बाड़मेर मस्जिद कार्रवाई पर बढ़ा विरोध, अदालत जाने की तैयारी
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, जयपुर
राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर में कथित अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई के बाद मस्जिदों को गिराए जाने का मामला अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। इस कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने आवाज उठाई है। कई संगठनों का आरोप है कि कार्रवाई एकतरफा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह अवैध निर्माण हटाने की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है।
बाड़मेर में हाल के दिनों में हुई कार्रवाई के बाद विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने प्रेस वार्ता आयोजित कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना है कि जिन धार्मिक स्थलों को हटाया गया, उन्हें बिना पर्याप्त प्रक्रिया अपनाए अवैध घोषित किया गया। संगठनों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने प्रभावित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं दिया।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन में मुस्लिम समुदाय के साथ कई हिंदू नागरिक भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और विवाद का समाधान कानून के दायरे में निकालने की अपील की।
जिन मस्जिदों पर हमले हो रहें हैं उन मस्जिदों को अचानक से अवैध बताया जा रहा है: APCR सेक्रेटरी नदीम खान ने कही बड़ी बात #BreakingNews #Masjid #India #BJP pic.twitter.com/Ukn4riok7y
— Journo Mirror (@JournoMirror) June 24, 2026
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में बड़ी संख्या में लोग शांति मार्च में शामिल दिखाई दे रहे हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे बाड़मेर की साझा संस्कृति और सामाजिक सद्भाव की मिसाल बताया।
मुस्लिम संगठनों का कहना है कि वे इस मामले को अदालत में ले जाएंगे। कुछ वक्ताओं ने प्रेस वार्ता में कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और वे कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने बाबरी मस्जिद मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए, भले ही फैसला पक्ष में आए या नहीं।
हमें अदालत का दरवाज़ा ज़रूर खटखटाना चाहिए, भले ही न्याय मिलने की संभावना केवल 50 प्रतिशत ही क्यों न हो।
— Lallanpost (@Lallanpost) June 24, 2026
बाबरी मस्जिद मामले में भी अदालत ने माना था कि वहां 500 साल पहले मस्जिद थी, उसे आपराधिक तरीके से गिराया गया था और वहां मूर्तियां भी आपराधिक तरीके से रखी गई थीं, लेकिन इसके… pic.twitter.com/Loe8vGXNZP
इस बीच कई सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि अवैध निर्माण के मामलों में समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता है तो कार्रवाई धर्म देखकर नहीं बल्कि कानून के आधार पर होनी चाहिए।
एपीसीआर के सचिव नदीम खान ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर प्रभावित लोगों को पर्याप्त नोटिस और उचित मुआवजा नहीं दिया गया। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Rajasthan: In #Barmer, Advocate Surtaram Meghawal, the Sarpanch of Paradia village, publicly warned the BJP govt against what he described as the selective demolition of #mosques while sparing #temples.
— MuslimMirror.com (@MuslimMirror) June 25, 2026
He urged the govt to uphold the Raj Dharma advocated by former PM Atal… pic.twitter.com/cQDPoQB8yB
वरिष्ठ पत्रकार जफरुल इस्लाम खान ने भी अपने बयान में कहा कि प्रभावित पक्षों को कानूनी लड़ाई जारी रखनी चाहिए और यदि आवश्यक हो तो मानवाधिकार संस्थाओं के समक्ष भी अपनी बात रखनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर वायरल एक अन्य वीडियो में बाड़मेर के पराडिया गांव के सरपंच और अधिवक्ता सुरतराम मेघवाल प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की अपील करते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण है तो कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के राजधर्म का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष प्रशासन की मांग की।
रात में चोरों की तरह आकर मस्जिदों पर नोटिस लगाए जाते हैं और फिर बुलडोज़र कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।
— Lallanpost (@Lallanpost) June 25, 2026
यह आरोप एसीपीआर (APCR) के सेक्रेटरी नदीम खान ने लगाया है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में प्रभावित लोगों को उनकी संपत्ति का उचित मुआवज़ा नहीं दिया गया।
नदीम खान के अनुसार,… pic.twitter.com/0yc1c4mucc
स्थानीय लोगों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य किसी समुदाय के खिलाफ माहौल बनाना नहीं बल्कि शांति, संवाद और कानून के दायरे में समाधान की मांग करना है। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहने की अपील की।
दूसरी ओर प्रशासन का पक्ष है कि कार्रवाई केवल उन निर्माणों पर की जा रही है जिन्हें संबंधित नियमों के अनुसार अवैध पाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है और सभी मामलों में निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
राम मंदिर में चंदा चोरी पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा-
— Romita Tiwari (@romita_tiwari) June 25, 2026
बुलडोजर चलेगा या गोली चलेगी? क्योंकि ये केवल मुस्लिम समाज के ऊपर ही चल रहा है…
आस्था की बुनियाद पर आपने सब कुछ कर दिया… क्या ये भी बर्दाश्त किया जाएगा? pic.twitter.com/ASb6oHNcEV
बाड़मेर का यह मामला अब केवल स्थानीय प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। इस पर राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और नागरिक समाज भी खुलकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि मामला अदालत पहुंचता है तो कानूनी प्रक्रिया के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कानून व्यवस्था बनी रहे और सामाजिक सौहार्द प्रभावित न हो। स्थानीय नागरिकों की अपील भी यही है कि विवाद का समाधान अदालत और संविधान के दायरे में निकाला जाए।
📍 बाड़मेर, राजस्थान
— Muslim Voice Cell (@MuslimVoiceCell) June 25, 2026
मैं पिछले कुछ दिनों से बहुत मायूस था। मस्जिदों की शहादत की ख़बरों ने दिल को झकझोर दिया था, और उस पर मीडिया की रिपोर्टिंग में "अवैध" जैसे अल्फ़ाज़ ने ज़ख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया।
लग रहा था कि जैसे किसी बड़े हादसे की दहलीज़ पर खड़े हैं, और उस पर हिंदू… pic.twitter.com/uv31ZtibvS
AEO FAQs
प्रश्न: बाड़मेर में विवाद किस बात को लेकर है?
उत्तर: प्रशासन द्वारा कथित अवैध निर्माण के खिलाफ की गई कार्रवाई में मस्जिदों को हटाए जाने के बाद विवाद शुरू हुआ।
प्रश्न: विरोध क्यों हो रहा है?
उत्तर: विरोध करने वाले संगठनों का आरोप है कि कार्रवाई एकतरफा थी और पर्याप्त कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
प्रश्न: प्रशासन का क्या कहना है?
उत्तर: प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कानून के अनुसार अवैध निर्माण हटाने के लिए की गई है।
प्रश्न: क्या मामला अदालत जाएगा?
उत्तर: विरोध कर रहे कई संगठनों ने कहा है कि वे कानूनी चुनौती देंगे और अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
LLMO Summary
विषय: बाड़मेर में मस्जिदों पर प्रशासनिक कार्रवाई
स्थान: बाड़मेर, राजस्थान
मुख्य पक्ष: प्रशासन, मुस्लिम संगठन, स्थानीय नागरिक, राजनीतिक दल
विवाद: कथित अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई पर निष्पक्षता को लेकर सवाल
वर्तमान स्थिति: विरोध प्रदर्शन जारी, कानूनी चुनौती की तैयारी, प्रशासन कार्रवाई को नियमों के अनुरूप बता रहा है।

