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ईरान पहुंचे आसिम मुनीर, अमेरिका समझौते के करीब

इस्लामाबाद/तेहरान:

पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी तनाव के बीच एक नई कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर शुक्रवार को ईरान पहुंचे। उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की संभावना फिर मजबूत होती दिख रही है। इसी दौरान कतर के वार्ताकारों की टीम भी तेहरान पहुंची है। माना जा रहा है कि युद्ध विराम को स्थायी बनाने और बाकी विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत तेज हो गई है।

पाकिस्तान की ओर से इस दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है। फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुए तनाव के बीच इस्लामाबाद ने खुद को एक सक्रिय मध्यस्थ के रूप में पेश किया है। पाकिस्तान लगातार तेहरान और वाशिंगटन दोनों से संपर्क बनाए हुए है ताकि हालात और न बिगड़ें।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने इस्लामाबाद के एक कूटनीतिक सूत्र के हवाले से पहले ही संकेत दे दिया था कि आसिम मुनीर तेहरान रवाना हो चुके हैं। वहां उनकी मुलाकात ईरान के शीर्ष अधिकारियों से होनी है। हालांकि यात्रा के एजेंडे को लेकर औपचारिक जानकारी सीमित रखी गई है, लेकिन माना जा रहा है कि बातचीत का केंद्र अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव रहेगा।

पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व पिछले कुछ महीनों से पर्दे के पीछे अहम भूमिका निभाता दिखा है। खासकर तब, जब अप्रैल के मध्य में संघर्ष विराम लागू हुआ था। इसके बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके। अमेरिका की ओर से कई बार चेतावनी दी गई कि अगर समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है।

आसिम मुनीर के साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी इस कोशिश का हिस्सा बने हुए हैं। नकवी पहले से ही तेहरान में मौजूद हैं और इस हफ्ते दो बार ईरानी नेतृत्व से मुलाकात कर चुके हैं। पाकिस्तान इसे सिर्फ पड़ोसी देश के साथ रिश्तों का मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता से जोड़कर देख रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान कतर की एक वार्ताकार टीम भी तेहरान पहुंच गई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह टीम अमेरिका के समन्वय में ईरान पहुंची है। मकसद युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने और बची हुई जटिलताओं को हल करना है।

कतर पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है। गाजा युद्ध के दौरान भी दोहा ने अहम बातचीत कराई थी। हालांकि ईरान संघर्ष में कतर ने अब तक दूरी बनाए रखी थी। इसकी वजह हालिया संघर्ष के दौरान कतर पर हुए ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले माने जाते हैं। इसके बावजूद अब दोहा का फिर सक्रिय होना संकेत देता है कि बातचीत किसी निर्णायक मोड़ की तरफ बढ़ रही है।

इस बीच सऊदी अरब भी हालात पर नजर बनाए हुए है। शुक्रवार शाम सऊदी गृह मंत्रालय ने जानकारी दी कि पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और सऊदी गृह मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सऊद बिन नायेफ के बीच फोन पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने सुरक्षा सहयोग और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

उधर अमेरिका की तरफ से भी बातचीत को लेकर उम्मीद की हल्की किरण दिखाई दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के साथ वार्ता में “थोड़ी प्रगति” हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि अभी किसी बड़े नतीजे का दावा करना जल्दबाजी होगी।

रुबियो का बयान ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने ईरान पर सैन्य हमला फिलहाल टाल दिया है क्योंकि “गंभीर बातचीत” चल रही है। ट्रंप लगातार यह संकेत देते रहे हैं कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अप्रैल में लागू युद्ध विराम टूट सकता है।

स्वीडन के हेल्सिंगबोर्ग में नाटो विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले रुबियो ने कहा कि बातचीत में कुछ हलचल जरूर दिखी है। लेकिन रास्ता अब भी आसान नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों में कई बार प्रगति के दावे सामने आए, मगर अंतिम समझौता अभी दूर ही रहा।

नाटो देशों की बैठक में एक और अहम मुद्दा भी चर्चा में है। युद्ध खत्म होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में सैन्य गठबंधन की भूमिका क्या होगी। यह समुद्री रास्ता दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां किसी भी अस्थिरता का असर सीधे तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

फिलहाल नजर तेहरान पर टिकी है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख की यात्रा, कतर की सक्रियता और अमेरिका के नरम संकेत यह बता रहे हैं कि बंद कमरों में बातचीत गंभीर स्तर पर चल रही है। हालांकि सवाल अब भी वही है। क्या यह कोशिश स्थायी शांति तक पहुंचेगी या फिर क्षेत्र एक बार फिर तनाव और टकराव की तरफ लौटेगा।

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