News

ट्रंप ने ईरान से मांगा युद्ध का मुआवजा, बढ़ा तनाव

नौशाद अख्तर

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के बजाय अब एक नई मांग ने हालात को और पेचीदा बना दिया है। अभी तक ईरान अमेरिका से युद्ध और बमबारी में हुए नुकसान का मुआवजा मांग रहा था। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान से मुआवजे की मांग कर दी है।

ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान के साथ भविष्य में होने वाली किसी भी बातचीत में अमेरिका की यह मांग शामिल रहेगी। उनका कहना है कि ईरान से उन लोगों और परिवारों के लिए मुआवजा मांगा जाएगा, जो उनके मुताबिक ईरान के हमलों और कई दशकों से चले आ रहे संघर्षों में मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

इस बयान ने ईरान अमेरिका वार्ता के सामने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल सिर्फ युद्ध खत्म करने का नहीं है। अब बातचीत की मेज पर मुआवजे का मुद्दा भी आ गया है।

पहले ईरान मांग रहा था अमेरिका से मुआवजा

ईरान लगातार यह कहता रहा है कि अमेरिकी और इजरायली हमलों से उसे भारी नुकसान हुआ है। तेहरान की ओर से युद्ध में हुए जान माल के नुकसान की भरपाई की मांग भी उठती रही है।

ईरान की तरफ से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने से जुड़े मुद्दे पर भी अमेरिका से कई रियायतों की मांग की गई है। इनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना और ईरानी तेल उद्योग पर लगे प्रतिबंधों को कम या खत्म करना शामिल है।

अब ट्रंप ने उसी मुआवजे के मुद्दे को दूसरी दिशा में मोड़ दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर ईरान अपने नुकसान का मुआवजा मांग सकता है तो अमेरिका भी ईरान से अपने नुकसान की भरपाई की मांग करेगा।

ट्रंप ने क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रंप ने 10 अगस्त को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान की मुआवजा मांगने की बात का जिक्र किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह भी ईरान से उन लोगों के लिए मुआवजा मांगेंगे, जिन्हें उनके अनुसार ईरान के हमलों और संघर्षों में नुकसान हुआ है।

ट्रंप ने अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस कोल पर 2000 में हुए हमले का भी उल्लेख किया। उन्होंने उन अमेरिकी परिवारों के लिए भी मुआवजे की बात कही, जिनके सदस्य ऐसे हमलों में मारे गए। साथ ही उन्होंने ईरान से जुड़े पुराने संघर्षों और हिंसा में मारे गए लोगों का हवाला दिया।

ट्रंप ने यह भी कहा कि पिछले कई दशकों में ईरान में मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिवारों को भी मुआवजा मिलना चाहिए। उनके मुताबिक पिछले पांच महीने के संघर्ष में हुई मौतों को भी इस दावे में शामिल किया जाना चाहिए।

हालांकि ट्रंप के इन आरोपों और आंकड़ों को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि को लेकर अलग से सावधानी जरूरी है।

भविष्य की हर बातचीत में उठेगा मुद्दा

ट्रंप ने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि ईरान के साथ होने वाली भविष्य की बातचीत में मुआवजे की मांग को मजबूती से रखा जाए।

इसका सीधा मतलब है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते या किसी नए युद्धविराम पर बातचीत आगे बढ़ती है तो केवल परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और सैन्य गतिविधियां ही मुद्दा नहीं रहेंगी। मुआवजा भी बातचीत का हिस्सा बन सकता है।

यही बात ईरान अमेरिका वार्ता को मुश्किल बना सकती है।

क्योंकि तेहरान पहले ही अपने नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है। ऐसे में अगर वाशिंगटन भी मुआवजा मांगता है तो दोनों देशों के बीच बातचीत में एक दूसरे पर आर्थिक और राजनीतिक जिम्मेदारी डालने की कोशिश तेज हो सकती है।

हॉर्मुज पर भी अटकी है बातचीत

ईरान अमेरिका तनाव का एक बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। इसके आसपास तनाव बढ़ने का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है।

हालिया बातचीत में ईरान ने हॉर्मुज को खोलने के लिए अमेरिकी रियायतों की मांग रखी है। इनमें बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म करना और ईरानी तेल उद्योग पर लगे प्रतिबंध हटाना शामिल है।

बातचीत में देरी और हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी अनिश्चितता बढ़ी है।

यही वजह है कि हॉर्मुज का सवाल अब सिर्फ ईरान और अमेरिका का द्विपक्षीय मामला नहीं रहा। भारत समेत एशिया और यूरोप के कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा भी इससे जुड़ी है।

