वीरता के पांच मुस्लिम चेहरे, जिन्होंने भारत का मान बढ़ाया
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नई दिल्ली
देश की सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं होती। इसके पीछे उन जवानों का साहस, समर्पण और बलिदान होता है जो हर परिस्थिति में राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हैं। जब सीमा पर गोलियां चल रही हों, आतंकियों से मुठभेड़ हो रही हो या जान का खतरा सामने खड़ा हो, तब भी ये वीर जवान पीछे नहीं हटते। यही कारण है कि उनके साहस की कहानियां पीढ़ियों तक याद रखी जाती हैं।
हाल ही में राष्ट्रपति भवन में आयोजित अलंकरण समारोह में पांच ऐसे मुस्लिम जवानों और अधिकारियों को वीर चक्र और शौर्य चक्र जैसे प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान प्रदान किए गए, जिन्होंने अपनी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा से देश को गौरवान्वित किया। इनमें सीमा सुरक्षा बल के शहीद सब इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज, भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक, सीआरपीएफ कांस्टेबल सद्दाम हुसैन, असम राइफल्स के अधिकारी मोहम्मद शफीक और सीआरपीएफ जवान फिदा हुसैन डार शामिल हैं।
इन पांचों की कहानियां केवल वीरता की मिसाल नहीं हैं। ये उस भारत की तस्वीर भी पेश करती हैं जहां देशभक्ति सबसे बड़ी पहचान होती है।
शहीद मोहम्मद इम्तियाज को मरणोपरांत वीर चक्र
सीमा सुरक्षा बल के सब इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने जम्मू कश्मीर के आरएस पुरा सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से की जा रही भारी गोलीबारी के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया।
10 मई 2025 का दिन बेहद तनावपूर्ण था। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगातार गोलाबारी हो रही थी। हालात किसी भी समय और गंभीर हो सकते थे। ऐसी स्थिति में मोहम्मद इम्तियाज ने पीछे हटने के बजाय अपनी टीम की कमान संभाली और अग्रिम मोर्चे पर डटे रहे।
साथी जवानों के अनुसार वे लगातार जवानों का हौसला बढ़ा रहे थे और दुश्मन की गतिविधियों का जवाब दे रहे थे। इसी दौरान वे वीरगति को प्राप्त हो गए। उनकी शहादत ने पूरे देश को भावुक कर दिया।
बिहार के सारण जिले के नारायणपुर गांव में जब उनका पार्थिव शरीर पहुंचा तो हजारों लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके पीछे पत्नी, दो बेटे और दो बेटियां हैं। लेकिन देश उन्हें एक ऐसे वीर सपूत के रूप में याद रखेगा जिसने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
LIVE: President Droupadi Murmu presents Gallantry Awards in Defence Investiture Ceremony – 2026 (Phase-1) https://t.co/GndtrI8rXl
— President of India (@rashtrapatibhvn) June 8, 2026
ऑपरेशन सिंदूर के हीरो बने रिजवान मलिक
भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक को वीर चक्र से सम्मानित किया गया है। मणिपुर से आने वाले रिजवान मलिक ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान असाधारण साहस और पेशेवर कौशल का प्रदर्शन किया।
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई थी। इस हमले में कई निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई शुरू की।
इस अभियान में वायुसेना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी। रिजवान मलिक उन पायलटों में शामिल थे जिन्हें अत्यंत जोखिम भरे मिशनों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। दुश्मन की निगरानी, हवाई खतरे और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में केवल बहादुरी पर्याप्त नहीं होती। तकनीकी दक्षता, त्वरित निर्णय क्षमता और मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी होती है। रिजवान मलिक ने इन सभी गुणों का शानदार प्रदर्शन किया। उनका सम्मान देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
सद्दाम हुसैन की सटीक कार्रवाई से विफल हुई आतंकी साजिश
सीआरपीएफ के कांस्टेबल सद्दाम हुसैन को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने जम्मू कश्मीर के बांदीपोरा जिले में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान असाधारण साहस दिखाया।
पांच नवंबर 2024 को संयुक्त सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर अचानक हमला कर दिया। गोलियों की बौछार शुरू हो गई और हालात बेहद खतरनाक हो गए।
