताल के आईसीयू के बाहर दीवार से लगकर खड़े जाकिर हुसैन की दास्तां और भी दर्दनाक है। महज पांच दिन पहले उनकी छह महीने की जुड़वां बेटियों में से एक, रीसा, ने खसरे के कारण दम तोड़ दिया। अब दूसरी बेटी रूही आईसीयू में मौत से जूझ रही है। जाकिर बताते हैं कि उनकी पत्नी सदमे में पागल जैसी हो गई है। डॉक्टरों का कहना है कि रूही की हालत भी बहुत नाजुक है। सांस लेने में उसे भारी तकलीफ हो रही है। यह अकेला मामला नहीं है, अस्पताल का कोना-कोना ऐसी ही करुण कहानियों से भरा पड़ा है।

संक्रामक रोग अस्पताल: क्षमता से तीन गुना मरीज मोहखाली स्थित संक्रामक रोग अस्पताल की हालत भी जुदा नहीं है। यहां की पांचवीं मंजिल को पूरी तरह खसरा वार्ड में बदल दिया गया है। पहले यहां महज आठ बिस्तर थे, लेकिन अब अन्य वार्डों से बेड लाकर संख्या बढ़ाई गई है। इसके बावजूद मरीजों का दबाव इतना है कि एक-एक बेड पर कई बच्चे हैं या गलियारों में इलाज चल रहा है।

अस्पताल के जूनियर कंसल्टेंट डॉ. श्रीवास पाल का कहना है कि जब संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच जाता है, तो सांस लेने में बहुत दिक्कत होती है। ऐसे में बच्चों को मुंह से कुछ भी खिलाना खतरनाक हो सकता है क्योंकि खाना श्वासनली में फंस सकता है। इसीलिए हम नाक की नली (Nasal Tube) का सहारा ले रहे हैं।

आंकड़े दे रहे हैं खतरे की चेतावनी स्वास्थ्य विभाग की हालिया रिपोर्ट बेहद डराने वाली है। 15 मार्च से अब तक देशभर में खसरे की पुष्टि के बाद 30 बच्चों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 156 ऐसे बच्चों ने भी दम तोड़ा है जिनमें खसरे जैसे ही लक्षण थे। यानी एक महीने के भीतर करीब 186 मासूमों की जान चली गई है। देशभर में अब तक 2,721 लोग संक्रमित पाए गए हैं, जबकि करीब 11 हजार संदिग्ध मामले सामने आए हैं। ढाका डिवीजन इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। इसके बाद राजशाही और चटगांव का नंबर आता है।

सरकार की क्या है तैयारी? खसरे के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने अपने टीकाकरण नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब टीके की उम्र नौ महीने से घटाकर छह महीने कर दी गई है। 18 जिलों के 30 संवेदनशील उप जिलों में विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। लक्ष्य है कि 12 लाख बच्चों को तुरंत कवर किया जाए।

आने वाली 20 अप्रैल से देशभर में एक मेगा ड्राइव चलाई जाएगी। इसमें छह महीने से लेकर पांच साल तक के करीब पौने दो करोड़ बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य है। सरकार का दावा है कि वे 95 प्रतिशत बच्चों तक पहुंचेंगे। लेकिन सवाल यह है कि जो बच्चे इस समय अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं, उन्हें बचाने के लिए आईसीयू और ऑक्सीजन की कमी कब पूरी होगी?

राजधानी के दो बड़े अस्पतालों के दौरे से यह साफ है कि संसाधनों की भारी कमी है। 60 बिस्तरों वाले वार्ड में 75 से ज्यादा बच्चे भर्ती हैं। आईसीयू के सभी 14 बेड भरे हुए हैं। नए गंभीर मरीजों के लिए फिलहाल कोई जगह नहीं है। मां-बाप की चीखें और नन्हीं जानों का संघर्ष यह बताने के लिए काफी है कि बांग्लादेश इस समय एक बड़े स्वास्थ्य संकट के मुहाने पर खड़ा है।

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