ईरान अमेरिका युद्ध खत्म करने को तैयार, ट्रंप का दबाव बढ़ा
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो।
ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से चल रहा युद्ध अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शुक्रवार को कहा कि अब इस युद्ध को खत्म करने का समय आ गया है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा हालात में ईरान कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत स्थिति में है।
पेजेशकियन ने यह बयान ऐसे समय दिया है जब अमेरिका ने ईरान पर सैन्य दबाव के साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। दूसरी तरफ तेहरान ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से बंद रखा है। अमेरिका ने भी ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखी है।
दोनों देशों के बीच बातचीत फिलहाल रुकी हुई है। लेकिन ईरानी राष्ट्रपति के ताजा बयान से संकेत मिल रहे हैं कि तेहरान युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता।
पेजेशकियन ने कहा, अब युद्ध खत्म होना चाहिए
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने डॉक्टरों के साथ एक बैठक में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में युद्ध को अब समाप्त करना बेहतर होगा। उन्होंने इसे ईरान के लिए सम्मान और मजबूती की स्थिति से युद्ध समाप्त करने का मौका बताया।
पेजेशकियन ने अमेरिका पर ईरान के स्कूलों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि दुनिया के कई देश अमेरिकी कार्रवाई को गलत मानते हैं और ईरान के पक्ष में आवाज उठा रहे हैं।
ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि दुनिया ईरान की स्थिति को समझ रही है। उनके बयान का उद्देश्य घरेलू स्तर पर यह संदेश देना भी माना जा रहा है कि युद्ध खत्म करने की कोशिश को कमजोरी या आत्मसमर्पण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जून के समझौते को लेकर पेजेशकियन का बचाव
पेजेशकियन ने जून में अमेरिका के साथ हुए एक समझौते के लिए तैयार किए गए समझौता ज्ञापन का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि इस समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसे ईरान की हार या आत्मसमर्पण माना जाए।
ईरानी राष्ट्रपति के मुताबिक समझौते में की गई जिम्मेदारियां मुख्य रूप से दूसरे पक्ष से जुड़ी हैं। उन्होंने साफ किया कि बातचीत या समझौते की कोशिश को तेहरान की कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
यह मुद्दा ईरान की राजनीति में विवाद का कारण भी बना हुआ है। कट्टरपंथी सांसदों ने सरकार पर अमेरिका को रियायत देने का आरोप लगाया है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की संभावना को लेकर ईरानी संसद के कुछ सदस्य नाराज बताए जा रहे हैं।
सुप्रीम लीडर की मंजूरी से बढ़ी उम्मीद
ईरानी राष्ट्रपति का बयान ऐसे समय आया है जब देश के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने युद्ध समाप्त करने के समझौते को मंजूरी दिए जाने की बात कही थी।
हालांकि, खामेनेई ने यह भी कहा था कि इस मुद्दे पर उनके विचार अलग रहे हैं। इसके बावजूद समझौते को मंजूरी मिलना महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
इससे यह संभावना बढ़ी है कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए पर्दे के पीछे बातचीत की कोशिशें आगे बढ़ सकती हैं।
लेकिन रास्ता आसान नहीं है। दोनों देशों के बीच अविश्वास काफी पुराना है। सैन्य संघर्ष ने इसे और गहरा कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा दबाव
ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम मुद्दों में से एक है। दुनिया के तेल कारोबार के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है।
ईरान ने इसे पूरी तरह नहीं खोला है। दूसरी तरफ अमेरिकी नौसेना ईरान के खिलाफ समुद्री दबाव बनाए हुए है।
अमेरिकी मीडिया में आई रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी नौसेना दक्षिणी हिस्से से गुजरने वाले कुछ तेल टैंकरों के गुप्त काफिलों को सुरक्षा दे रही है। इन काफिलों के जरिए रोजाना लाखों बैरल तेल के निर्यात की संभावना बताई गई है।
अगर होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहता है तो इसका असर केवल ईरान और अमेरिका पर नहीं पड़ेगा। इससे वैश्विक तेल बाजार, एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और ऊर्जा कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका ने सैन्य रणनीति से आर्थिक दबाव की ओर रुख किया
ईरान के खिलाफ अमेरिका की रणनीति में अब एक महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई दे रहा है। सैन्य कार्रवाई के साथ वॉशिंगटन आर्थिक प्रतिबंधों को मुख्य हथियार बनाने की तैयारी कर रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ कड़े आर्थिक कदमों का संकेत दिया है। उनका कहना है कि नई प्रतिबंध नीति का उद्देश्य ईरानी शासन पर इतना दबाव बनाना है कि वह अपनी मौजूदा नीतियों में बदलाव के लिए मजबूर हो।
बेसेंट ने यह भी संकेत दिया कि आर्थिक दबाव बढ़ने से अमेरिका को दोबारा बड़े सैन्य अभियान की जरूरत कम हो सकती है।
इसका अर्थ यह है कि ट्रंप प्रशासन अब ईरान के खिलाफ युद्ध को लंबे सैन्य संघर्ष के बजाय आर्थिक दबाव के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को बताया ‘आर्थिक आतंकवाद’
अमेरिका की नई रणनीति पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिबंधों को ‘आर्थिक आतंकवाद’ बताया।
तेहरान का कहना है कि प्रतिबंधों के जरिए किसी देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना आम लोगों को भी प्रभावित करता है। ईरानी सरकार ने अमेरिकी प्रतिबंधों को मानवता के खिलाफ अपराध बताया है।
