UAE में रहने वाले NRIs भारतीयों पर 180 दिन का नियम लागू होगा?
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई
संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में रहने वाले भारतीयों के लिए विदेश में रखे पैसे को लेकर एक अहम सवाल सामने आया है। क्या भारत का 180 दिन वाला विदेशी मुद्रा नियम UAE में कमाने वाले एनआरआई पर भी लागू होता है?
इस सवाल की वजह भारत के विदेशी मुद्रा नियमों से जुड़ी हालिया चर्चा है। कुछ विदेशी बैंकों की ओर से भारत में रहने वाले अमीर ग्राहकों के अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड को लेकर सख्ती किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
इसके बाद UAE में रहने वाले भारतीयों के बीच भी चिंता बढ़ी है। कई लोग जानना चाहते हैं कि क्या दुबई, अबू धाबी या UAE के दूसरे अमीरात में नौकरी करके कमाई गई रकम भी 180 दिन के भीतर भारत भेजनी होगी?
सीधा जवाब है, आमतौर पर नहीं।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण चीज भारतीय पासपोर्ट नहीं, बल्कि FEMA के तहत व्यक्ति की रेजिडेंसी यानी निवास स्थिति है।
अगर कोई भारतीय नागरिक FEMA के तहत भारत से बाहर रहने वाला व्यक्ति यानी Non Resident है और UAE में नौकरी या कारोबार से कमाई कर रहा है तो उसकी UAE में रखी वैध कमाई पर LRS का 180 दिन वाला नियम सामान्य तौर पर लागू नहीं होता।
यानी UAE में रहने वाला एनआरआई अपनी सैलरी, कारोबार से हुई आमदनी और बचत को UAE के बैंक खाते में रख सकता है।
उसे केवल 180 दिन पूरे होने के कारण रकम भारत भेजने या उसे किसी विदेशी निवेश में लगाने की जरूरत नहीं है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
Resident Indian और NRI के विदेशी पैसे पर नियम एक जैसे नहीं हैं।
क्या है 180 दिन वाला नियम?
भारत में विदेशी मुद्रा भेजने के लिए Liberalised Remittance Scheme यानी LRS है। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार भारत में रहने वाला व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में LRS के तहत अधिकतम 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर तक विदेश भेज सकता है।
यह रकम कई अनुमत कामों के लिए भेजी जा सकती है।
इनमें विदेश यात्रा, पढ़ाई, इलाज, विदेशी शेयर या दूसरी प्रतिभूतियों में निवेश और विदेश में संपत्ति खरीदना जैसे काम शामिल हैं।
लेकिन अगर भारत में रहने वाले व्यक्ति ने LRS के तहत विदेश में पैसा भेजा और वह रकम निर्धारित उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं हुई तो उसे हमेशा के लिए विदेश में पड़ा नहीं रखा जा सकता।
RBI के विदेशी मुद्रा नियमों के तहत ऐसी अप्रयुक्त विदेशी मुद्रा को सामान्य तौर पर निर्धारित अवधि के भीतर भारत वापस लाना या उसके इस्तेमाल से जुड़ी शर्तें पूरी करना जरूरी हो सकता है।
इसी को लेकर 180 दिन की चर्चा है।
मसलन, किसी व्यक्ति ने विदेश में शेयर खरीदने के लिए पैसा भेजा। बाद में शेयर खरीदने का सौदा नहीं हुआ। अब वह रकम विदेशी बैंक खाते में बेवजह पड़ी नहीं रह सकती।
ऐसे मामलों में विदेशी मुद्रा नियम लागू होंगे।
UAE के NRI को क्यों नहीं घबराना चाहिए?
अब सवाल UAE में रहने वाले भारतीय की स्थिति का है।
मान लीजिए कोई भारतीय नागरिक दुबई में नौकरी करता है। उसे हर महीने UAE में सैलरी मिलती है। वह सैलरी UAE के बैंक खाते में जमा होती है।
यह रकम LRS के तहत भारत से UAE भेजी गई रकम नहीं है।
यह UAE में अर्जित आय है।
यही सबसे अहम अंतर है।
यदि व्यक्ति FEMA के तहत भारत का निवासी नहीं है तो UAE में कमाई गई उसकी सैलरी और बचत पर भारत का LRS नियम उसी तरह लागू नहीं होता, जैसे भारत में रहने वाले व्यक्ति द्वारा विदेश भेजे गए पैसे पर होता है।
इसलिए UAE में रहने वाला योग्य NRI अपनी वैध कमाई को UAE के करंट अकाउंट, सेविंग अकाउंट या फिक्स्ड डिपॉजिट में रख सकता है।
उसे केवल 180 दिन पूरे होने पर पैसा भारत वापस लाने की मजबूरी नहीं है।
पासपोर्ट नहीं, रेजिडेंसी है असली सवाल
इस पूरे मामले में एक बात सबसे ज्यादा समझने की जरूरत है।
भारतीय नागरिक होना और भारत का निवासी होना एक ही बात नहीं है।
कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक हो सकता है, लेकिन FEMA के तहत भारत से बाहर रहने वाला व्यक्ति हो सकता है।
इसी तरह UAE में रहने वाले भारतीय की स्थिति केवल उसके पासपोर्ट से तय नहीं होती।
उसकी वास्तविक निवास स्थिति महत्वपूर्ण होती है।
अगर वह UAE में रहकर नौकरी या कारोबार कर रहा है और FEMA के अनुसार Non Resident है तो UAE में अर्जित उसकी आमदनी पर LRS का नियम अपने आप लागू नहीं हो जाता।
यही कारण है कि UAE में रहने वाले एनआरआई को भारत में रहने वाले Resident Indian के नियमों से अपनी स्थिति को अलग समझना चाहिए।
NRE और FCNR खाते का क्या होगा?
