अमेरिका-ईरान तनाव: अमेरिकी हमले की तैयारी और ईरान का कड़ा जवाब
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, वाॅशिंगटन/ तेहरान
पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करने की खबरें सामने आ रही हैं। दूसरी ओर ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी सैन्य दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
अमेरिका और इजराइल की नई सैन्य रणनीति
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर नए दौर के हवाई हमलों को हरी झंडी दे सकते हैं। इस संभावित सैन्य अभियान में ईरान के तेल शोधन कारखानों (रिफाइनरियों) और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया जा सकता है।
- उद्देश्य: वाशिंगटन का मुख्य लक्ष्य ईरान पर कड़ा दबाव बनाना है ताकि वह अमेरिका की ओर से रखी गई युद्धविराम शर्तों को स्वीकार करे।
- इजराइल की भूमिका: इस संभावित अभियान में इजराइल की प्रत्यक्ष भागीदारी हो सकती है। दोनों देश सैन्य स्तर पर रणनीति साझा कर रहे हैं।
- आर्थिक प्रभाव का ध्यान: रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि वैश्विक वित्तीय बाजारों पर बुरा असर न पड़े, इसलिए किसी भी हमले को सप्ताहांत के दौरान समेटने पर विचार जारी है।
ट्रंप का सख्त रुख और राजनयिक तनाव
कैंप डेविड में कैबिनेट बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर कड़ा प्रहार करने की बात कही। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान बार-बार अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटता है और समझौतों का उल्लंघन करता है।
हालाँकि, ट्रंप प्रशासन के कुछ वरिष्ठ अधिकारी इस तरह के अचानक बड़े हमलों के आर्थिक और सैन्य नतीजों को लेकर आशंकित भी हैं।
ईरान की जवाबी कार्रवाई की तैयारी
ईरान की तसनीम समाचार एजेंसी ने वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से बताया कि तेहरान किसी भी संभावित हमले से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
- ऊर्जा संपत्तियों पर हमला: ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला होता है, तो वह मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ऊर्जा बुनियादी ढांचों और इजराइली महत्वपूर्ण ठिकानों को सीधा निशाना बनाएगा।
- जलडमरूमध्य की नाकाबंदी: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अपनी चौकसी बढ़ा दी है। हालांकि अमेरिका का दावा है कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग व्यापारिक जहाजों के लिए अभी भी खुला है।
- हमलों में तेजी: हाल ही में जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए मिसाइल हमले और खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है।
क्षेत्रीय स्थिति और आगे का रास्ता
पांच महीने से अधिक समय से चल रहे इस संघर्ष का कोई स्थाई समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। हालांकि एक तरफ जहां गाजा समझौते पर प्रगति की खबरें आई हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत का खतरा वैश्विक ईंधन आपूर्ति और मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