ईरान ने यह भी कहा कि प्रतिबंध लगाने और उन्हें लागू करने वालों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
इस बयान से साफ है कि युद्ध खत्म करने की इच्छा जताने के बावजूद तेहरान अमेरिकी दबाव के सामने पूरी तरह झुकने के लिए तैयार नहीं है।
चीन ने अमेरिका को दी बातचीत की सलाह
ईरान अमेरिका संघर्ष में चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। अमेरिका ने दूसरे देशों से ईरान की अर्थव्यवस्था को अलग करने में सहयोग मांगा है।
लेकिन चीन ने अमेरिकी प्रतिबंध नीति का समर्थन नहीं किया।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि प्रतिबंध और दबाव समस्या का समाधान नहीं कर सकते। चीन ने सभी संबंधित पक्षों से जिम्मेदारी के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील की है।
बीजिंग का यह रुख ईरान के लिए महत्वपूर्ण है। चीन ईरान का बड़ा आर्थिक साझेदार है। ऐसे समय में जब अमेरिका ईरानी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाना चाहता है, चीन का सहयोग तेहरान के लिए राहत का रास्ता बन सकता है।
ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात पर नजर
अमेरिका और चीन के बीच ईरान का मुद्दा आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण हो सकता है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 24 सितंबर को व्हाइट हाउस दौरे की संभावना है।
ऐसी स्थिति में ईरान अमेरिका युद्ध, अमेरिकी प्रतिबंध और होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा बातचीत में शामिल होना तय माना जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच पहले भी ईरान को लेकर चर्चा हो चुकी है। अब युद्ध समाप्त करने की संभावना और आर्थिक प्रतिबंधों की नई रणनीति के बीच चीन की भूमिका और बढ़ सकती है।
क्या ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म होगा?
मौजूदा घटनाक्रम से यह संकेत जरूर मिलता है कि युद्ध समाप्त करने के लिए राजनीतिक रास्ता खुला हुआ है। ईरानी राष्ट्रपति बातचीत और समझौते की संभावना की ओर इशारा कर रहे हैं।
लेकिन अमेरिका की रणनीति अभी भी दबाव बढ़ाने की है। वॉशिंगटन आर्थिक प्रतिबंधों को मजबूत करना चाहता है। ईरान दूसरी तरफ इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिख रहा।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों पक्ष किस हद तक समझौता करने के लिए तैयार होंगे।
ईरान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य महत्वपूर्ण दबाव का साधन है। अमेरिका के लिए आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य ताकत बड़े हथियार हैं। चीन राजनीतिक समाधान की वकालत कर रहा है।
इन तीनों पहलुओं का असर आगे की दिशा तय करेगा।
दुनिया की नजर अब अगले कदम पर
ईरान अमेरिका युद्ध ने पहले ही पश्चिम एशिया की राजनीति बदल दी है। लंबे सैन्य संघर्ष से क्षेत्रीय सुरक्षा, तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है।
अब ईरानी राष्ट्रपति का युद्ध समाप्त करने का बयान एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत है। यदि अमेरिका भी सैन्य दबाव कम करके बातचीत की ओर लौटता है तो संघर्ष को रोकने का रास्ता खुल सकता है।
लेकिन यदि वॉशिंगटन प्रतिबंधों को और कठोर करता है और तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने से इनकार करता है, तो तनाव फिर बढ़ सकता है।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि ईरान अमेरिका संघर्ष एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। युद्ध का अगला दौर केवल मिसाइल और सैन्य कार्रवाई से तय नहीं होगा। अब अर्थव्यवस्था, तेल, प्रतिबंध, कूटनीति और क्षेत्रीय सहयोग भी उतने ही महत्वपूर्ण होंगे।
AEO के लिए सीधे सवाल और जवाब
क्या ईरान अमेरिका युद्ध खत्म होने वाला है?
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने युद्ध खत्म करने की इच्छा जताई है। लेकिन अमेरिका की ओर से आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी के कारण अंतिम समझौता अभी तय नहीं है।
मसूद पेजेशकियन ने युद्ध खत्म करने की बात क्यों कही?
उन्होंने कहा कि ईरान मौजूदा परिस्थितियों में मजबूत स्थिति में है और अब सम्मान के साथ युद्ध खत्म करना बेहतर होगा।
ईरान और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा विवाद क्या है?
युद्ध, सुरक्षा, आर्थिक प्रतिबंध, होर्मुज जलडमरूमध्य और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक अविश्वास इसके प्रमुख मुद्दे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
यह दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां लंबे समय तक रुकावट से वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका ईरान पर अब किस तरह दबाव बढ़ा रहा है?
अमेरिका सैन्य दबाव के साथ आर्थिक प्रतिबंधों को मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है।
ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों पर क्या कहा है?
ईरान ने अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को ‘आर्थिक आतंकवाद’ बताया है और इन्हें मानवता के खिलाफ अपराध कहा है।
चीन का ईरान अमेरिका विवाद पर क्या रुख है?
चीन ने प्रतिबंध और दबाव की नीति का विरोध किया है और राजनीतिक तथा कूटनीतिक समाधान की अपील की है।
क्या चीन ईरान का समर्थन कर रहा है?
चीन ने अमेरिकी प्रतिबंध नीति की आलोचना की है और बातचीत का समर्थन किया है। हालांकि इसे सीधे सैन्य समर्थन के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