UAE में रहने वाले भारतीयों के लिए NRE और FCNR खाते भी महत्वपूर्ण हैं।
Non Resident External यानी NRE खाते में विदेश से भेजी गई रकम रखी जाती है। FCNR खाते में विदेशी मुद्रा में जमा की सुविधा होती है।
इन खातों पर अलग नियम लागू होते हैं।
इसलिए NRI को LRS के 180 दिन वाले नियम को NRE या FCNR खाते की हर रकम पर सीधे लागू नहीं मानना चाहिए।
इन खातों और उनके संचालन के लिए RBI के अलग विदेशी मुद्रा नियम हैं।
यही वजह है कि किसी भी रकम को भारत भेजने या भारत से विदेश ले जाने से पहले बैंक से अपनी स्थिति के अनुसार नियमों की पुष्टि करना बेहतर है।
NRO खाते से पैसा UAE भेजने पर क्या होगा?
यह भी UAE में रहने वाले एनआरआई के लिए बहुत महत्वपूर्ण सवाल है।
NRO यानी Non Resident Ordinary खाते में भारत से होने वाली कई तरह की आय जमा होती है।
मसलन किराया, डिविडेंड, पेंशन और कुछ संपत्ति से जुड़ी रकम।
NRO खाते से विदेश पैसा भेजने के नियम LRS से अलग हैं।
RBI के नियमों के अनुसार एनआरआई को सामान्य परिस्थितियों में एक वित्तीय वर्ष में NRO खाते और कुछ पात्र संपत्ति बिक्री से प्राप्त रकम में से कुल 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक की रकम विदेश भेजने की सुविधा मिल सकती है। इसके लिए संबंधित करों के भुगतान और जरूरी दस्तावेजों की शर्तें पूरी करनी होती हैं।
यहां भी 2.5 लाख डॉलर वाला LRS नियम सीधे लागू नहीं होता।
यानी NRO से UAE पैसा भेजना और Resident Indian का LRS के तहत विदेश पैसा भेजना दो अलग प्रक्रियाएं हैं।
बैंक स्रोत का प्रमाण मांग सकता है।
टैक्स भुगतान से जुड़े दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं। कुछ मामलों में निर्धारित घोषणा और प्रमाणपत्र की जरूरत हो सकती है।
इसलिए NRO से बड़ी रकम UAE भेजते समय दस्तावेज पूरे रखना जरूरी है।
अगर NRI वापस भारत लौट आए तो?
अब एक और स्थिति समझिए।
कोई व्यक्ति कई साल UAE में रहा। उसने वहां नौकरी की। बचत की। निवेश किए। फिर वह स्थायी रूप से भारत वापस आने का फैसला करता है।
ऐसी स्थिति में केवल भारत लौटने की तारीख देखकर FEMA की रेजिडेंसी तय नहीं होती।
व्यक्ति भारत क्यों आया है। कितने समय के लिए आया है। उसका भारत में रहने का इरादा क्या है। ऐसे पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं।
जब उसकी FEMA रेजिडेंसी बदलती है तो भारत में उसके बैंक खातों की स्थिति भी बदल सकती है।
NRE और NRO खातों को लागू नियमों के अनुसार दोबारा वर्गीकृत करना पड़ सकता है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि UAE में गैर निवासी रहते हुए कानूनी तरीके से बनाई गई हर संपत्ति तुरंत बेचनी होगी।
विदेश में रहते हुए हासिल की गई विदेशी संपत्ति, विदेशी मुद्रा और दूसरे वैध निवेशों के लिए अलग प्रावधान हैं।
हां, भारत का निवासी बनने के बाद भारत से विदेश में नए निवेश या नई रकम भेजने पर Resident Indian के नियम लागू हो सकते हैं।
विदेशी क्रेडिट कार्ड पर क्यों बढ़ी चिंता?
