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जंतर मंतर प्रदर्शन के बाद छात्र कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट जज की टिप्पणी

मुस्लिम नाउ ब्यूरो/नई दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी

राजधानी दिल्ली स्थित जंतर मंतर पर सीजेपी (सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस) आंदोलन समाप्त हुए अभी कुछ ही घंटे बीते हैं। इसके तुरंत बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से कई सवाल खड़े करने वाली खबरें सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर दिल्ली समेत भारतीय जनता पार्टी और एनडीए शासित विभिन्न राज्यों से जुड़ी सूचनाएं वायरल हो रही हैं। इन पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों को लेकर पुलिस और प्रशासन ने व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है। बिहार, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मुस्लिम युवाओं को हिरासत में लेने तथा उनसे पूछताछ किए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।हालांकि,मुस्लिम नाउ भी इन सोशल मीडिया दावों की पुष्टि नहीं करता।

आंदोलन के दौरान मैदान में मदद करने वाले लोगों पर भी शिकंजा कसने के आरोप लग रहे हैं। जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था देखने वाले मोहम्मद जुनैद और उनके परिजनों को कथित तौर पर पुलिस प्रताड़ना झेलनी पड़ी है। इस तरह के समाचार सोशल मीडिया मंचों पर तेजी से साझा किए जा रहे हैं।

इसी बीच देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ जज की टिप्पणी की चर्चा भी जोर पकड़ रही है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित एक व्याख्यान के दौरान जज ने लोकतांत्रिक विरोध और नागरिकों के अधिकारों पर बेहद स्पष्ट विचार रखे हैं। उन्होंने कहा कि देश में वैध और शांतिपूर्ण गतिविधियों को भी अपराध का रूप दिया जा रहा है। कैंपस में अपने अधिकारों की मांग करने वाले छात्रों को जेल भेजा जा रहा है। हालांकि मुस्लिम नाउ डिजिटल मीडिया ब्यूरो सोशल मीडिया पर तैर रहे इन सभी व्यक्तिगत दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।

जंतर मंतर के लंगर प्रभारी जुनैद को हिरासत में लेने का दावा

सोशल मीडिया मंच एक्स पर पत्रकार सचिन गुप्ता और सौरव शुक्ला ने एक हैरान करने वाली घटना की जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि जंतर मंतर पर छात्रों के लिए लंगर की जिम्मेदारी संभालने वाले कार्यकर्ता मोहम्मद जुनैद को दिल्ली पुलिस ने 24 जुलाई की देर रात उठा लिया।

दावे के अनुसार पुलिस टीम जुनैद को गाड़ी में बैठाकर उत्तराखंड की ओर ले गई। इस पूरी यात्रा के दौरान उनकी आंखों पर पट्टी बंधी रही। अगले दिन सुबह एक वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे पूछताछ शुरू की। पुलिस अधिकारियों ने जुनैद से पूछा कि आंदोलन के दौरान भोजन बांटने के लिए फंडिंग कहां से मिल रही थी। इतना खाना अकेले कैसे बांटा जा रहा था। पूछताछ पूरी होने के बाद पुलिस टीम उन्हें मसूरी की सड़कों पर छोड़कर वापस लौट गई। इसके बाद जुनैद किसी तरह कैब का इंतजाम करके 25 जुलाई को दिल्ली वापस पहुंचे।

स्वतंत्र डिजिटल न्यूज चैनल द रेड माइक ने भी जुनैद का एक विशेष साक्षात्कार प्रसारित किया है। इस साक्षात्कार में जुनैद ने खुद अपने साथ हुई घटना का ब्योरा दिया है। उन्होंने बताया कि किस तरह उन्हें हिरासत में रखकर डराया और धमकाया गया। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रो. मुकेश कुमार ने लिखा कि आंदोलनकारी छात्रों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने मददगारों के लिए आवाज उठाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ की पुलिस जुनैद ही नहीं बल्कि उनके रिश्तेदारों और परिवार के लोगों को भी प्रताड़ित कर रही है।

असम में व्हाट्सएप ग्रुप बनाने पर तीन युवा गिरफ्तार

असम के लखीमपुर जिले से भी पुलिस कार्रवाई की एक बड़ी खबर सामने आई है। पत्रकार अशरफ हुसैन द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक लखीमपुर पुलिस ने तीन मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए युवाओं के नाम अशराफुल इस्लाम, मंजूर रहमान और अब्दुल कासेम बताए गए हैं।

इन युवाओं पर आरोप है कि उन्होंने सीजेपी प्रदर्शन के समर्थन में एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। वे छात्रों के समर्थन में एक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बना रहे थे। सोशल मीडिया यूजर्स इस कार्रवाई पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर किसी नागरिक ने कानून नहीं तोड़ा है और कोई हिंसा नहीं की है तो सिर्फ अपनी बात रखने की तैयारी करने पर गिरफ्तार करना कहां का न्याय है।

प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई और प्रताड़ना के गंभीर आरोप

सोशल मीडिया पर एक्टिविस्ट सुहाना खान से जुड़ा एक बयान भी काफी वायरल हो रहा है। उन्होंने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुहाना खान के अनुसार पुलिसकर्मियों ने उनका नाम सुनते ही उन्हें अलग ले जाने का निर्देश दिया। इसके बाद सिविल ड्रेस में मौजूद एक पुरुष पुलिसकर्मी ने उन्हें लगभग सात घंटे तक हिरासत में रखा। उनके साथ मारपीट की गई और प्रताड़ित किया गया।

