लक्ष्मी नगर में गूँजी कुरान की आयतें: ‘बादशाही और सत्ता केवल अल्लाह के लिए’
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नई दिल्ली, लक्ष्मी नगर:
राजधानी दिल्ली के लक्ष्मी नगर स्थित ललिता पार्क क्षेत्र में ‘जमात-ए-इस्लामी हिंद’ (JIH) की स्थानीय इकाई द्वारा एक विशेष ‘दर्स-ए-कुरान’ (कुरान शिक्षा) कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। एक मीनार मस्जिद के परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल क्षेत्र के मुसलमानों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ा, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों और ईश्वरीय सत्ता के प्रति जागरूकता का संदेश भी प्रसारित किया।
मस्जिद परिसर में आध्यात्मिक समागम
यह कार्यक्रम ललिता पार्क सर्कल यूनिट के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। विशेष बात यह रही कि मस्जिद के मतवल्ली एस.टी. रजा साहब के विशेष सहयोग और अनुमति से मस्जिद परिसर के भीतर स्थित एक दुकान में इस सभा का आयोजन संभव हुआ। जमात के पदाधिकारियों ने इसे ‘तहरीक-ए-इस्लामी’ के एक छोटे से काफिले के लिए बड़ी कामयाबी और अल्लाह का विशेष अनुग्रह करार दिया। उन्होंने कहा कि मस्जिद के साये में कुरान की समझ विकसित करने वाली इस मजलिस का कायम होना क्षेत्र में दीन की रोशनी फैलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सूरह अत-तग़ाबुन की रोशनी में जीवन का दर्शन
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, लक्ष्मी नगर यूनिट के अमीर-ए-मुकामी (स्थानीय अध्यक्ष) फलाहुद्दीन फलाही ने कुरान मजीद की सूरह अत-तग़ाबुन की शुरुआती दो आयतों का बेहद प्रभावी अनुवाद और व्याख्या प्रस्तुत की।
उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रह्मांड की हर छोटी-बड़ी चीज अल्लाह की तस्बीह (महिमा गान) में जुटी है। फलाही साहब ने जोर देकर स्पष्ट किया कि “संपूर्ण ब्रह्मांड की बादशाहत और संप्रभुता केवल अल्लाह के पास है।” लगभग आधे घंटे के अपने ओजस्वी संबोधन में उन्होंने समझाया कि अल्लाह की किब्रियाई (महानता) केवल नमाज या रोजे तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह एक मुसलमान के जीवन के हर पहलू में झलकनी चाहिए।
व्यापार और व्यवहार में ईश्वरीय आज्ञाकारिता
अमीर-ए-मुकामी ने व्यावहारिक उदाहरण देते हुए कहा कि चाहे हमारा कारोबार हो, पारिवारिक जीवन हो, लेन-देन हो या आपसी सामाजिक संबंध—हर मोर्चे पर अल्लाह की मर्जी और उसकी इताअत (आज्ञाकारिता) को प्राथमिकता देना ही सच्ची कामयाबी की बुनियाद है। उन्होंने उपस्थित लोगों को झकझोरते हुए कहा कि आज समाज में जो नैतिक गिरावट दिख रही है, उसका समाधान केवल कुरान के दर्शन को समझने और उसे अपने आचरण में उतारने में ही निहित है।
प्रतिभागियों में नई ऊर्जा का संचार
इस दर्स-ए-कुरान में शामिल हुए स्थानीय लोगों ने कार्यक्रम को ‘रूह परवर’ (आत्मा को सुकून देने वाला) बताया। कई युवाओं और बुजुर्गों ने साझा किया कि इस व्याख्या ने उनके जीवन के प्रति दृष्टिकोण को बदल दिया है। उपस्थित लोगों में कुरान को केवल पढ़ने के बजाय उसे समझने और समाज के दूसरे वर्गों तक पहुँचाने का संकल्प भी देखा गया।
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति और भविष्य का संकल्प
कार्यक्रम के सफल आयोजन में कई सक्रिय कार्यकर्ताओं और स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी भूमिका निभाई। इस अवसर पर एस.टी. रजा साहब, वासिक इमाम साहब, मोहम्मद असलम साहब, अतहर हुसैन अंसारी साहब, मसरूर आलम साहब और सनाउल्लाह साहब प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन एक सामूहिक दुआ के साथ हुआ, जिसमें ललिता पार्क और आसपास के क्षेत्रों में शांति, भाईचारे और ईश्वरीय संदेश के प्रचार-प्रसार के लिए प्रार्थना की गई। जमात के पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि ललिता पार्क से शुरू हुई यह छोटी सी कोशिश आने वाले समय में एक मजबूत आंदोलन की शक्ल अख्तियार करेगी, जिससे लोग कुरान की शिक्षाओं के प्रति और अधिक आकर्षित होंगे।
मुख्य बिंदु (Quick Highlights):
- आयोजक: जमात-ए-इस्लामी हिंद (ललिता पार्क यूनिट)।
- स्थान: एक मीनार मस्जिद परिसर, लक्ष्मी नगर।
- विषय: सूरह अत-तग़ाबुन की व्याख्या और ईश्वरीय संप्रभुता।
- मुख्य संदेश: व्यापार और निजी जीवन में ईमानदारी और अल्लाह के प्रति समर्पण।