यह मामला तब ज्यादा चर्चा में आया जब कुछ विदेशी बैंकों की ओर से भारत में रहने वाले ग्राहकों के अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड को लेकर सवाल उठाए जाने की खबरें आईं।
मुद्दा क्रेडिट स्कोर नहीं है।
मुद्दा यह है कि भारत में रहने वाला व्यक्ति LRS के तहत विदेश भेजी गई रकम को विदेशी बैंक खाते में लंबे समय तक बिना इस्तेमाल के रख सकता है या नहीं।
विदेशी बैंक से जुड़े क्रेडिट कार्ड में अक्सर खाते में पर्याप्त बैलेंस और बैंकिंग संबंध महत्वपूर्ण होते हैं।
अगर भारतीय निवासी के लिए विदेश में पैसा लंबे समय तक रखना विदेशी मुद्रा नियमों के कारण मुश्किल हो तो विदेशी बैंक भी अपने जोखिम को लेकर सवाल उठा सकते हैं।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि UAE में रहने वाले भारतीयों के क्रेडिट कार्ड बंद हो जाएंगे।
UAE में नौकरी करने वाले और वहां रहने वाले NRI की स्थिति अलग है।
नाबालिगों का मामला भी चर्चा में
LRS के तहत भारत में रहने वाले नाबालिगों के लिए भी विदेश में रकम भेजने का प्रावधान है। हालांकि जरूरी कागजी कार्रवाई माता पिता या अभिभावक करते हैं।
नाबालिगों के सामने पैसा इस्तेमाल करने के विकल्प अपेक्षाकृत कम हो सकते हैं।
इसी वजह से विदेश में उनके नाम से खुले कुछ खातों और बैंकिंग संबंधों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।
लेकिन UAE में रहने वाले NRI परिवार के बच्चे को केवल भारतीय नागरिक होने के कारण Resident Indian नहीं माना जा सकता।
अगर बच्चा अपने माता पिता के साथ UAE में रहता है तो उसकी FEMA स्थिति अलग तरीके से तय होगी।
UAE में रहने वाले भारतीयों के लिए क्या समझना जरूरी है?
इस पूरे मामले को चार बिंदुओं में समझा जा सकता है।
पहली बात। LRS मुख्य रूप से भारत में रहने वाले व्यक्तियों के विदेशी मुद्रा प्रेषण से जुड़ा है।
दूसरी बात। UAE में NRI के तौर पर कमाई गई सैलरी और बचत पर 180 दिन वाला LRS नियम अपने आप लागू नहीं होता।
तीसरी बात। NRO खाते से विदेश भेजी जाने वाली रकम के लिए अलग नियम हैं।
चौथी बात। भारत लौटने के बाद FEMA की रेजिडेंसी स्थिति बदलने पर नए विदेशी लेनदेन पर Resident Indian के नियम लागू हो सकते हैं।
यानी UAE में रहने वाले भारतीयों को केवल 180 दिन की खबर देखकर परेशान होने की जरूरत नहीं है।
सबसे पहले अपनी FEMA स्थिति समझना जरूरी है।
इसके बाद यह देखना चाहिए कि पैसा कहां से आया है। वह UAE में कमाई गई सैलरी है या भारत से LRS के तहत भेजी गई रकम। वह NRO खाते की भारतीय आय है या NRE या FCNR खाते की रकम।
यही अंतर तय करेगा कि कौन सा नियम लागू होगा।
AEO के लिए सीधे सवालों के जवाब
क्या UAE में रहने वाले NRI पर भारत का 180 दिन वाला नियम लागू होता है?
आम तौर पर नहीं। अगर व्यक्ति FEMA के तहत भारत का निवासी नहीं है और UAE में कमाई गई रकम UAE में रखता है तो LRS का 180 दिन वाला नियम सामान्य तौर पर लागू नहीं होता।
180 दिन का नियम किस पर लागू होता है?
यह मुख्य रूप से भारत में रहने वाले व्यक्तियों द्वारा LRS के तहत विदेश भेजी गई और निर्धारित उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं की गई विदेशी मुद्रा से जुड़ा है।
क्या UAE में कमाई गई सैलरी भारत भेजना जरूरी है?
नहीं। योग्य NRI अपनी UAE में कमाई गई वैध सैलरी और बचत UAE के बैंक खाते में रख सकता है।
क्या भारतीय पासपोर्ट रखने वाले हर व्यक्ति पर LRS लागू होता है?
नहीं। इस मामले में नागरिकता से ज्यादा महत्वपूर्ण FEMA के तहत व्यक्ति की रेजिडेंसी स्थिति है।
NRO खाते से UAE कितनी रकम भेज सकते हैं?
RBI के सामान्य नियमों के तहत NRO खाते और कुछ पात्र संपत्ति बिक्री से प्राप्त रकम में से कुल 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक प्रति वित्तीय वर्ष विदेश भेजने की सुविधा हो सकती है। इसके लिए कर और दस्तावेज संबंधी शर्तें पूरी करनी होती हैं।
क्या NRO से विदेश भेजा पैसा भी 180 दिन में इस्तेमाल करना जरूरी है?
NRO से होने वाली पात्र रेमिटेंस को LRS के तहत Resident Indian द्वारा भेजी गई रकम के समान नहीं माना जाना चाहिए। दोनों के नियम अलग हैं।
भारत लौटने पर UAE की बचत का क्या होगा?
भारत लौटने वाले NRI की FEMA रेजिडेंसी स्थिति बदलने पर नए विदेशी लेनदेन पर Resident Indian के नियम लागू हो सकते हैं। विदेश में गैर निवासी रहते हुए कानूनी रूप से हासिल की गई संपत्तियों और निवेशों के लिए अलग प्रावधान हैं।

