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होर्मुज जलडमरूमध्य पर संग्राम: ट्रंप की नाकाबंदी और ईरान की जवाबी चेतावनी

तेहरान और वाशिंगटन के बीच बढ़ता तनाव अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर केंद्रित हो गया है।

मुख्य बिंदु:

  • ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की दोबारा चेतावनी दी।
  • डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी रहेगी।
  • ग़ालिबफ़ ने ट्रंप के दावों को सोशल मीडिया का झूठ बताया।
  • इस्लामाबाद में हुई वार्ताओं के बाद भी नहीं सुलझा विवाद।
  • वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे महत्वपूर्ण मार्ग।

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा कूटनीतिक संघर्ष अब समुद्र की लहरों पर एक खतरनाक मोड़ ले चुका है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने सीधे तौर पर अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई तो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया को उम्मीद थी कि हालिया युद्धविराम समझौतों के बाद तनाव कम होगा। लेकिन हकीकत इसके उलट नजर आ रही है।

सोशल मीडिया बनाम जमीनी हकीकत

इस पूरे विवाद में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब ग़ालिबफ़ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब व्यापार के लिए पूरी तरह खुला है। इसके जवाब में ईरानी अध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि ट्रंप के दावे झूठे हैं। उन्होंने साफ किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहेगा या बंद यह सोशल मीडिया की पोस्ट से तय नहीं होगा। यह फैसला जमीनी हकीकत और ईरान की सुरक्षा चिंताओं के आधार पर लिया जाएगा। ग़ालिबफ़ ने जोर देकर कहा कि कोई भी जहाज ईरान की अनुमति और निर्धारित मार्गों के बिना यहां से नहीं गुजर सकता।

ट्रंप की नाकाबंदी और ईरान का रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी रणनीति पर अडिग हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि भले ही व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता खुल गया हो लेकिन ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी। ट्रंप का कहना है कि जब तक ईरान के साथ सभी समझौते शत-प्रतिशत पूरे नहीं हो जाते तब तक यह पाबंदी नहीं हटेगी। हालांकि उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि बातचीत की प्रक्रिया जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंच जाएगी। ट्रंप के अनुसार समझौते के अधिकांश बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है। लेकिन ईरानी पक्ष इसे अमेरिका की दादागिरी के तौर पर देख रहा है।

युद्धविराम की शर्तों और वार्ताओं का दौर

इस संघर्ष की जड़ें फरवरी में शुरू हुए परमाणु और मिसाइल विवाद में छिपी हैं। करीब 40 दिनों के भीषण संघर्ष के बाद अप्रैल की शुरुआत में युद्धविराम की घोषणा हुई थी। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने मुलाकात भी की। इस बैठक में ईरानी दल का नेतृत्व खुद ग़ालिबफ़ कर रहे थे। वहीं अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मौजूद थे। घंटों चली लंबी बातचीत के बाद भी जब कोई ठोस समाधान नहीं निकला तो अमेरिकी केंद्रीय कमान यानी सेंटकॉम ने सख्त कदम उठाया। 12 अप्रैल को सेंटकॉम ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी। इस नाकाबंदी का मतलब है कि न तो कोई विदेशी जहाज ईरान आ सकता है और न ही ईरान का कोई मालवाहक जहाज बाहर जा सकता है।

वैश्विक बाजार पर असर और लेबनान का कनेक्शन

हाल ही में इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के युद्धविराम पर सहमति बनी है। ईरान ने इसे सम्मान देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को अस्थायी तौर पर खोलने का फैसला किया था। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अर्गाची ने इस बात की पुष्टि भी की थी। लेबनान में शांति स्थापित करना वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत की एक प्रमुख शर्त थी। समुद्री मार्ग खुलने से वैश्विक बाजार ने राहत की सांस ली है। कच्चे तेल की कीमतों पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। लेकिन जब तक अमेरिकी नाकाबंदी जारी है तब तक अनिश्चितता के बादल मंडराते रहेंगे।

भविष्य की चुनौतियां

ईरानी नेतृत्व अब पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा है। ग़ालिबफ़ का संदेश साफ है कि बिना व्यापारिक आजादी के वे समुद्री सुरक्षा की गारंटी नहीं देंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का एक-तिहाई समुद्री तेल गुजरता है। अगर ईरान अपनी धमकी पर अमल करता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। वहीं दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन अपनी ‘मैक्सिमम प्रेशर’ यानी अत्यधिक दबाव वाली नीति को छोड़ने को तैयार नहीं है।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस गतिरोध को तोड़ पाएगी। या फिर जिद की यह जंग एक नए वैश्विक संकट को जन्म देगी। आने वाले कुछ दिन इस क्षेत्र की शांति और व्यापार के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं। जमीनी हकीकत बदल रही है और समुद्र का तापमान बढ़ रहा है। ऐसे में केवल शांतिपूर्ण बातचीत ही एकमात्र रास्ता नजर आती है। लेकिन फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं।

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