खाड़ी में महायुद्ध की आहट: ट्रंप की ‘लव टैप’ और ईरान का पलटवार
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई/ वाॅशिंगटन
मिडल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम की डोर बेहद कमजोर पड़ती दिख रही है। ताज़ा घटनाक्रम में हॉर्मुज जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में ईरान ने अमेरिकी विध्वंसक जहाजों पर हमला किया। इसके जवाब में अमेरिका ने भी ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन हमलों को ‘मामूली’ बता रहे हैं। उन्होंने इसे ‘लव टैप’ और ‘ट्रिफल’ यानी तुच्छ घटना करार दिया है। लेकिन जमीन पर हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। ईरान की सेना का दावा है कि अमेरिकी बलों ने उनके एक तेल टैंकर और एक अन्य जहाज को निशाना बनाया है। दक्षिण ईरान के रिहायशी इलाकों में भी हवाई हमलों की खबरें हैं।
8 मई की सुबह पश्चिम एशिया के लिए नई मुश्किलें लेकर आई। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक ठिकानों पर धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरानी मीडिया का कहना है कि उनके बलों ने दुश्मन की इकाइयों पर गोलीबारी की है। इस तनाव के बीच एक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमला हुआ। इसमें चालक दल के सात फिलीपीनी सदस्य घायल हो गए हैं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना दिखाती है कि यह विवाद अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा। यह वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के मुताबिक करीब 1,500 जहाज और 20,000 नाविक इस समय खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने साफ किया है कि उनके नौसैनिकों पर ईरानी मिसाइलों और ड्रोन से हमला हुआ। इसके जवाब में अमेरिका ने उन सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया जो इन हमलों के लिए जिम्मेदार थे। सेंटकॉम का कहना है कि वे तनाव बढ़ाना नहीं चाहते लेकिन अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वहीं दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका पर युद्ध विराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने पहले उनके तेल टैंकर पर हमला किया था। इसी के जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाया। दोनों देश एक-दूसरे पर समझौते को तोड़ने का इल्जाम लगा रहे हैं।
ट्रंप का रुख इस पूरे मामले में काफी सख्त और बेबाक नजर आ रहा है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अगर ईरान ने शांति समझौते पर जल्द दस्तखत नहीं किए तो भविष्य में और भी भयानक हमले होंगे। ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि वे ईरान को ‘उखाड़ फेंकेंगे’। एक तरफ वे बातचीत के सफल होने का दावा कर रहे हैं और दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी खजाना विभाग ने ईरान से जुड़े तेल तस्करों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान इराकी तेल संसाधनों की तस्करी कर रहा है। इस पैसे का इस्तेमाल आतंकी गुटों और मिलिशिया को फंडिंग देने के लिए किया जा रहा है।
ईरान के भीतर हालात काफी तनावपूर्ण हैं। राजधानी तेहरान के ऊपर हवाई रक्षा प्रणालियां सक्रिय देखी गईं। वहां के आम नागरिक इस खींचतान से परेशान हैं। तेहरान के एक नागरिक ने बताया कि उन्हें किसी भी पक्ष से समझौते की उम्मीद नहीं दिख रही है। लोगों को लग रहा है कि यह ट्रंप के सियासी खेल का हिस्सा है। अगर शांति की बात हो रही है तो खाड़ी में इतने जंगी जहाज क्यों भेजे जा रहे हैं? यह सवाल हर ईरानी नागरिक के जेहन में है। युद्ध की इस आग की लपटें अब लेबनान तक भी पहुंच रही हैं। इजरायल ने दक्षिण लेबनान में हमले तेज कर दिए हैं। इन हमलों में बच्चों समेत कम से कम 11 लोगों की जान जा चुकी है।
लेबनान के साथ तनाव कम करने के लिए अमेरिका मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। खबर है कि 14 और 15 मई को इजरायल और लेबनान के बीच नई बातचीत हो सकती है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का मानना है कि शांति समझौता संभव है। लेकिन हिजबुल्लाह की सक्रियता इसमें सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई है। लेबनान इस युद्ध में तब खिंचा चला आया जब हिजबुल्लाह ने ईरानी नेता की हत्या के जवाब में इजरायल पर रॉकेट दागे थे। अब इजरायल लगातार हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बमबारी कर रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक ताजा हमलों में 12 और लोग मारे गए हैं।
Like a rogue gang, the Iranian regime is pillaging resources that rightfully belong to the Iraqi people. Treasury will not stand idly by as Iran's military exploits Iraqi oil to fund terrorism against the United States and our partners. https://t.co/BgpGCBN7FW
— Treasury Secretary Scott Bessent (@SecScottBessent) May 7, 2026
खाड़ी में चल रहा यह संघर्ष केवल सीमा तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। ईरान ने इस पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। उसने जहाजों की आवाजाही के लिए नए कड़े नियम लागू कर दिए हैं। ट्रंप ने इस रास्ते को बलपूर्वक खुलवाने की कोशिश की थी लेकिन बाद में कदम पीछे खींच लिए। वे फिलहाल बातचीत को एक मौका देना चाहते हैं। ट्रंप ने यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन से भी बात की है। दोनों इस बात पर सहमत हैं कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने नहीं दिया जाएगा।
फिलहाल हालात एक अनिश्चित मोड़ पर खड़े हैं। पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को उम्मीद है कि यह अस्थायी युद्ध विराम एक स्थायी समझौते में बदल जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही इशारा कर रही है। दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं। समुद्र में बारूदी हलचल बढ़ गई है। अगर जल्द ही कोई ठोस कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह ‘मामूली’ कही जाने वाली झड़प एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है। दुनिया की नजरें अब अगले कुछ दिनों के घटनाक्रम पर टिकी हैं। क्या ट्रंप का ‘लव टैप’ वाकई शांति लाएगा या यह किसी बड़े तूफान से पहले की शांति है? इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।