सद्दाम हुसैन ने बिना घबराए मोर्चा संभाला। उन्होंने आगे बढ़कर आतंकियों की स्थिति का आकलन किया और करीब 25 मीटर की दूरी से अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर का इस्तेमाल किया।
उनका निशाना इतना सटीक था कि एक आतंकी मौके पर ही ढेर हो गया। उनकी इस कार्रवाई ने आतंकियों की पूरी योजना को ध्वस्त कर दिया। साथ ही कई सुरक्षाकर्मियों की जान भी बच गई।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इतनी नजदीकी दूरी से इस तरह की कार्रवाई करना बेहद जोखिम भरा होता है। लेकिन सद्दाम हुसैन ने साहस और कौशल दोनों का अद्भुत परिचय दिया।
President Droupadi Murmu presents Vir Chakra to Squadron Leader Rizwan Malik, Flying (Pilot), for his act of exceptional gallantry and courage. Flying as Deputy Mission Leader of an unescorted strike package, he undertook a mission to neutralise predesignated targets. Despite… pic.twitter.com/tyywlNlvTM
— President of India (@rashtrapatibhvn) June 8, 2026
मोहम्मद शफीक ने दिखाई नेतृत्व और बहादुरी
असम राइफल्स के अधिकारी मोहम्मद शफीक को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। वर्तमान में वे डिप्टी कमांडेंट के पद पर कार्यरत हैं।
पांच नवंबर 2024 को एक महत्वपूर्ण आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान वे अपनी टीम का नेतृत्व कर रहे थे। ऑपरेशन के दौरान एक आतंकी अंधेरे का फायदा उठाकर सुरक्षा घेरे से भागने की कोशिश करने लगा।
स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी। लेकिन मोहम्मद शफीक ने तुरंत निर्णय लिया और आतंकवादी का पीछा शुरू कर दिया। लगातार फायरिंग के बीच उन्होंने साहसपूर्वक आगे बढ़ते हुए आतंकी को मार गिराया।
उनकी इस कार्रवाई से पूरा अभियान सफल हुआ। बाद में बड़ी मात्रा में हथियार और गोला बारूद भी बरामद किया गया।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अभियान की सफलता में नेतृत्व की बड़ी भूमिका होती है। मोहम्मद शफीक ने अपने साहस और नेतृत्व क्षमता से इसे साबित कर दिखाया।
घायल होने के बाद भी नहीं रुके फिदा हुसैन डार
सीआरपीएफ के जवान फिदा हुसैन डार को भी शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। जम्मू कश्मीर के श्रीनगर से संबंध रखने वाले फिदा हुसैन डार ने ऐसी बहादुरी दिखाई जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
दो नवंबर 2024 को सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली कि एक विदेशी आतंकी श्रीनगर के खानयार इलाके में छिपा हुआ है। इसके बाद सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया।
ऑपरेशन के दौरान जैसे ही फिदा हुसैन डार और उनके साथी आगे बढ़े, आतंकी ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी और ग्रेनेड भी फेंके। इस हमले में दोनों जवान घायल हो गए।
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद फिदा हुसैन डार ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने आगे बढ़ना जारी रखा। दर्द और खून बहने के बावजूद उन्होंने ऑपरेशन नहीं छोड़ा।
आखिरकार वे इमारत के अंदर पहुंचे और आतंकी को मार गिराया। उनकी इस बहादुरी ने न केवल ऑपरेशन को सफल बनाया बल्कि आसपास रहने वाले कई नागरिकों की जान भी सुरक्षित की।
President Droupadi Murmu presents Shaurya Chakra to Assistant Commandant (Now Deputy Commandant) Mohd Shafiq, 26 Assam Rifles, for displaying bravery of the highest order and exceptional tactical acumen during an encounter with terrorists in November 2024. He eliminated the… pic.twitter.com/8UACsFyTJM
— President of India (@rashtrapatibhvn) June 8, 2026
देशभक्ति की मिसाल बने पांचों वीर
मोहम्मद इम्तियाज, रिजवान मलिक, सद्दाम हुसैन, मोहम्मद शफीक और फिदा हुसैन डार की कहानियां बताती हैं कि देश की रक्षा करने वाले जवानों की पहचान उनका धर्म, भाषा या क्षेत्र नहीं होता। उनकी असली पहचान उनका साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण होता है।
इन पांचों वीरों ने साबित किया कि जब राष्ट्र की सुरक्षा का प्रश्न सामने हो तो बहादुरी ही सबसे बड़ा परिचय बन जाती है। वीर चक्र और शौर्य चक्र जैसे सम्मान केवल पदक नहीं हैं। ये उन त्याग, संघर्ष और साहस की पहचान हैं जिनकी बदौलत देश सुरक्षित रहता है।
आज पूरा देश इन पांचों वीर सपूतों को सलाम कर रहा है। उनकी कहानियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और भारतीय सुरक्षा बलों के गौरवशाली इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेंगी।

