मध्य पूर्व में महायुद्ध: अमेरिका और ईरान के बीच नौवें दिन भी भीषण बमबारी
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रियाद।
मध्य पूर्व में जारी तनाव एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष सोमवार को नौवें दिन में प्रवेश कर चुका है। दोनों देशों ने एक दूसरे के ठिकानों पर ताजा और बेहद विनाशकारी हमले किए हैं। वाशिंगटन ने पुष्टि की है कि उसने ईरान के भीतर सैन्य ठिकानों पर हवाई हमलों की एक नई लहर शुरू की है। वहीं दूसरी तरफ तेहरान ने दावा किया है कि उसने सीरिया और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाया है। इस भीषण गोलाबारी के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रम्प का बड़ा बयान: ईरान पर किया अब तक का सबसे भीषण हमला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बात करते हुए इस ताजा सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है। ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका ने रविवार रात ईरान पर एक बार फिर बहुत जोरदार हमला किया है। उन्होंने इस कार्रवाई को उन अमेरिकी सैनिकों के सम्मान में उठाया गया कदम बताया जो हालिया संघर्ष में मारे गए हैं। 28 फरवरी से इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों के बाद से अब तक 17 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने दोहराया कि वे अपने सैनिकों की शहादत का बदला लेने और अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
सीरिया के अल तन्फ और जॉर्डन के अकाबा में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का पलटवार
ईरान की शक्तिशाली सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने एक बयान जारी कर अमेरिका को करारा जवाब देने का दावा किया है। आईआरजीसी के मुताबिक उन्होंने सीरिया के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अल तन्फ क्षेत्र में स्थित अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड सेंटर पर एक अचानक और बड़ा हमला किया है। ईरानी सेना ने इस हमले को दक्षिण-पूर्वी ईरान के ईरानशहर में अमेरिकी हमलों में मारे गए अपने सैनिकों की मौत का बदला बताया है। अल तन्फ सैन्य अड्डा सीरिया, इराक और जॉर्डन की सीमाओं के करीब एक बेहद संवेदनशील इलाके में स्थित है। यहां अमेरिकी सेना अपने सहयोगी समूहों के साथ मिलकर आईएसआईएस के खिलाफ अभियानों का संचालन करती रही है।
इसके साथ ही आईआरजीसी ने जॉर्डन के अकाबा हवाई अड्डे पर तैनात अमेरिकी सैन्य विमानों को भी निशाना बनाने का दावा किया है। ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि उन्होंने अमेरिकी भारी परिवहन और कमांड एंड कंट्रोल विमानों पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। इस हमले में कई अमेरिकी विमानों को गंभीर नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। हालांकि जॉर्डन की सेना ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई ईरानी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। जॉर्डन के मुताबिक इस हमले में किसी भी तरह का कोई जानी-नुकसान या संपत्ति की क्षति नहीं हुई है।
बहरीन और कुवैत में बजे हवाई हमले के सायरन: तेल की कीमतों में भारी उछाल
इस भीषण सैन्य टकराव का असर पूरे खाड़ी क्षेत्र के देशों पर साफ दिखने लगा है। सोमवार तड़के बहरीन में हवाई हमले के सायरन गूंज उठे जिससे स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है, जिसके कारण यह इलाका ईरान के निशाने पर बना हुआ है। बहरीन के आंतरिक मंत्रालय ने नागरिकों और निवासियों से शांत रहने और तुरंत अपने नजदीकी सुरक्षित स्थानों या बंकरों में जाने की अपील की है। मनामा में मौजूद अमेरिकी दूतावास ने भी एक सुरक्षा चेतावनी जारी की है। दूतावास के पास ऐसी खुफिया जानकारी है कि ईरान मनामा के मध्य इलाकों को निशाना बना सकता है।
बहरीन, जॉर्डन और कुवैत जैसे देशों को इस महीने संघर्ष शुरू होने के बाद से लगातार अपनी हवाई रक्षा प्रणालियों को सक्रिय रखना पड़ रहा है। कुवैत सरकार ने रविवार को बताया कि उसके एक प्रमुख बिजली और पानी डिसेलिनेशन प्लांट पर दो दिनों में दूसरी बार हमला किया गया है, जिससे वहां भीषण आग लग गई। कुवैत अपनी पीने के पानी की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं डिसेलिनेशन प्लांटों से पूरा करता है।
इस युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हड़कंप मच गया है। कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसी बीच ब्रिटिश सेना ने रिपोर्ट दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिण में एक वाणिज्यिक जहाज में भीषण आग लग गई है। यह जलमार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता माना जाता है।
अमेरिकी सेना की लगातार नौवीं रात बमबारी: परमाणु साइट को बनाया निशाना
अमेरिकी सैन्य कमान सेंटकॉम ने पुष्टि की है कि उसके लड़ाकू विमानों और नौसेना ने ईरान के खिलाफ लगातार नौवीं रात भी हमलों का सिलसिला जारी रखा। यह हवाई हमले रविवार शाम 7 बजे ईस्टर्न टाइम पर शुरू हुए थे। सेंटकॉम के मुताबिक इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य उन ईरानी सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह नष्ट करना है, जिनका उपयोग होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक नाविकों पर हमलों के लिए किया जा रहा है। अमेरिकी हमलों में ईरानी सेना के कमांड सेंटर, वायु रक्षा प्रणाली, तटीय निगरानी ठिकाने, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च पैड तथा उनके संचार नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
दूसरी तरफ ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने सरकारी टेलीविजन के माध्यम से दावा किया है कि अमेरिकी हवाई हमलों ने देश के दक्षिण-पश्चिम में बन रहे एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण स्थल को भी निशाना बनाया है। प्लैनेट लैब्स पीबीसी से प्राप्त सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि डार्कहोविन परमाणु संयंत्र स्थल पर अभी शुरुआती काम ही चल रहा था। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने भी पुष्टि की है कि इस निर्माण स्थल पर वर्तमान में कोई भी परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी, इसलिए किसी रेडियोधर्मी रिसाव का खतरा नहीं है।
इजराइल की युद्ध में दोबारा उतरने की चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम पर इजराइल भी पैनी नजर बनाए हुए है। इजरायली सेना ने रविवार को चेतावनी दी थी कि जॉर्डन की तरफ दागी गई ईरानी मिसाइलों के मलबे से इजरायली क्षेत्र में भी आग लग सकती है। इसके बाद जॉर्डन सरकार ने कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए ईरान के प्रभारी राजदूत को तलब किया है। दक्षिणी इजरायली शहर इलात के बाहरी इलाके से दो इंटरसेप्टर मिसाइलें भी दागी गईं ताकि आकाश में नष्ट की गई मिसाइलों का मलबा शहर पर न गिरे। इजराइल के सैन्य प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इयाल ज़मीर ने रविवार को साफ कर दिया कि उनकी सेना किसी भी वक्त ईरान के खिलाफ दोबारा सीधे युद्ध के मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है।

