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जयपुर में गूंजी अमन की आवाज: कर्बला मैदान से दुनिया को दिया एकता और भाईचारे का संदेश

प्रमुख बिंदु:

  • स्थान: कर्बला मैदान, जयपुर।
  • आयोजक: ताजियती संयुक्त समिति, जयपुर।
  • विषय: मानव एकता और वैश्विक शांति।
  • खास बात: गाजा, ईरान और लेबनान के पीड़ितों को दी गई श्रद्धांजलि।
  • संदेश: सांप्रदायिक सद्भाव और आपसी संवाद की अपील।

जयपुर | मुस्लिम नाउ ब्यूरो

राजस्थान की राजधानी जयपुर बुधवार रात एक बेहद खास और जज्बाती पल की गवाह बनी। शहर के ऐतिहासिक कर्बला मैदान में आयोजित ‘ताजियती जनसभा’ ने न केवल अपनी रवायत को निभाया, बल्कि सरहदों के पार हो रहे संघर्षों के दर्द को भी अपनी आवाज दी। मुस्लिम संगठनों के गठबंधन ‘संयुक्त समिति’ द्वारा आयोजित इस सभा में हजारों आंखें नम थीं। यहाँ लोग केवल रस्म निभाने नहीं, बल्कि गाजा से लेकर ईरान और लेबनान तक जारी युद्ध की आग में झुलस रहे मासूमों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करने जुटे थे।

राजनीति नहीं, यह इंसानियत का मंच है सफेद लिबास और संजीदा चेहरों के बीच आयोजकों ने शुरुआत में ही एक बात साफ कर दी। उन्होंने कहा कि यह कोई सियासी जलसा नहीं है। इसका मकसद किसी दल या सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि ‘मानव एकता’ का परचम बुलंद करना है। कार्यक्रम का मुख्य विषय भी यही था— ‘मानव एकता के लिए’। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि दुनिया के किसी भी कोने में अगर किसी बच्चे की जान जाती है, तो उसका दर्द पूरे समाज को महसूस होना चाहिए। यह सभा उसी सामूहिक दर्द और एकजुटता की एक कोशिश थी।

अमन और संवाद ही एकमात्र रास्ता मंच से जब मशहूर इस्लामी विद्वान अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने बोलना शुरू किया, तो पूरे मैदान में सन्नाटा छा गया। उन्होंने बहुत सादगी के साथ बड़ी बात कही। उनका कहना था कि आज की दुनिया नफरत और बारूद के ढेर पर खड़ी है। ऐसे में केवल संवाद और आपसी एकता ही वह रास्ता है जो मानवता को बचा सकता है। उन्होंने वैश्विक संघर्षों के बीच शांति की अपील की और कहा कि इस्लाम का असली संदेश ही अमन और भाईचारा है।

गाजा और लेबनान के पीड़ितों को श्रद्धांजलि सभा के दौरान एक विशेष सत्र उन बेगुनाह लोगों के नाम रहा जिन्होंने हालिया हिंसा में अपनी जान गंवाई है। वक्ताओं ने खासतौर पर गाजा और फलस्तीन के उन बच्चों का जिक्र किया जो शिक्षा और सुरक्षा से महरूम हैं। लेबनान और ईरान की स्थिति पर भी चिंता जाहिर की गई। आयोजकों ने स्पष्ट संदेश दिया कि जयपुर की यह धरती हमेशा से सांप्रदायिक सद्भाव का केंद्र रही है। आज यहाँ से उठने वाली शांति की आवाज दुनिया के हर उस कोने तक जानी चाहिए जहाँ हिंसा का राज है।

दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी इस महत्वपूर्ण सभा में समाज के हर तबके और राजनीतिक विचारधारा के लोग शामिल हुए। मुस्लिम नेता सैयद सरवर चिश्ती और काजिम रसूल इलियास ने कौम और देश की एकता पर बात रखी। वहीं, राज्यसभा सदस्य संजय सिंह, कांग्रेस विधायक अमीन कागजी और रफीक खान की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को और अधिक व्यापक बना दिया। नेताओं ने भी अपने संबोधन में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मानवता और सामाजिक एकजुटता को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

वक्त की पुकार: एकजुट समाज कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने एक संकल्प पत्र जैसा संदेश पढ़ा। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब दुनिया बंट रही है, तब आपसी सम्मान और एकता के बंधनों को मजबूत करना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने जयपुर के नागरिकों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने इस शांति मार्च और सभा को इतना गरिमामय बनाया।

रात के सन्नाटे में कर्बला मैदान से उठी यह आवाज केवल जयपुर तक सीमित नहीं रही। यह उन तमाम लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभरी है जो दुनिया में शांति और भाईचारे का सपना देखते हैं।

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