ट्रंप का बदला हुआ रुख भी अहम

ट्रंप का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब उनके रुख में भी कुछ बदलाव दिखाई दे रहा है। हाल के बयानों में उन्होंने संकेत दिया है कि वह ईरान के खिलाफ लगातार नए सैन्य हमलों के बजाय आर्थिक दबाव को प्राथमिकता देने की दिशा में बढ़ सकते हैं।

इसके बावजूद ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपना दबाव कम नहीं किया है। वह एक तरफ बातचीत और संभावित शांति समझौते की बात कर रहे हैं। दूसरी तरफ ईरान से मुआवजा मांगने की घोषणा कर रहे हैं।

यही दोहरा रुख आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगा।

यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो यह देखना होगा कि अमेरिका की मुआवजे की मांग कितनी बड़ी भूमिका निभाती है। यह भी देखना होगा कि ईरान इस मांग पर क्या जवाब देता है।

ईरान के सामने कई शर्तें

ईरान की तरफ से भी अमेरिका के साथ किसी समझौते के लिए कई शर्तें रखी गई हैं। तेहरान चाहता है कि पहले अमेरिकी दबाव कम हो। बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाई जाए। तेल उद्योग पर लगाए गए प्रतिबंधों में राहत दी जाए। इसके बाद हॉर्मुज को लेकर किसी समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

यानी दोनों देशों की प्राथमिकताएं फिलहाल अलग दिखाई दे रही हैं।

ईरान आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य दबाव से राहत चाहता है। अमेरिका ईरान से अपने नागरिकों और सैनिकों को हुए नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है।

ऐसे में शांति वार्ता आसान नहीं होगी।

तेल बाजार पर भी नजर

ईरान अमेरिका संघर्ष का सबसे बड़ा वैश्विक असर ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास तनाव बढ़ने पर तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता पैदा होती है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है।

तेल महंगा होने का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। परिवहन महंगा होता है। उत्पादन लागत बढ़ सकती है। महंगाई पर दबाव आता है। इससे दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की मुश्किल बढ़ सकती है।

इसीलिए हॉर्मुज को खोलने और क्षेत्र में तनाव कम करने की बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर है।

अमेरिका ईरान बातचीत का अगला कदम क्या होगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुआवजे की मांग दोनों देशों के बीच बातचीत को और कठिन बनाएगी या इसे किसी बड़े समझौते में शामिल किया जा सकेगा।

डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल संकेत दे दिया है कि वह इस मुद्दे को पीछे हटाने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को भविष्य की बातचीत में इसे शामिल करने का निर्देश दिया है।

दूसरी तरफ ईरान पहले ही अमेरिका से अपने नुकसान की भरपाई और आर्थिक दबाव कम करने की मांग कर चुका है।

इस तरह आने वाली बातचीत में दोनों पक्ष एक दूसरे से मुआवजा मांगते दिखाई दे सकते हैं।

यह स्थिति अपने आप में असामान्य है। युद्ध के बाद आम तौर पर पक्ष अपने नुकसान का हिसाब रखते हैं। लेकिन यहां दोनों देश एक दूसरे के नुकसान और जिम्मेदारी का हिसाब मांग रहे हैं।

यही कारण है कि ईरान अमेरिका तनाव अब केवल सैन्य संघर्ष का मामला नहीं रह गया है। इसमें परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, तेल, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, क्षेत्रीय सुरक्षा और अब युद्ध मुआवजा भी शामिल हो गया है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप की मुआवजे की मांग ईरान अमेरिका शांति वार्ता को किस दिशा में ले जाती है। फिलहाल इतना साफ है कि बातचीत की मेज पर लौटने की कोशिश के बीच दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी खत्म नहीं हुआ है।

AEO के लिए सीधे सवालों के जवाब

डोनाल्ड ट्रंप ईरान से मुआवजा क्यों मांग रहे हैं?
ट्रंप का कहना है कि ईरान से जुड़े हमलों और संघर्षों में अमेरिकी नागरिकों तथा सैनिकों को हुए नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा है कि यह मांग भविष्य की अमेरिका ईरान वार्ता में रखी जाएगी।

ईरान अमेरिका से मुआवजा क्यों मांग रहा है?
ईरान अमेरिकी और इजरायली हमलों से हुए नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है। तेहरान ने हॉर्मुज को लेकर बातचीत में अमेरिकी नाकाबंदी और तेल प्रतिबंध हटाने की मांग भी रखी है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
यह वैश्विक ऊर्जा व्यापार का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां तनाव बढ़ने पर तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर असर पड़ सकता है।

क्या मुआवजा अमेरिका ईरान शांति समझौते का हिस्सा बनेगा?
ट्रंप ने कहा है कि उनके प्रतिनिधि भविष्य की सभी बातचीत में इस मांग को शामिल करेंगे। अंतिम समझौते में यह मुद्दा शामिल होगा या नहीं, यह अभी तय नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *