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आधी रात को भारी पुलिस बल के साथ फरीदाबाद में बड़ी कार्रवाई, मस्जिद समेत 8 निर्माण जमींदोज

फरीदाबाद (हरियाणा)।

देश की राजधानी दिल्ली से सटे औद्योगिक क्षेत्र और हरियाणा के मैनचेस्टर कहे जाने वाले फरीदाबाद में शुक्रवार आधी रात को प्रशासन का बड़ा बुलडोजर चला। नगर निगम की टीम ने एनआईटी-3 (NIT-3) मस्जिद चौक पर एक बड़ा अभियान चलाया। इस कार्रवाई के तहत वर्षों पुरानी एक मस्जिद और एक अन्य धार्मिक स्थल सहित कुल 8 अवैध निर्माणों को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया।

प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया और तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

आधी रात को चला पीला पंजा, नजरबंद किए गए संदिग्ध लोग

नगर निगम एनआईटी जोन की टीम ने इस ध्वस्तीकरण अभियान को बेहद गोपनीय और सुरक्षात्मक तरीके से अंजाम दिया। सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई शुरू होने से पहले ही इलाके की बिजली काट दी गई और इंटरनेट सेवाओं को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया, ताकि सोशल मीडिया के जरिए किसी भी तरह की अफवाह न फैले।

इतना ही नहीं, सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय प्रशासन ने विरोध की आशंका को देखते हुए करीब आठ संदिग्ध लोगों को उनके घरों में ही नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया। वहीं, मस्जिद चौक पर विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने एक स्थानीय इमाम और उनके बेटे को भी हिरासत में ले लिया। भारी पुलिस फोर्स और लाव-लश्कर की मौजूदगी के कारण स्थानीय लोग चाहकर भी इस कार्रवाई का विरोध नहीं कर सके।

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद जागा नगर निगम प्रशासन

दैनिक हिंदी नवभारत टाइम्स में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, इस पूरे मामले की जड़ अदालत में लंबित एक याचिका है। स्थानीय निवासी सुनील कुमार ने हरियाणा हाई कोर्ट और देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में एक जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सरकारी जमीन और ग्रीन बेल्ट (Green Belt) पर अवैध रूप से धार्मिक स्थलों और अन्य निर्माणों को खड़ा किया गया है।

“सरकारी और ग्रीन बेल्ट की जमीन पर बने इन अवैध निर्माणों के कारण क्षेत्र में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी और लोगों का आना-जाना दूभर हो गया था।” – सुनील कुमार, याचिकाकर्ता

इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों की ढिलाई पर काफी समय पहले कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत के इसी कड़े रुख और आदेश के अनुपालन में फरीदाबाद नगर निगम ने शुक्रवार की रात इस बड़ी तोड़फोड़ की कार्रवाई को अंजाम दिया।

बिना नोटिस कार्रवाई का आरोप, अधिकारियों ने किया दावों का खंडन

इस ध्वस्तीकरण अभियान के बाद स्थानीय निवासियों और मुस्लिम समाज के लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। नेहरू कॉलोनी के निवासी हाजी इब्राहीम ने बताया कि मस्जिद चौक पर स्थित यह धार्मिक स्थल (मस्जिद) लगभग 50 वर्ष पुराना था और करीब 300 वर्ग गज के दायरे में फैला हुआ था। वहीं, एनआईटी-3 में ढहाया गया दूसरा धार्मिक स्थल भी करीब 20 साल पुराना था। इन दोनों ही स्थलों का निर्माण स्थानीय लोगों की आस्था, सहयोग और चंदे से किया गया था।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि:

  • प्रशासन की तरफ से तोड़फोड़ को लेकर कोई अग्रिम नोटिस नहीं दिया गया।
  • रात के अंधेरे में अचानक की गई इस कार्रवाई से उन्हें अपना सामान सुरक्षित बाहर निकालने का मौका तक नहीं मिला।
  • धार्मिक ग्रंथों और अन्य जरूरी सामानों को भी नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है।

दूसरी तरफ, नगर निगम के आला अधिकारियों ने जनता के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित अवैध निर्माणों और धार्मिक स्थलों के प्रबंधकों को कानूनन पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे। पर्याप्त समय देने के बाद ही कोर्ट के आदेश पर यह कदम उठाया गया है।

पहली बार मौके से तुरंत साफ कराया गया मलबा

आमतौर पर देखा जाता है कि तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद मलबे को हफ्तों तक उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी होती है। लेकिन इस बार नगर निगम ने रणनीति बदलते हुए मलबे को तुरंत मौके से हटाने का काम किया।

शनिवार सुबह होने से पहले ही दर्जनों डंपर और पोकलेन मशीनों की मदद से ढहाए गए निर्माणों का मलबा पूरी तरह साफ कर दिया गया। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह था कि सुबह होते ही कानून व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े और यातायात सुचारू रूप से चलता रहे। फिलहाल पूरे एनआईटी-3 इलाके में पुलिस बल तैनात है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है।

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