सऊदी अरब की इराक में ईरान समर्थित गुटों पर बड़ी स्ट्राइक
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, रियाद
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार तड़के इराक में मौजूद ईरान समर्थित उग्रवादी ठिकानों पर जोरदार हवाई हमले किए। यह सैन्य कार्रवाई अमेरिका के सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम की मदद से की गई है। सऊदी अरब ने यह कदम अपने तेल संयंत्रों पर हुए सिलसिलेवार ड्रोन हमलों के जवाब में उठाया है।
सऊदी रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की। बयान में साफ कहा गया है कि रियाध क्षेत्र में तनाव बढ़ाना नहीं चाहता। हालांकि किसी भी तरह के हमले का माकूल जवाब देने के लिए देश पूरी तरह तैयार है। इस पूरी कार्रवाई को दोनों देशों की सेनाओं ने साझा रणनीति के तहत अंजाम दिया है।
صرح المتحدث الرسمي باسم وزارة الدفاع اللواء الركن تركي المالكي أنه إلحاقاً للبيانين الصادرين من وزارة الدفاع يومي الاثنين (١٣ صفر ١٤٤٨هـ) والثلاثاء ( ١٤ صفر ١٤٤٨هـ) الموافقين ( ٢٧- ٢٨ يوليو ٢٠٢٦م) من أن الدفاعات الجوية اعترضت ودمرت عدداً من المسيّرات التي حاولت استهداف منشآت… pic.twitter.com/0Pei5KwSkQ
— وزارة الدفاع (@modgovksa) July 29, 2026
मध्य पूर्व संघर्ष का घटनाक्रम
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│ सऊदी तेल संयंत्रों पर ड्रोन हमले │
│ (पूर्वी प्रांत और राजधानी रियाध क्षेत्र) │
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│ सऊदी वायु रक्षा द्वारा इंटरसेप्ट │
│ (ड्रोन को हवा में ही किया गया नष्ट) │
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│ संयुक्त सैन्य जवाबी कार्रवाई │
│ (सऊदी अरब और अमेरिकी सेंटकॉम द्वारा इराक पर स्ट्राइक) │
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ड्रोन हमलों के बाद लिया गया एक्शन
इस सैन्य कार्रवाई से ठीक पहले सऊदी अरब ने कई ड्रोन हमलों को नाकाम किया था। मंगलवार शाम को पूर्वी प्रांत में स्थित प्रमुख पेट्रोलियम सुविधाओं को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। सऊदी रक्षा बलों ने सही समय पर कार्रवाई करते हुए इन सभी ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया।
सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ये हमलावर ड्रोन इराकी क्षेत्र से भेजे गए थे। इसके पीछे ईरान समर्थित गुटों का हाथ है। सोमवार को भी इसी तरह रियाध और पूर्वी प्रांत की ओर आ रहे ड्रोनों को नष्ट किया गया था।
मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के अनुसार: “सऊदी अरब को अपनी संप्रभुता, नागरिकों और राष्ट्रीय संपत्तियों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। हम सही समय और सही जगह पर इस तरह की आक्रामकता का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।”
संयुक्त राष्ट्र चार्टर और आत्मरक्षा का अधिकार
सऊदी अरब ने इस जवाबी हमले को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत अपनी आत्मरक्षा का वैध अधिकार बताया है। इसके साथ ही आधिकारिक बयान में एक धार्मिक पंक्ति का हवाला भी दिया गया, जिसका अर्थ है कि जो आप पर हमला करे, आप भी उसी अनुपात में उस पर कार्रवाई करें।
रियाध और वाशिंगटन दोनों ने इस बात पर जोर दिया है कि यह ऑपरेशन सीमित था। इसका मकसद किसी बड़े युद्ध की शुरुआत करना नहीं, बल्कि भविष्य के हमलों को रोकना है।
क्षेत्रीय संतुलन और वैश्विक तेल बाजार पर असर
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सऊदी अरब पिछले कुछ वर्षों से क्षेत्र में शांति बनाने की कोशिश कर रहा था। साल 2023 में चीन की मध्यस्थता से ईरान के साथ राजनयिक संबंध बहाल भी हुए थे। लेकिन इराक और यमन से सक्रिय प्रॉक्सी गुटों के लगातार हमलों ने इस शांति को खतरे में डाल दिया है।
सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के संयंत्र दुनिया भर के ऊर्जा बाजार के लिए बहुत अहम हैं। इन पर हमले से ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। फिलहाल इस ताजा स्ट्राइक के बाद तेल बाजार में किसी बड़े उतार-चढ़ाव की खबर नहीं है, लेकिन स्थिति पर दुनिया भर की नजरें बनी हुई हैं।

