जमाअत-ए-इस्लामी हिंद का राष्ट्रीय सम्मेलन: अपराध रोकथाम में धर्मों की भूमिका पर चर्चा
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो,नई दिल्ली
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद द्वारा “समाज में बढ़ते अपराध और उनकी रोकथाम” विषय पर एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन धार्मिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन की अध्यक्षता जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने की। सम्मेलन में विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं और बुद्धिजीवियों ने भाग लेकर अपने विचार साझा किए।
सम्मेलन में स्वामी सुशील गोस्वामी महाराज, स्वामी सर्व लोकानंद, फादर नॉर्बर्ट हर्मन, रब्बी इज़ाकील इसाक मालेकर, मर्ज़बान नरीमन ज़वाला और सिस्टर बी के हुसैन जैसी प्रमुख हस्तियाँ शामिल रहीं।
■ प्रो. सलीम इंजीनियर का उद्घाटन भाषण:
प्रो. सलीम इंजीनियर ने अपने अध्यक्षीय भाषण में समाज में बढ़ते अपराधों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केवल कठोर कानूनों से अपराध पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता। जब तक समाज में धार्मिक और नैतिक मूल्यों की पुनःस्थापना नहीं होगी, अपराधों पर नियंत्रण संभव नहीं है।
उन्होंने कहा, “मनुष्य इस धरती पर ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना है, लेकिन जब वह अपने जीवन का उद्देश्य भूल जाता है, तो अपराध की ओर बढ़ता है। आज परिवारों में विघटन, रिश्तों में दरार, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के खिलाफ बढ़ते अपराध गहरी चिंता का विषय हैं।”
प्रोफेसर इंजीनियर ने ज़ोर दिया कि सरकार को आपराधिक तत्वों को संरक्षण देना बंद करना चाहिए और मीडिया को समाज में सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा देने वाली सामग्री दिखानी चाहिए। साथ ही न्यायपालिका को भी तेज़ी से न्याय देने की दिशा में काम करना चाहिए ताकि दोषियों को समय पर सज़ा मिले।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में यूक्रेन और फिलिस्तीन में हो रहे युद्ध अपराधों की भी आलोचना की और कहा कि मानवता को सबसे अधिक खतरा उसी समय होता है जब धर्म और नैतिकता को पीछे छोड़ दिया जाता है।
■ विभिन्न धर्मगुरुओं के विचार:
🌿 स्वामी सुशील गोस्वामी महाराज:
उन्होंने कहा कि अपराध एक ऐसी सामाजिक बीमारी है जो पूरे समाज को प्रभावित करती है। धर्म के नाम पर हिंसा स्वीकार्य नहीं है और सभी धर्मगुरुओं को समाज में फैली बुराइयों के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की माँग भी दोहराई।
🌿 स्वामी सर्व लोकानंद:
उन्होंने कहा कि अपराध का मूल कारण मानवीय संवेदनाओं का ह्रास है। धर्म और नैतिकता का आभाव व्यक्ति को हिंसक बना देता है। उन्होंने ज़ोर दिया कि अच्छे संस्कारों की शिक्षा घर और स्कूल से शुरू होनी चाहिए, और हमें स्वयं को सुधारने की दिशा में पहल करनी होगी।
🌿 फादर नॉर्बर्ट हर्मन:
फादर नॉर्बर्ट ने कहा कि समाज में बढ़ती असमानता और अन्याय अपराधों की जड़ हैं। उन्होंने मीडिया को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उसे सकारात्मक मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना चाहिए।
🌿 रब्बी इज़ाकील इसाक मालेकर:
रब्बी साहब ने कहा कि समाज को आध्यात्मिक प्रकाश की आवश्यकता है। उन्होंने धर्म में दया, क्षमा और समानता को प्राथमिक बताया और कहा कि न्यायिक प्रणाली में सुधार से अपराधों पर रोक संभव है।
🌿 मर्ज़बान नरीमन ज़वाला:
उन्होंने अपराध के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोगों में नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच में बदलना अत्यंत आवश्यक है। कम उम्र से ही अपराध के दुष्परिणामों की शिक्षा दी जानी चाहिए।
🌿 सिस्टर बी के हुसैन:
सिस्टर हुसैन ने कहा कि आज समाज नैतिक पतन की ओर अग्रसर है। आत्म-चिंतन और व्यक्तिवाद से ऊपर उठकर सामूहिक सोच की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर किसी भी तरह की संकीर्णता को त्यागना चाहिए और प्रेम व भाईचारे को अपनाना चाहिए।
■ आगे की योजना:
सम्मेलन के अंत में प्रो. सलीम इंजीनियर ने घोषणा की कि जमाअत-ए-इस्लामी हिंद जल्द ही एक बड़े स्तर पर ऑफलाइन सम्मेलन आयोजित करेगी, जिसमें देशभर के धार्मिक और सामाजिक नेता भाग लेंगे और समाज को अपराधमुक्त बनाने की दिशा में ठोस पहल की जाएगी।
इस ऑनलाइन सम्मेलन के संयोजक जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के सहायक सचिव वारिस हुसैन थे।
निष्कर्ष:
यह सम्मेलन इस बात की गवाही देता है कि धार्मिक और नैतिक मूल्यों के पुनरुद्धार के बिना समाज को अपराधमुक्त नहीं बनाया जा सकता। सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने सामूहिक प्रयास और एकजुटता की आवश्यकता पर बल दिया — ताकि हम एक ऐसे न्यायपूर्ण, शांतिपूर्ण और सुरक्षित समाज का निर्माण कर सकें, जहाँ हर नागरिक गरिमा और सम्मान के साथ जी सके।