दूसरी ओर रिबेलियस डोगरा नामक हैंडल से गुलविंदर ने लिखा कि सरकार अपने उन वादों से पीछे हट रही है जिसमें प्रदर्शनकारियों पर कोई प्राथमिकी दर्ज न करने की बात कही गई थी। बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य एनडीए शासित राज्यों में छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है। मुस्लिम छात्रों को विशेष रूप से चिन्हित कर परेशान किया जा रहा है।

कोलकाता नीट प्रदर्शन हिंसा मामले में 14 लोग गिरफ्तार Indiatimes

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुआ प्रदर्शन हिंसक हो गया था। द प्रेसपार्क और मकतूब मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने इस सिलसिले में कार्रवाई तेज कर दी है। रविवार को पुलिस ने तीन और लोगों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या अब 14 हो चुकी है।

कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग की बारीकी से जांच की गई। इसके बाद विभिन्न स्थानों पर छापेमारी करके आरोपियों को पकड़ा गया। ताजा गिरफ्तारियों में कारया थाना क्षेत्र के शहबाज खान (34 वर्ष), राजाबागान निवासी मोहम्मद सलमान हुसैन और दक्षिण 24 परगना के मोहम्मद जोहिरुद्दीन मल शामिल हैं।

मकतूब मीडिया के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता विरोध प्रदर्शन के बाद भड़की हिंसा में पहली बार गुंडा एक्ट लागू किया है। अब तक गिरफ्तार किए गए 11 मुख्य आरोपियों में 10 मुस्लिम समुदाय से हैं। वहीं दूसरी तरफ छात्र नेताओं का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा भारतीय जनता पार्टी समर्थित उपद्रवियों ने भड़काई थी, जिसके बाद आम छात्रों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां का बड़ा बयान Indiatimes

इन तमाम घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। भोपाल में नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (NLIU) में आयोजित चौथे जस्टिस जीपी सिंह मेमोरियल लेक्चर को संबोधित करते हुए उन्होंने देश में घटते लोकतांत्रिक स्थान पर चिंता जताई।

जस्टिस भुइयां ने कहा कि भारत में असहमति व्यक्त करने का स्थान लगातार सिकुड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अपनी राय व्यक्त करना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। लोकतंत्र की असली ताकत बहस और असहमति में ही निहित है। अफसोस की बात यह है कि अब सामान्य और वैध गतिविधियों को भी अपराध घोषित किया जा रहा है।

उन्होंने कैंपस में विरोध जताने वाले छात्रों की गिरफ्तारी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों को गिरफ्तार कर लिया जाता है और उन्हें 30 से 40 दिनों तक जमानत नहीं मिलती। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया जाता है और पढ़ाई जारी रखने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है।

जस्टिस भुइयां ने वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार करने वाले युवकों की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है। गंगा नदी पर चिकन खाने को रोकने वाला कोई कानून नहीं है। फिर भी ऐसे मामले में युवाओं को तीन महीने तक जेल में रखा गया।

उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा गाजा के समर्थन में प्रदर्शन की अनुमति न देने पर भी हैरानी जताई। जस्टिस भुइयां ने याद दिलाया कि भारत ने हमेशा से फलस्तीन को मान्यता दी है। विश्वविद्यालयों में छात्रों को ऐसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर पढ़ने, सवाल पूछने और बहस करने का पूरा अधिकार होना चाहिए। अदालतों द्वारा जमानत देते समय कड़ी शर्तें लगाने पर भी उन्होंने सवाल उठाया और कहा कि ऐसे आदेश नागरिकों को अपनी आवाज उठाने से हतोत्साहित करते हैं।

निष्कर्ष

जंतर मंतर प्रदर्शन के बाद शुरू हुई गिरफ्तारियों और सुप्रीम कोर्ट के जज की टिप्पणी ने देश में बहस को नए सिरे से छेड़ दिया है। एक तरफ जहां मानवाधिकार कार्यकर्ता और छात्र संगठन पुलिस कार्रवाई को एकतरफा बता रहे हैं, वहीं प्रशासन का दावा है कि वह कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अदालतें इन मामलों में क्या रुख अपनाती हैं।

CJP Protest at Jantar Mantar Video

यह वीडियो जंतर मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन के दौरान एकत्र हुए जनसैलाब और छात्रों की मांगों के वास्तविक दृश्य प्रस्तुत करता है।

Inside The CJP Protest |Thousands Gather At Jantar Mantar Seeking Dharmendra Pradhan’s Resignation

Mojo Story · 18k views Open in Inside The CJP Protest |Thousands Gather At Jantar Mantar Seeking Dharmendra Pradhan’s Resignation

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पाठकों के लिए महत्वपूर्ण सूचना

इस रिपोर्ट में जिन घटनाओं का उल्लेख सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किया गया है, उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जहां आधिकारिक जानकारी उपलब्ध है, उसे उसी रूप में शामिल किया गया है। यदि संबंधित पुलिस विभाग, राज्य सरकार या अन्य पक्ष इस विषय में विस्तृत प्रतिक्रिया जारी करते हैं तो रिपोर्ट को उसी के अनुरूप अद्यतन किया जा सकता है।

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