शिया मौलाना का ईरान समर्थकों के खिलाफ एक और विवादस्पद बयान आया
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
गुजरात के शिया मौलाना Hasan Ali Rajani एक बार फिर अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने ईरान समर्थक शिया समूहों और कुछ व्यक्तियों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
मौलाना हसन अली राजानी ने हालिया संबोधन में दावा किया कि ईरानी क्रांति के बाद दुनिया में सांप्रदायिक तनाव और हिंसा बढ़ी है। उन्होंने कहा कि ईरान की 1979 की क्रांति से पहले विभिन्न समुदायों के बीच इस तरह के टकराव कम थे। हालांकि उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई सार्वजनिक दस्तावेज या प्रमाण पेश नहीं किया।
अपने बयान में मौलाना राजानी ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान के सर्वोच्च नेता और उनके परिवार की सादगी की छवि वास्तविकता से अलग है। साथ ही उन्होंने कुछ ईरान समर्थक समूहों पर आर्थिक लाभ लेने और चंदे के नाम पर संपत्ति बनाने के आरोप भी लगाए।
राजानी ने दावा किया कि दिल्ली और नोएडा में कुछ ईरान समर्थक लोगों के पास बड़ी संख्या में फ्लैट और व्यावसायिक संपत्तियां हैं। उन्होंने इन आरोपों की जांच की मांग करते हुए कहा कि मामले की केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराई जानी चाहिए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सबसे गंभीर टिप्पणी उस समय सामने आई जब उन्होंने देश के गृह मंत्री के खिलाफ कथित साजिश का जिक्र किया। राजानी ने कहा कि कुछ कट्टर तत्वों द्वारा धमकी भरी बातें की जा रही हैं और इस मामले में जांच एजेंसियों को सक्रिय होना चाहिए। उन्होंने इस विषय पर केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच की मांग उठाई।
मौलाना के बयान का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। कई लोगों ने उनकी भाषा और शब्दों को लेकर सवाल उठाए। आलोचकों का कहना है कि किसी भी समुदाय के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल तनाव बढ़ा सकता है। वहीं कुछ समर्थकों का कहना है कि उन्होंने अपनी चिंता और आशंकाएं सार्वजनिक रूप से रखी हैं।
अब तक इन आरोपों पर ईरान समर्थक शिया संगठनों या संबंधित पक्षों की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि इतने गंभीर आरोपों की सच्चाई क्या है और क्या इनके समर्थन में कोई ठोस सबूत मौजूद हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दों पर सार्वजनिक बयानबाजी में संयम जरूरी होता है। बिना प्रमाण लगाए गए आरोप समाज में तनाव बढ़ा सकते हैं। ऐसे मामलों में जांच और तथ्य सामने आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना बेहतर माना जाता है।
फिलहाल मौलाना हसन अली राजानी का यह बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि उनके आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं और क्या किसी एजेंसी स्तर पर इस संबंध में कोई कार्रवाई होती है।

