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ईरान-अमेरिका तनाव: शांति के लिए पाकिस्तान बना माध्यम, ईरान ने भेजा नया प्रस्ताव

इस्लामाबाद/तेहरान

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच शांति की एक नई उम्मीद जागी है। ईरान ने अमेरिका के साथ जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान के जरिए एक नया ‘वार्ता प्रस्ताव’ पेश किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच 40 दिनों के युद्ध के बाद फिलहाल युद्धविराम तो लागू है, लेकिन कूटनीतिक गतिरोध बरकरार है।


पाकिस्तान की मध्यस्थता और नया प्रस्ताव

ईरान के सरकारी मीडिया और समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, ईरान ने गुरुवार शाम अपनी नई वार्ता योजना का मसौदा पाकिस्तान को सौंप दिया है। पाकिस्तान इस प्रक्रिया में अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य मध्यस्थ (ثالث) की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव की बारीकियों का खुलासा अभी नहीं किया गया है, लेकिन इसे युद्ध के स्थायी अंत की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

तनाव का मौजूदा परिदृश्य: जलडमरूमध्य और नाकेबंदी

युद्धविराम के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है:

  • अमेरिका: अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी कर रखी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अधिकारियों को इस नाकेबंदी को महीनों तक जारी रखने के संकेत दिए हैं।
  • ईरान: जवाब में ईरान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लगभग बंद कर रखा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है।

क्षेत्रीय देशों से संपर्क और आर्थिक प्रभाव

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सऊदी अरब, कतर, तुर्की, इराक और अजरबैजान के अपने समकक्षों से टेलीफोन पर बात कर ‘युद्ध समाप्त करने के नए प्रयासों’ पर चर्चा की है।

दूसरी ओर, इस तनाव का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। तेल की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर से 50% अधिक बनी हुई हैं। अमेरिका में महंगाई 3.5% तक पहुंच गई है, जिससे ट्रंप प्रशासन पर घरेलू दबाव बढ़ रहा है।


“हम युद्ध नहीं चाहते” – ईरानी न्यायपालिका

ईरानी न्यायपालिका के प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी ने स्पष्ट किया कि ईरान कभी भी बातचीत से पीछे नहीं हटा है। उन्होंने कहा:

“हम किसी पर थोपी गई शर्तों को स्वीकार नहीं करेंगे, लेकिन तेहरान युद्ध की वापसी नहीं चाहता। हम युद्ध का स्वागत नहीं करते और न ही इसे जारी रखना चाहते हैं।”

वाशिंगटन में कानूनी बहस

अमेरिका में इस बात पर कानूनी जंग छिड़ी है कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने बिना कांग्रेस की मंजूरी के युद्ध जारी रखने की 60 दिनों की समय सीमा पार कर ली है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और अन्य अधिकारियों का तर्क है कि युद्धविराम के कारण यह समय सीमा प्रभावी नहीं है और तकनीकी रूप से 28 फरवरी को शुरू हुआ युद्ध ‘खत्म’ हो चुका है।

नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्य-अवधि चुनावों (Mid-term Elections) से पहले ट्रंप प्रशासन इस संकट का समाधान निकालने के लिए भारी दबाव में है।