फोर्ब्स लिस्ट में जगह, कदीर ने बढ़ाया देश का मान
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नई दिल्ली।
देश की राजनीति में महिला आरक्षण बिल और वैश्विक पटल पर ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के शोर में एक ऐसी खबर आई है, जो भारतीय मुसलमानों और शिक्षा के क्षेत्र में निस्वार्थ काम करने वालों का सीना गर्व से चौड़ा कर देती है। दुनिया की प्रतिष्ठित बिजनेस मैगजीन फोर्ब्स इंडिया ने कर्नाटक के बीदर स्थित शाहीन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अब्दुल कदीर को ‘भविष्य का लीडर’ (Leader of Tomorrow 2026) चुना है। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस सोच का है जो बिना किसी शोर-शराबे के देश का भविष्य संवारने में जुटी है।
फोर्ब्स ने साल 2026 के लिए भारत की जिन आठ प्रभावशाली शख्सियतों को अपनी सूची में जगह दी है, उनमें अब्दुल कदीर का नाम शामिल होना बेहद मायने रखता है। मैगजीन ने उन्हें शिक्षा के जरिए समाज में बड़े बदलाव लाने वाले नायकों की श्रेणी में रखा है। यह सम्मान उन लोगों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर आया है जो शिक्षा को व्यापार नहीं, बल्कि मिशन मानते हैं।

फर्श से अर्श तक का सफर और शाहीन की उड़ान
डॉ. अब्दुल कदीर का सफर एक साधारण परिवार से शुरू हुआ था। उन्होंने 1989 में कर्नाटक के बीदर जैसे पिछड़े इलाके में शाहीन ग्रुप की बुनियाद रखी थी। आज यह संस्थान एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। वर्तमान में इसके तहत 116 संस्थान चल रहे हैं, जहां 45,000 से ज्यादा छात्र शिक्षा ले रहे हैं। अब्दुल कदीर की असली पहचान उनकी वह शैक्षिक दूरदर्शिता है, जिसने मदरसों के बच्चों और स्कूल छोड़ चुके (ड्रॉपआउट) युवाओं के हाथ में मुख्यधारा की किताबें थमा दीं।
संस्थान की सबसे बड़ी कामयाबी ‘एकेडमिक इंटेंसिव केयर यूनिट’ (AICU) मॉडल है। यह मॉडल उन बच्चों के लिए संजीवनी साबित हुआ जो पढ़ाई में पिछड़ गए थे। डॉ. कदीर ने इसे एक मिशन की तरह चलाया ताकि फेल हो चुके या पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को आधुनिक तकनीक और बेहतर मार्गदर्शन से जोड़कर उन्हें डॉक्टर और इंजीनियर बनाया जा सके।
मदरसों के बच्चों को मिला नया आसमान
आवाज द वॉयस के साथ एक बातचीत में डॉ. अब्दुल कदीर ने अपनी मुहिम की बारीकियों को साझा किया था। उन्होंने बताया था कि शाहीन संस्था का मकसद केवल डिग्री बांटना नहीं है। उनका मुख्य ध्यान उन बच्चों पर है जो पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते। विशेष रूप से मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए उन्होंने एक नया रास्ता तैयार किया। उन्होंने साबित किया कि अगर सही दिशा मिले तो धार्मिक शिक्षा लेने वाला बच्चा भी विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में झंडे गाड़ सकता है।
आज शाहीन ग्रुप की दर्जनों शाखाओं से पढ़कर निकले छात्र देश के बड़े मेडिकल कॉलेजों में अपनी जगह बना रहे हैं। डॉ. कदीर का मानना है कि जब तक लड़कियां शिक्षित और आत्मनिर्भर नहीं होंगी, तब तक समाज का पूर्ण विकास संभव नहीं है। इसी सोच के साथ वह महिला शिक्षा के क्षेत्र में भी नई राहें बना रहे हैं।
आधुनिक और पारंपरिक शिक्षा का बेजोड़ संगम
अब्दुल कदीर का शैक्षिक दर्शन आधुनिक विषयों और नैतिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाना है। उनके संस्थानों में छात्रों को केवल परीक्षाओं के लिए तैयार नहीं किया जाता, बल्कि उनके चरित्र निर्माण पर भी जोर दिया जाता है। यही कारण है कि शाहीन ग्रुप के छात्र न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होते हैं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में भी सामने आते हैं। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि अब शाहीन ग्रुप का विस्तार विदेशों तक हो चुका है और वे भारतीय छात्रों के लिए बाहर भी मेडिकल शिक्षा के रास्ते खोल रहे हैं।
सोशल मीडिया पर बधाइयों का तांता
फोर्ब्स की सूची में नाम आने के बाद से ही डॉ. अब्दुल कदीर को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘सच्ची मेहनत की जीत’ बता रहे हैं। असम के सिलचर से एक अभिभावक ने लिखा कि माता-पिता अपनी गाढ़ी कमाई और पूरा भरोसा डॉ. कदीर के हाथों में सौंपते हैं। लोगों की उम्मीद है कि शाहीन एकेडमी इसी तरह पूरी ईमानदारी के साथ बच्चों का भविष्य संवारती रहेगी ताकि वे पहले ही प्रयास में एम्स जैसे संस्थानों में पहुंच सकें।
डॉ. अब्दुल कदीर का ‘लीडर ऑफ टुमारो’ चुना जाना इस बात का प्रमाण है कि अगर इरादे नेक हों और मेहनत सच्ची, तो दुनिया आपकी काबिलियत का लोहा जरूर मानती है। उनकी यह उपलब्धि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। भारत के शैक्षिक परिदृश्य में अब्दुल कदीर का नाम अब उस भरोसे का पर्याय बन चुका है, जो अंधेरे में उम्मीद की लौ जलाता है।

