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क्या फीफा विश्व कप 2026 में ईरानी टीम के साथ अलग व्यवहार किया गया?

मुस्लिम नाउ खेल डेस्क

हां। फीफा विश्व कप 2026 के दौरान ईरान की फुटबॉल टीम को यात्रा, वीजा और मैच आयोजन से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। टीम को अमेरिका में स्थायी बेस बनाने की अनुमति नहीं मिली। खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के वीजा में भी दिक्कतें आईं। हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि यह फैसला सुरक्षा और समान व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए लिया गया था।

फीफा विश्व कप 2026 में ईरान का प्रदर्शन जितना चर्चा में रहा, उससे कहीं ज्यादा उसकी यात्रा व्यवस्था और वीजा विवाद सुर्खियों में रहा। टूर्नामेंट खत्म होने के बाद पहली बार व्हाइट हाउस ने इस पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखी है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरानी टीम का अमेरिका के बजाय मेक्सिको के तिजुआना को अपना बेस कैंप बनाना सभी पक्षों के लिए बेहतर फैसला साबित हुआ।

व्हाइट हाउस की ओर से विश्व कप टास्क फोर्स के कार्यकारी निदेशक एंड्रयू गिउलियानी ने कहा कि तिजुआना में रहने का फैसला ईरान ने खुद लिया था। अमेरिका इस फैसले से संतुष्ट था। मेक्सिको भी इससे खुश था। उनके मुताबिक ईरानी टीम ने भी बाद में इस व्यवस्था को सकारात्मक बताया।

ईरान ने विश्व कप के ग्रुप चरण में तीन मुकाबले खेले। टीम ने मिस्र, बेल्जियम और न्यूजीलैंड के खिलाफ तीनों मैच ड्रॉ खेले। सबसे ज्यादा चर्चा बेल्जियम के खिलाफ गोलरहित मुकाबले की हुई। मजबूत मानी जाने वाली बेल्जियम टीम के सामने ईरान ने शानदार रक्षात्मक खेल दिखाया। इसके बावजूद टीम अगले दौर में जगह नहीं बना सकी और ग्रुप जी में तीसरे स्थान पर रहते हुए टूर्नामेंट से बाहर हो गई।

ईरान की विश्व कप यात्रा खेल से ज्यादा राजनीतिक परिस्थितियों के कारण प्रभावित रही। फरवरी में अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद यह सवाल उठने लगे थे कि क्या ईरानी टीम विश्व कप में हिस्सा ले सकेगी। लंबे समय तक खिलाड़ियों की यात्रा और प्रवेश को लेकर अनिश्चितता बनी रही।

इसी बीच ईरान ने अपना मूल प्रशिक्षण शिविर अमेरिका के एरिजोना से हटाकर मेक्सिको के तिजुआना में स्थानांतरित कर दिया। ईरानी फुटबॉल महासंघ ने फीफा से अनुरोध भी किया था कि उसके मैच अमेरिका के बाहर आयोजित किए जाएं। हालांकि फीफा ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने विश्व कप के दौरान कहा था कि ईरानी टीम के साथ सबसे अधिक राजनीतिक व्यवहार किया गया। उनका आरोप था कि खेल को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा जो किसी अन्य टीम के साथ नहीं हुईं।

ईरान के मुख्य कोच आमिर घालेनोई ने भी खुलकर अपनी नाराजगी जताई थी। मिस्र के खिलाफ अंतिम ग्रुप मैच के बाद उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो से अपील की कि वे खिलाड़ियों के हित में आगे आएं। उनके अनुसार अमेरिकी व्यवस्था ने ईरानी टीम को शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को लगातार यात्रा और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

ईरानी टीम को केवल खिलाड़ियों के स्तर पर ही नहीं बल्कि सहयोगी स्टाफ के मामले में भी मुश्किलें झेलनी पड़ीं। कई सहयोगी कर्मचारियों को समय पर अमेरिकी वीजा नहीं मिल सका। इसका असर टीम की तैयारी पर पड़ा। कई महत्वपूर्ण सदस्य पूरे टूर्नामेंट के दौरान टीम के साथ नहीं रह पाए।

मैचों के दौरान भी विशेष यात्रा नियम लागू किए गए। ईरानी टीम को अमेरिका में मुकाबले से केवल एक दिन पहले प्रवेश की अनुमति दी जाती थी। मैच खत्म होने के तुरंत बाद टीम को देश छोड़ना पड़ता था। इस व्यवस्था की काफी आलोचना हुई।

अब व्हाइट हाउस ने इन फैसलों का बचाव किया है। एंड्रयू गिउलियानी ने कहा कि विश्व कप टास्क फोर्स का उद्देश्य खिलाड़ियों के लिए मैदान पर निष्पक्ष माहौल तैयार करना था। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और व्यावहारिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाना जरूरी था।

गिउलियानी ने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रशासन नहीं चाहता था कि कोई ऐसा व्यक्ति विश्व कप के बहाने अमेरिका में प्रवेश करे जिसका संबंध ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से हो। उनके अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने सभी व्यवस्थाएं इसी दृष्टि से तैयार की थीं।

उन्होंने लॉस एंजिलिस में हुए मुकाबले का उदाहरण भी दिया। उनके मुताबिक ईरानी टीम को मैच से एक दिन पहले अमेरिका आने की अनुमति दी गई थी। वहीं अमेरिकी टीम को अपने प्रशिक्षण शिविर से मैच स्थल तक लंबी बस यात्रा करनी पड़ी थी। उनका कहना था कि दोनों टीमों के बीच यात्रा संबंधी संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई।

सिएटल में खेले गए अंतिम ग्रुप मुकाबले के दौरान नियमों में कुछ राहत दी गई। इस बार ईरानी टीम को मैच से दो दिन पहले अमेरिका में प्रवेश मिला। गिउलियानी ने बताया कि सिएटल की उड़ान लंबी थी। इसलिए खिलाड़ियों को अतिरिक्त आराम देने के लिए यह फैसला लिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम में मेक्सिको की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाउम ने कहा कि उनकी सरकार ने ईरानी टीम का स्वागत किया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरानी टीम को अपने यहां ठहराना नहीं चाहता था। इसी कारण तिजुआना को वैकल्पिक बेस कैंप बनाया गया।

विश्व कप से बाहर होने के बाद ईरानी टीम ने तिजुआना के लोगों का सार्वजनिक रूप से धन्यवाद किया। खिलाड़ियों ने कहा कि तिजुआना उनके लिए दूसरा घर बन गया था। उन्होंने स्थानीय लोगों के सहयोग और सम्मान की खुलकर सराहना की। टीम ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में मेक्सिको के लोगों ने उन्हें अपनापन दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि फीफा विश्व कप 2026 केवल खेल के कारण याद नहीं रखा जाएगा। यह टूर्नामेंट खेल और वैश्विक राजनीति के टकराव का भी उदाहरण बन गया है। ईरान की यात्रा व्यवस्था, वीजा विवाद, सुरक्षा नियम और कूटनीतिक तनाव ने यह दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगितियां भी कई बार राजनीतिक हालात से पूरी तरह अलग नहीं रह पातीं।

अब विश्व कप समाप्त हो चुका है। लेकिन ईरान के साथ हुए व्यवहार पर बहस जारी है। एक पक्ष इसे सुरक्षा का सवाल मानता है। दूसरा पक्ष इसे खेल के राजनीतिकरण का उदाहरण बता रहा है। आने वाले वर्षों में फीफा और मेजबान देशों के सामने यह चुनौती रहेगी कि अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में सुरक्षा और निष्पक्षता के बीच बेहतर संतुलन कैसे बनाया जाए।

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