ईरान डील करीब, ट्रंप का पाकिस्तान दौरे का संकेत
न्यूयॉर्क से मुस्लिम नाउ
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को सौंपने पर तैयार हो गया है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अगर समझौता पाकिस्तान में हुआ तो वह खुद इस पर हस्ताक्षर करने के लिए इस्लामाबाद जा सकते हैं।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अंतिम दौर में है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह डील ईरान को स्थायी रूप से परमाणु हथियार बनाने से रोक देगी। हालांकि ईरान की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रंप ने कहा कि कुछ समय पहले तक ईरान जिन शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं था, अब वही बातें स्वीकार कर रहा है। उनके अनुसार इसका कारण अमेरिका की कड़ी सैन्य और आर्थिक रणनीति है। उन्होंने दावा किया कि समुद्री नाकेबंदी और सैन्य दबाव ने ईरान को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत का अगला दौर इसी सप्ताह के अंत में हो सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दो हफ्ते के भीतर एक स्थायी युद्धविराम समझौता भी हो सकता है। ट्रंप ने साफ कहा कि अगर यह डील नहीं हुई तो हालात फिर से युद्ध की ओर जा सकते हैं।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव पिछले कई हफ्तों से पूरी दुनिया की चिंता का कारण बना हुआ है। फरवरी के अंत में शुरू हुआ यह टकराव अब कूटनीतिक मोड़ ले चुका है। दोनों देशों के बीच पहले भी बातचीत के प्रयास हुए, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।
इस बार पाकिस्तान एक अहम मध्यस्थ के रूप में सामने आया है। ट्रंप ने पाकिस्तान की भूमिका की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख ने इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन साफ संकेत था कि इस्लामाबाद की कूटनीति असर दिखा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, पिछली वार्ता इस्लामाबाद में हुई थी, जो बेनतीजा रही। इसके बाद एक नया प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे लेकर पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल फिर से सक्रिय हुआ है। माना जा रहा है कि अगली बैठक भी पाकिस्तान में ही हो सकती है।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान अब अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने के लिए पहले से ज्यादा लचीला रुख दिखा रहा है। अमेरिका की मांग है कि ईरान लंबे समय के लिए यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाए। रिपोर्ट्स के अनुसार, वाशिंगटन 20 साल तक इस गतिविधि को रोकना चाहता है, जबकि तेहरान ने पांच साल का प्रस्ताव दिया है।
ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ नागरिक उपयोग के लिए है। लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को संदेह है कि इसके पीछे सैन्य उद्देश्य भी हो सकते हैं। यही वजह है कि यह मुद्दा लंबे समय से विवाद का कारण बना हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम में खाड़ी क्षेत्र भी तनाव में है। Strait of Hormuz में जहाजरानी प्रभावित हुई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी दबाव जारी रहा तो वह इस क्षेत्र में व्यापार बाधित कर सकता है।
अमेरिका की ओर से भी सख्त रुख जारी है। रक्षा अधिकारियों ने साफ कहा है कि अगर ईरान ने समझौता नहीं किया तो हवाई हमले फिर शुरू हो सकते हैं। साथ ही समुद्री नाकेबंदी और कड़ी की जा सकती है। हाल ही में अमेरिका ने ईरान के तेल उद्योग पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं।
इस बीच एक और मोर्चे पर राहत की खबर आई है। ट्रंप ने घोषणा की कि इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों का युद्धविराम हो गया है। इसमें हिजबुल्लाह की भी सहमति शामिल बताई जा रही है। यह कदम क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
ट्रंप ने कहा कि वह जल्द ही लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu को व्हाइट हाउस बुला सकते हैं। उनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाना है।
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात एक निर्णायक मोड़ पर हैं। अगर यह समझौता सफल होता है तो यह मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम कर सकता है। लेकिन अगर बातचीत विफल होती है तो इसका असर वैश्विक स्तर पर दिख सकता है।
अमेरिका की आंतरिक राजनीति में भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज है। कुछ सांसदों ने राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करने की कोशिश की, लेकिन यह प्रस्ताव खारिज हो गया। इससे साफ है कि वाशिंगटन में भी इस संघर्ष को लेकर मतभेद मौजूद हैं।
फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अगली वार्ता पर टिकी हैं। पाकिस्तान की भूमिका भी अहम बनी हुई है। अगर इस्लामाबाद में समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, तो यह न सिर्फ कूटनीतिक जीत होगी, बल्कि क्षेत्रीय शांति की दिशा में बड़ा कदम भी माना जाएगा।
ट्रंप ने अपने बयान के अंत में कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि समझौता होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया पहले ही कई बड़े संघर्ष देख चुकी है और अब समय है कि एक और युद्ध टाला जाए। उनके शब्दों में, यह फैसला इतिहास को बदल सकता है।

