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ट्रंप का बड़ा दावा: ‘पतन की कगार पर ईरान’, हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर फंसा शांति प्रस्ताव

नई दिल्ली/वाशिंगटन

मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने खुद को “पतन की स्थिति” (State of Collapse) में बताया है। तेहरान की ओर से आए हालिया शांति प्रस्ताव को ट्रंप ने ठुकरा दिया है, जिससे वैश्विक तेल बाजारों में खलबली मच गई है और युद्ध समाप्त होने की उम्मीदों को करारा झटका लगा है।


ट्रंप का तेहरान पर तीखा प्रहार

मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के माध्यम से राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलासा किया कि ईरान के नेतृत्व ने अमेरिका को सूचित किया है कि वे आंतरिक रूप से चरमरा रहे हैं। ट्रंप ने लिखा, “ईरान ने अभी हमें बताया है कि वे ‘पतन की स्थिति’ में हैं। वे चाहते हैं कि हम जल्द से जल्द हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खोलें, क्योंकि वे अपने नेतृत्व की स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।”

हालांकि, तेहरान की ओर से इस विशिष्ट दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रजा तलई-निक ने अमेरिका की मांगों को “अतार्किक और अवैध” करार दिया है।


ईरान का ‘चरणबद्ध’ शांति प्रस्ताव: क्या है पेंच?

पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुँचाए गए ईरानी प्रस्ताव में युद्ध को समाप्त करने के लिए तीन चरणों की रूपरेखा तैयार की गई थी:

  1. युद्ध विराम: सबसे पहले युद्ध को रोकना और अमेरिका से भविष्य में हमला न करने की गारंटी लेना।
  2. आर्थिक नाकाबंदी का अंत: अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरान की समुद्री घेराबंदी को समाप्त करना और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरानी नियंत्रण बहाल करना।
  3. परमाणु वार्ता: इन दो चरणों के पूरा होने के बाद ही ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करेगा।

अमेरिका का रुख: राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस “चरणबद्ध” दृष्टिकोण से असहमत हैं। ट्रंप चाहते हैं कि परमाणु मुद्दे पर पहले दिन से ही चर्चा हो। रुबियो ने फॉक्स न्यूज से कहा कि ईरान के वार्ताकार बहुत चतुर हैं और किसी भी सौदे को यह सुनिश्चित करना होगा कि ईरान परमाणु हथियार की ओर न बढ़े।


वैश्विक ऊर्जा संकट और ‘फ्रीज्ड कॉन्फ्लिक्ट’ का डर

इस कूटनीतिक गतिरोध का सबसे बुरा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें (Brent Crude) 2.8% बढ़कर $111.26 प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं। विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि यदि मई तक युद्ध नहीं थमा, तो 2026 में ऊर्जा की कीमतें 24% तक उछल सकती हैं, जो रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद का सबसे उच्चतम स्तर होगा।

कतर ने इस स्थिति को “फ्रीज्ड कॉन्फ्लिक्ट” (जमा हुआ संघर्ष) करार देने की चेतावनी दी है। कतरी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा कि दुनिया ऐसे शांति समझौते को बर्दाश्त नहीं कर सकती जो भविष्य में कभी भी दोबारा भड़क जाए। उन्हें एक “स्थायी शांति” की तलाश है।


सहयोगियों में फूट: जर्मनी और ब्रिटेन का रुख

ईरान संघर्ष ने अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों के बीच दरार पैदा कर दी है। ट्रंप ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि वे क्या बात कर रहे हैं। मर्ज़ ने हाल ही में कहा था कि ईरान का नेतृत्व अमेरिका को अपमानित कर रहा है और ट्रंप प्रशासन के पास युद्ध से बाहर निकलने की कोई ठोस रणनीति नहीं है।

दूसरी ओर, ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए मतभेदों के बावजूद “लोकतंत्र की रक्षा” के लिए एकजुट रहने की बात कही। हालांकि, पर्दे के पीछे ईरान युद्ध को लेकर लंदन और वाशिंगटन के बीच गहरे मतभेद जगजाहिर हैं।


युद्ध के मैदान की कड़वी हकीकत

राजनीतिक बयानबाजी के बीच जमीन पर तबाही जारी है।

  • लेबनान में हिंसा: 17 अप्रैल को घोषित “सीजफायर” के बावजूद इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच गोलाबारी जारी है, जिसमें कम से कम 40 लोग मारे जा चुके हैं।
  • नौसैनिक नाकाबंदी: हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से रोजाना 130 से अधिक जहाज गुजरते थे, अब वहां सन्नाटा पसरा है। पिछले 24 घंटों में केवल 7 जहाज वहां से गुजरे हैं और उनमें से एक भी तेल टैंकर नहीं था।
  • सऊदी अरब में हलचल: यूएई ने ओपेक (OPEC) और ओपेक+ से अलग होने का फैसला किया है, जो खाड़ी देशों के बीच बढ़ती दरार को दर्शाता है।

ट्रंप की गिरती लोकप्रियता और घरेलू दबाव

अमेरिका के भीतर भी ट्रंप के लिए चुनौतियां बढ़ रही हैं। हालिया रॉयटर्स/इप्सोस पोल के अनुसार, ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 34% रह गई है। अमेरिकी जनता बढ़ती महंगाई और इस “महंगे युद्ध” से थक चुकी है। यही कारण है कि ट्रंप पर जल्द से जल्द इस संघर्ष को खत्म करने का भारी दबाव है, लेकिन वे ईरान को कोई भी ढील देने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।


निष्कर्ष: क्या वार्ता की मेज पर लौटेगी शांति?

ईरान ने दावा किया है कि वह समुद्री नाकाबंदी के बावजूद उत्तरी और पूर्वी व्यापारिक गलियारों का उपयोग कर अपनी अर्थव्यवस्था को बचाए हुए है। वहीं, अमेरिका ने ईरान के ‘शैडो बैंकिंग’ सिस्टम पर नए प्रतिबंध लगाकर उसकी कमर तोड़ने की कोशिश की है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और कतर की चेतावनियों के बीच, अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप अपनी शर्तों पर ईरान को झुका पाएंगे, या यह संघर्ष एक लंबे और विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध में बदल जाएगा।