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3000 करोड़ हीरा ग्रुप घोटाले में नौहेरा शेख गिरफ्तार

हैदराबाद:

करीब 3000 करोड़ रुपये के कथित निवेश घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने हीरा ग्रुप की प्रमुख नौहेरा शेख को गिरफ्तार कर लिया है। एजेंसी का दावा है कि इस मामले में देशभर के 1.72 लाख से अधिक निवेशकों से करोड़ों रुपये जुटाए गए और उन्हें ऊंचे मुनाफे का लालच दिया गया।

ईडी के मुताबिक, नौहेरा शेख को 21 मई को गुरुग्राम से पकड़ा गया। इसके बाद उन्हें हैदराबाद लाया गया और विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह मामला लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर था और अब गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि हीरा ग्रुप ने निवेशकों को हर साल करीब 36 फीसदी तक रिटर्न देने का वादा किया था। इसी लालच में देश के अलग अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोगों ने पैसा लगाया। लेकिन बाद में न तो तय मुनाफा मिला और न ही मूल रकम वापस लौटाई गई।

ईडी का कहना है कि इस मामले में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू हुई थी। इन शिकायतों में नौहेरा शेख के अलावा मौली थॉमस, बिजू थॉमस और हीरा ग्रुप की कई कंपनियों के नाम शामिल हैं। आरोप है कि निवेशकों से जमा की गई रकम का गलत इस्तेमाल किया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी खातों में जमा निवेशकों के पैसे को कथित तौर पर निजी खातों में ट्रांसफर किया गया। इन पैसों से चल और अचल संपत्तियां खरीदी गईं। ईडी ने पहले ही इस मामले में कई संपत्तियों को धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के तहत अटैच किया हुआ है।

ईडी ने नौहेरा शेख पर जांच को प्रभावित करने और देरी कराने के आरोप भी लगाए हैं। एजेंसी का दावा है कि उन्होंने अदालतों में गलत दावे और हलफनामे दाखिल किए। यहां तक कि जांच और कानूनी प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश की गई।

इस मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब उच्चतम न्यायालय ने ईडी को अटैच की गई संपत्तियों की नीलामी की अनुमति दे दी। आम तौर पर ऐसे मामलों में मुकदमे के पूरा होने का इंतजार किया जाता है, लेकिन निवेशकों के हितों को देखते हुए अदालत ने पहले ही नीलामी का रास्ता साफ किया।

ईडी के अनुसार, अब तक कई संपत्तियों की नीलामी हो चुकी है और करीब 122 करोड़ रुपये की रकम वसूली गई है। यह राशि निवेशकों को लौटाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल की जा रही है। इस काम में सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस यानी एसएफआईओ की भी भूमिका बताई जा रही है।

जांच एजेंसी का यह भी कहना है कि नौहेरा शेख लगातार अदालत के आदेशों का पालन करने में असहयोग कर रही थीं। आरोप है कि उन्होंने नीलाम की गई संपत्तियों के बिक्री दस्तावेज पूरे करने में भी सहयोग नहीं किया। अदालत के निर्देश के बावजूद उन्होंने जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया।

लगातार गैर सहयोग के बाद विशेष पीएमएलए अदालत ने उनकी जमानत रद्द कर दी। इसके बाद 7 मई 2026 को उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। ईडी का कहना है कि वारंट जारी होने के बाद वह फरार हो गई थीं।

एजेंसी के मुताबिक, कई दिनों की तलाश के बाद नौहेरा शेख को गुरुग्राम स्थित एक एयरबीएनबी प्रॉपर्टी से पकड़ा गया। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि वह फर्जी पहचान के साथ वहां रह रही थीं। ईडी का दावा है कि उन्होंने कथित तौर पर “शेख कमर जहां” नाम से जाली आधार दस्तावेज का इस्तेमाल किया। उनके साथ समीर खान नाम का एक सहयोगी भी मौजूद था।

ईडी और हरियाणा पुलिस की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा में हैदराबाद लाया गया।

इस मामले में यह पहली गिरफ्तारी नहीं है। इससे पहले जनवरी में कल्याण बनर्जी नाम के एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया था। ईडी का आरोप है कि उसने खुद को वकील बताकर एजेंसी की नीलामी प्रक्रिया में दखल देने की कोशिश की थी।

हीरा ग्रुप का मामला लंबे समय से हजारों निवेशकों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। कई लोगों ने अपनी जमा पूंजी इस उम्मीद में लगाई थी कि उन्हें बेहतर मुनाफा मिलेगा। लेकिन अब बड़ी संख्या में निवेशक अपने पैसे की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

फिलहाल ईडी का कहना है कि मामले की जांच जारी है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि निवेशकों के पैसे का इस्तेमाल कहां और किस तरीके से किया गया। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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