जंतर मंतर प्रदर्शन के बाद छात्र कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट जज की टिप्पणी
Table of Contents
मुस्लिम नाउ ब्यूरो/नई दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी
राजधानी दिल्ली स्थित जंतर मंतर पर सीजेपी (सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस) आंदोलन समाप्त हुए अभी कुछ ही घंटे बीते हैं। इसके तुरंत बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से कई सवाल खड़े करने वाली खबरें सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर दिल्ली समेत भारतीय जनता पार्टी और एनडीए शासित विभिन्न राज्यों से जुड़ी सूचनाएं वायरल हो रही हैं। इन पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों को लेकर पुलिस और प्रशासन ने व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है। बिहार, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मुस्लिम युवाओं को हिरासत में लेने तथा उनसे पूछताछ किए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।हालांकि,मुस्लिम नाउ भी इन सोशल मीडिया दावों की पुष्टि नहीं करता।
आंदोलन के दौरान मैदान में मदद करने वाले लोगों पर भी शिकंजा कसने के आरोप लग रहे हैं। जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था देखने वाले मोहम्मद जुनैद और उनके परिजनों को कथित तौर पर पुलिस प्रताड़ना झेलनी पड़ी है। इस तरह के समाचार सोशल मीडिया मंचों पर तेजी से साझा किए जा रहे हैं।
'वैध गतिविधियों को भी अपराध बना दिया जाता है, विरोध करने पर स्टूडेंट जेल भेज दिए जाते हैं': सुप्रीम कोर्ट के जज की टिप्पणी की चर्चा https://t.co/p9QlrA7u9o
— BBC News Hindi (@BBCHindi) July 26, 2026
इसी बीच देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ जज की टिप्पणी की चर्चा भी जोर पकड़ रही है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित एक व्याख्यान के दौरान जज ने लोकतांत्रिक विरोध और नागरिकों के अधिकारों पर बेहद स्पष्ट विचार रखे हैं। उन्होंने कहा कि देश में वैध और शांतिपूर्ण गतिविधियों को भी अपराध का रूप दिया जा रहा है। कैंपस में अपने अधिकारों की मांग करने वाले छात्रों को जेल भेजा जा रहा है। हालांकि मुस्लिम नाउ डिजिटल मीडिया ब्यूरो सोशल मीडिया पर तैर रहे इन सभी व्यक्तिगत दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
जंतर मंतर के लंगर प्रभारी जुनैद को हिरासत में लेने का दावा
सोशल मीडिया मंच एक्स पर पत्रकार सचिन गुप्ता और सौरव शुक्ला ने एक हैरान करने वाली घटना की जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि जंतर मंतर पर छात्रों के लिए लंगर की जिम्मेदारी संभालने वाले कार्यकर्ता मोहम्मद जुनैद को दिल्ली पुलिस ने 24 जुलाई की देर रात उठा लिया।
जंतर मंतर पर छात्रों को खाना बांटने वाले जुनैद को 24 जुलाई की रात दिल्ली पुलिस उठाकर उत्तराखंड ले गई। पूरी रात आंखों पर पट्टी बांधकर रखा। अगली सुबह एक अधिकारी ने जुनैद से पूछा कि फंडिंग कहां से आती है? इतना खाना कैसे बांट रहे हो? पूछताछ करके वे जुनैद को मसूरी (उत्तराखंड) में… https://t.co/2XHJluxkhx pic.twitter.com/rwUufJl6ye
— Sachin Gupta (@Sachingupta) July 26, 2026
दावे के अनुसार पुलिस टीम जुनैद को गाड़ी में बैठाकर उत्तराखंड की ओर ले गई। इस पूरी यात्रा के दौरान उनकी आंखों पर पट्टी बंधी रही। अगले दिन सुबह एक वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे पूछताछ शुरू की। पुलिस अधिकारियों ने जुनैद से पूछा कि आंदोलन के दौरान भोजन बांटने के लिए फंडिंग कहां से मिल रही थी। इतना खाना अकेले कैसे बांटा जा रहा था। पूछताछ पूरी होने के बाद पुलिस टीम उन्हें मसूरी की सड़कों पर छोड़कर वापस लौट गई। इसके बाद जुनैद किसी तरह कैब का इंतजाम करके 25 जुलाई को दिल्ली वापस पहुंचे।
TRUE LEADERSHIP
— gulvinder (@rebelliousdogra) July 26, 2026
"BJP is backtracking on its promise of no action, no FIRs on protestors, students have been arrested in Bihar, West Bengal and other NDA ruled states. Students are being harrased. Muslims students are being specifically targeted. I will be in Patna tomorrow."-… pic.twitter.com/QAcu677yBf
स्वतंत्र डिजिटल न्यूज चैनल द रेड माइक ने भी जुनैद का एक विशेष साक्षात्कार प्रसारित किया है। इस साक्षात्कार में जुनैद ने खुद अपने साथ हुई घटना का ब्योरा दिया है। उन्होंने बताया कि किस तरह उन्हें हिरासत में रखकर डराया और धमकाया गया। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रो. मुकेश कुमार ने लिखा कि आंदोलनकारी छात्रों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने मददगारों के लिए आवाज उठाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ की पुलिस जुनैद ही नहीं बल्कि उनके रिश्तेदारों और परिवार के लोगों को भी प्रताड़ित कर रही है।
Very Important Interview with Volunteer Junaid
— Saurabh shukla (@Saurabh_Unmute) July 26, 2026
Who was the incharge of the Langar at Jantar Mantar https://t.co/s67ReI01Gj
असम में व्हाट्सएप ग्रुप बनाने पर तीन युवा गिरफ्तार
असम के लखीमपुर जिले से भी पुलिस कार्रवाई की एक बड़ी खबर सामने आई है। पत्रकार अशरफ हुसैन द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक लखीमपुर पुलिस ने तीन मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए युवाओं के नाम अशराफुल इस्लाम, मंजूर रहमान और अब्दुल कासेम बताए गए हैं।
CJP प्रोटेस्ट के समर्थन में व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाने के आरोप में तीन मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया, मामला असम के लखीमपुर का है। गिरफ्तार युवकों के नाम असराफ़ुल इस्लाम, मंज़ूर रहमान और अब्दुल कासेम हैं। इन मुस्लिम युवकों पर आरोप है कि वे छात्रों के आंदोलन के समर्थन में एक… pic.twitter.com/bFPXlghLMN
— Ashraf Hussain (@AshrafFem) July 26, 2026
इन युवाओं पर आरोप है कि उन्होंने सीजेपी प्रदर्शन के समर्थन में एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। वे छात्रों के समर्थन में एक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बना रहे थे। सोशल मीडिया यूजर्स इस कार्रवाई पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर किसी नागरिक ने कानून नहीं तोड़ा है और कोई हिंसा नहीं की है तो सिर्फ अपनी बात रखने की तैयारी करने पर गिरफ्तार करना कहां का न्याय है।
सुहाना खान का नाम सुनते ही पुलिस ने कहा, 'इसे अलग लेकर आओ।' इसके बाद सिविल ड्रेस में मौजूद एक पुरुष पुलिसकर्मी ने मुझे करीब 7 घंटे तक टॉर्चर किया। मेरे प्राइवेट पार्ट पर भी हमला किया और मुझे बेरहमी से पीटा। pic.twitter.com/HPNfaxGOQn
— Millat Times (@Millat_Times) July 26, 2026
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई और प्रताड़ना के गंभीर आरोप
सोशल मीडिया पर एक्टिविस्ट सुहाना खान से जुड़ा एक बयान भी काफी वायरल हो रहा है। उन्होंने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुहाना खान के अनुसार पुलिसकर्मियों ने उनका नाम सुनते ही उन्हें अलग ले जाने का निर्देश दिया। इसके बाद सिविल ड्रेस में मौजूद एक पुरुष पुलिसकर्मी ने उन्हें लगभग सात घंटे तक हिरासत में रखा। उनके साथ मारपीट की गई और प्रताड़ित किया गया।
दूसरी ओर रिबेलियस डोगरा नामक हैंडल से गुलविंदर ने लिखा कि सरकार अपने उन वादों से पीछे हट रही है जिसमें प्रदर्शनकारियों पर कोई प्राथमिकी दर्ज न करने की बात कही गई थी। बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य एनडीए शासित राज्यों में छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है। मुस्लिम छात्रों को विशेष रूप से चिन्हित कर परेशान किया जा रहा है।
कोलकाता नीट प्रदर्शन हिंसा मामले में 14 लोग गिरफ्तार Indiatimes
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुआ प्रदर्शन हिंसक हो गया था। द प्रेसपार्क और मकतूब मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने इस सिलसिले में कार्रवाई तेज कर दी है। रविवार को पुलिस ने तीन और लोगों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या अब 14 हो चुकी है।
बंगाल: नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर प्रदर्शन के दौरान हिंसा के सिलसिले में शहबाज खान, मोहम्मद सलमान हुसैन और मोहम्मद जोहिरुद्दीन मल गिरफ़्तार।
— The Pressmark (@thepressmark) July 26, 2026
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में दो दिन पहले हुए प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा के मामले में पुलिस ने… pic.twitter.com/00GT0ZhxOo
कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग की बारीकी से जांच की गई। इसके बाद विभिन्न स्थानों पर छापेमारी करके आरोपियों को पकड़ा गया। ताजा गिरफ्तारियों में कारया थाना क्षेत्र के शहबाज खान (34 वर्ष), राजाबागान निवासी मोहम्मद सलमान हुसैन और दक्षिण 24 परगना के मोहम्मद जोहिरुद्दीन मल शामिल हैं।
The West Bengal government invoked the Goonda Act for the first time after clashes during the Kolkata NEET protest, with police arresting 11 people, including 10 Muslims, while student leaders alleged BJP-backed provocateurs triggered the violence.https://t.co/cqUEIV3yWQ pic.twitter.com/5Y4XRHNNAL
— Maktoob (@MaktoobMedia) July 26, 2026
मकतूब मीडिया के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता विरोध प्रदर्शन के बाद भड़की हिंसा में पहली बार गुंडा एक्ट लागू किया है। अब तक गिरफ्तार किए गए 11 मुख्य आरोपियों में 10 मुस्लिम समुदाय से हैं। वहीं दूसरी तरफ छात्र नेताओं का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा भारतीय जनता पार्टी समर्थित उपद्रवियों ने भड़काई थी, जिसके बाद आम छात्रों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां का बड़ा बयान Indiatimes
इन तमाम घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। भोपाल में नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (NLIU) में आयोजित चौथे जस्टिस जीपी सिंह मेमोरियल लेक्चर को संबोधित करते हुए उन्होंने देश में घटते लोकतांत्रिक स्थान पर चिंता जताई।
"गाज़ा के समर्थन में मार्च की अनुमति न देना मुझे बेहद आश्चर्यजनक लगा।"
— LiveLaw Hindi (@LivelawH) July 26, 2026
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां ने कहा कि भारत ने हमेशा फ़िलिस्तीन को मान्यता दी है और गाज़ा की घटनाओं पर गंभीर अंतरराष्ट्रीय चिंताएं जताई गई हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में… pic.twitter.com/fZpXv3wBmq
जस्टिस भुइयां ने कहा कि भारत में असहमति व्यक्त करने का स्थान लगातार सिकुड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अपनी राय व्यक्त करना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। लोकतंत्र की असली ताकत बहस और असहमति में ही निहित है। अफसोस की बात यह है कि अब सामान्य और वैध गतिविधियों को भी अपराध घोषित किया जा रहा है।
उन्होंने कैंपस में विरोध जताने वाले छात्रों की गिरफ्तारी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों को गिरफ्तार कर लिया जाता है और उन्हें 30 से 40 दिनों तक जमानत नहीं मिलती। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया जाता है और पढ़ाई जारी रखने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है।
जस्टिस भुइयां ने वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार करने वाले युवकों की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है। गंगा नदी पर चिकन खाने को रोकने वाला कोई कानून नहीं है। फिर भी ऐसे मामले में युवाओं को तीन महीने तक जेल में रखा गया।
उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा गाजा के समर्थन में प्रदर्शन की अनुमति न देने पर भी हैरानी जताई। जस्टिस भुइयां ने याद दिलाया कि भारत ने हमेशा से फलस्तीन को मान्यता दी है। विश्वविद्यालयों में छात्रों को ऐसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर पढ़ने, सवाल पूछने और बहस करने का पूरा अधिकार होना चाहिए। अदालतों द्वारा जमानत देते समय कड़ी शर्तें लगाने पर भी उन्होंने सवाल उठाया और कहा कि ऐसे आदेश नागरिकों को अपनी आवाज उठाने से हतोत्साहित करते हैं।
निष्कर्ष
जंतर मंतर प्रदर्शन के बाद शुरू हुई गिरफ्तारियों और सुप्रीम कोर्ट के जज की टिप्पणी ने देश में बहस को नए सिरे से छेड़ दिया है। एक तरफ जहां मानवाधिकार कार्यकर्ता और छात्र संगठन पुलिस कार्रवाई को एकतरफा बता रहे हैं, वहीं प्रशासन का दावा है कि वह कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अदालतें इन मामलों में क्या रुख अपनाती हैं।
CJP Protest at Jantar Mantar Video
यह वीडियो जंतर मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन के दौरान एकत्र हुए जनसैलाब और छात्रों की मांगों के वास्तविक दृश्य प्रस्तुत करता है।
Inside The CJP Protest |Thousands Gather At Jantar Mantar Seeking Dharmendra Pradhan’s Resignation
Mojo Story · 18k views Open in Inside The CJP Protest |Thousands Gather At Jantar Mantar Seeking Dharmendra Pradhan’s Resignation

https://youtube.com/watch?v=hl0sMGDko74%3Fhl%3Den-GB%26rel%3D0%26showinfo%3D0%26enablejsapi%3D1%26origin%3Dhttps%253A%252F%252Fgemini.google.com%26widgetid%3D5%26forigin%3Dhttps%253A%252F%252Fgemini.google.com%252Fapp%252Fd1d1c1a1c6e8cfbe%26aoriginsup%3D1%26gporigin%3Dhttps%253A%252F%252Fwww.google.com%252F%26vf%3D1
पाठकों के लिए महत्वपूर्ण सूचना
इस रिपोर्ट में जिन घटनाओं का उल्लेख सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किया गया है, उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जहां आधिकारिक जानकारी उपलब्ध है, उसे उसी रूप में शामिल किया गया है। यदि संबंधित पुलिस विभाग, राज्य सरकार या अन्य पक्ष इस विषय में विस्तृत प्रतिक्रिया जारी करते हैं तो रिपोर्ट को उसी के अनुरूप अद्यतन किया जा सकता है।

