NewsPolitics

नीट परीक्षा विवाद पर आमने-सामने आए राहुल गांधी और सैयद शाहनवाज हुसैन

नई दिल्ली

देश की शिक्षा व्यवस्था और नीट परीक्षा से जुड़े विवादों को लेकर इस समय सियासत काफी गरमा गई है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा के बीच इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है. भाजपा के वरिष्ठ नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए उन पर बच्चों के भविष्य के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया है.

शाहनवाज हुसैन ने कहा कि राहुल गांधी अब बच्चों के संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने साफ किया कि सरकार नीट पेपर लीक मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर है. इस मामले में लगातार जरूरी कार्रवाई की जा रही है. देश के शिक्षा मंत्री इस बात को सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी दोबारा कभी न हो.

राहुल गांधी ने सरकार पर साधा था निशाना

यह पूरा विवाद राहुल गांधी के उस बयान के बाद शुरू हुआ जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए थे. राहुल गांधी ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा के पेपर लीक, सीबीएसई मूल्यांकन में आ रही कमियों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लागू की जा रही त्रि-भाषा नीति को लेकर सरकार को घेरा था.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखी अपनी पोस्ट में कांग्रेस सांसद ने कहा था कि सरकार की नाकामियों की वजह से अलग-अलग उम्र के छात्र अनिश्चितता के माहौल में जीने को मजबूर हैं. राहुल गांधी के मुताबिक पहले नीट पेपर लीक होने से 22 लाख छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया. इसके बाद सीबीएसई कक्षा 12वीं के छात्रों को मूल्यांकन प्रणाली में गड़बड़ी के कारण उम्मीद से बेहद कम अंक मिले हैं. इससे कई छात्र कॉलेज में दाखिला लेने की पात्रता खो रहे हैं.

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठ रही मांग

राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय अब आपदा का विभाग बनकर रह गया है. विपक्ष के नेता ने कहा कि अलग-अलग उम्र के छात्रों से जुड़ी तीन बड़ी परीक्षाओं में लगातार कमियां सामने आई हैं. इसके बावजूद जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. उन्होंने प्रधानमंत्री से भी इस पूरे मामले में देश के लाखों बच्चों से माफी मांगने की मांग की है.

नीट परीक्षा को लेकर विवाद तब और बढ़ गया जब पेपर लीक के पुख्ता सबूत मिलने के बाद पूरी परीक्षा को रद्द करना पड़ा था. अब इस परीक्षा को दोबारा आयोजित कराने का फैसला लिया गया है. जानकारी के मुताबिक आगामी 21 जून को नीट की दोबारा परीक्षा कराई जाएगी.

सरकार ने उठाए कई बड़े कदम

विपक्ष के हमलों के बीच शिक्षा मंत्रालय ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई बड़े सुधारों का एलान किया है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने घोषणा की है कि अगले साल से नीट-यूजी की परीक्षा को पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी सीबीटी मोड में कराया जाएगा. इससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सकेगी.

दूसरी तरफ सीबीएसई ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कुछ नए बदलाव लागू किए हैं. बोर्ड ने आगामी 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई को अनिवार्य कर दिया है. हालांकि बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि कक्षा 10वीं में तीसरी भाषा के लिए कोई बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी. नए नियमों के अनुसार तीन में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी जरूरी हैं. विपक्ष इन नए नियमों को जल्दबाजी में लागू करने का आरोप लगा रहा है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *