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वंदे मातरम पर शर्मिला टैगोर की टिप्पणी से सियासी विवाद

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, कोलकाता, नई दिल्ली।

‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस अब अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की टिप्पणी तक पहुंच गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उनकी टिप्पणी पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी सांसद अभिजीत गांगुली ने इसे राष्ट्र विरोधी बताया है। पश्चिम बंगाल के मंत्री इंद्रनील खान ने भी शर्मिला टैगोर की आलोचना की है।

इस विवाद की शुरुआत स्वतंत्रता दिवस के दौरान कांग्रेस मुख्यालय में हुए एक कार्यक्रम से जुड़ी राजनीतिक बहस से हुई। इसके बाद वंदे मातरम के पूरे गीत और उसके कुछ हिस्सों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया। इसी बीच शर्मिला टैगोर के एक हालिया इंटरव्यू का वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम के धार्मिक पहलुओं पर अपनी राय रखी।

शर्मिला टैगोर ने कहा था कि जो लोग एक ईश्वर में विश्वास करते हैं, उनके लिए गीत के कुछ हिस्सों को स्वीकार करना कठिन हो सकता है। उनका कहना था कि कुछ लोगों की आपत्ति इसी बात को लेकर है कि गीत में देवी देवताओं की आराधना से जुड़ी अभिव्यक्तियां आती हैं।

उनकी इस टिप्पणी को अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बना दिया गया है।

शर्मिला टैगोर की टिप्पणी पर बीजेपी का हमला

बीजेपी सांसद अभिजीत गांगुली ने मीडिया से बातचीत में शर्मिला टैगोर की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को सुझाव देने का अधिकार है। लेकिन यदि कोई यह तय करता है कि वंदे मातरम की कुछ पंक्तियां नहीं गाई जाएंगी, तो इस पर चर्चा होनी चाहिए।

गांगुली ने इसे राष्ट्र विरोधी बताते हुए कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद में वंदे मातरम सहित कई मुद्दों पर चर्चा से कांग्रेस के पीछे हटने का आरोप लगाया।

उनका सवाल था कि अगर किसी मुद्दे पर मतभेद है तो उस पर संसद में चर्चा क्यों नहीं की जाती। बीजेपी सांसद ने कहा कि इस विषय पर खुली बहस होनी चाहिए।

बीजेपी की ओर से यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब वंदे मातरम को लेकर संसद और राजनीतिक मंचों पर बहस पहले ही तेज है।

बंगाल के मंत्री ने भी साधा निशाना

पश्चिम बंगाल के मंत्री इंद्रनील खान ने भी शर्मिला टैगोर की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि देशभक्ति का पाठ किससे सीखा जाना चाहिए।

इंद्रनील खान ने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में वंदे मातरम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके अनुसार स्वतंत्रता सेनानियों ने इस गीत से प्रेरणा ली और अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष में इसका इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा कि देशभक्ति उन लोगों से सीखनी चाहिए जिन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी। उन्होंने शर्मिला टैगोर की टिप्पणी को राष्ट्रीय गीत के अपमान से जोड़ते हुए उसकी आलोचना की।

इस बयान के बाद विवाद और राजनीतिक हो गया है।

कंगना रनौत भी बहस में शामिल

अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने भी शर्मिला टैगोर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का वीडियो साझा किया।

कंगना ने कहा कि वह शर्मिला टैगोर की असहमति का सम्मान करती हैं। लेकिन वह वंदे मातरम की उनकी व्याख्या से सहमत नहीं हैं।

कंगना ने इसे साहित्य और कविता के संदर्भ में देखने की बात कही। उनका तर्क था कि कविता में रूपक, प्रतीक और कल्पना का इस्तेमाल आम बात है। किसी कविता के शब्दों को हमेशा शाब्दिक अर्थ में नहीं देखा जा सकता।

उनके मुताबिक वंदे मातरम को केवल धार्मिक अनुष्ठान के नजरिए से देखना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इस रचना के जरिए देश की आंतरिक शक्ति को जगाने का संदेश दिया था।

कंगना ने यह भी कहा कि कविता में ‘शक्ति’ शब्द को ताकत और सामर्थ्य के प्रतीक के रूप में देखा जा सकता है।

हिंदू मुस्लिम नजरिए से बाहर देखने की अपील

कंगना रनौत ने इस विवाद को हिंदू मुस्लिम बहस से अलग रखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि कविता और कला को व्यापक संदर्भ में समझना चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि अलग अलग धार्मिक मान्यताओं के बावजूद ताकत और ऊर्जा जैसी अवधारणाएं सभी के लिए समझ में आने वाली हैं।

कंगना का कहना था कि वंदे मातरम को धार्मिक पहचान के बजाय स्वतंत्रता आंदोलन की भावना से भी देखा जा सकता है।

हालांकि, इस तर्क से विवाद खत्म नहीं हुआ। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

शर्मिला टैगोर ने क्या कहा था?

शर्मिला टैगोर का बयान मूल रूप से धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा था। उन्होंने कहा था कि जो लोग एक ईश्वर में विश्वास करते हैं, उनके लिए वंदे मातरम के कुछ हिस्सों को लेकर सवाल हो सकते हैं।

उनकी चिंता का एक पहलू यह भी था कि देश में अलग अलग धर्मों के लोगों को साथ लेकर कैसे चला जाए।

शर्मिला टैगोर की यह बात अब उनके खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी में इस्तेमाल हो रही है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उनके पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन का भी उल्लेख किया है।

शर्मिला टैगोर का संबंध प्रसिद्ध टैगोर परिवार से है। वह रविंद्रनाथ टैगोर के परिवार से आती हैं। उनके विवाह के बाद उनका संबंध पटौदी परिवार से जुड़ा। उन्होंने मंसूर अली खान पटौदी से विवाह किया था।

हालांकि, किसी कलाकार की धार्मिक या पारिवारिक पहचान को उसकी सार्वजनिक राय के जवाब के रूप में इस्तेमाल करना भी इस विवाद का अलग पहलू बन गया है।

रविंद्रनाथ टैगोर का नाम क्यों आया?

शर्मिला टैगोर के विरोध में कुछ लोग उनके पारिवारिक संबंधों का उल्लेख कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह रविंद्रनाथ टैगोर के परिवार से हैं और रविंद्रनाथ टैगोर वंदे मातरम के समर्थन में थे।

लेकिन किसी व्यक्ति के पारिवारिक संबंध के आधार पर उसकी अपनी राय तय नहीं की जा सकती। यही वजह है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस के साथ सामाजिक बहस भी चल रही है।

वंदे मातरम का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना ने आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में इसके धार्मिक संदर्भों को लेकर भी बहस होती रही।

कांग्रेस और पूरे वंदे मातरम को लेकर विवाद

वंदे मातरम पर मौजूदा विवाद केवल शर्मिला टैगोर के बयान तक सीमित नहीं है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच भी इस मुद्दे पर लंबे समय से मतभेद रहे हैं।

कांग्रेस का रुख रहा है कि राष्ट्रीय गीत के शुरुआती दो अंतरे ही सार्वजनिक राष्ट्रीय आयोजनों में गाए जाने चाहिए। विवाद का एक हिस्सा पूरे गीत के गायन को लेकर भी है।

बीजेपी कांग्रेस पर वंदे मातरम का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाती रही है। कांग्रेस दूसरी ओर इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाती है।

इसी पृष्ठभूमि में स्वतंत्रता दिवस का एक वीडियो सामने आया। इसमें कांग्रेस मुख्यालय में कार्यक्रम के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी के बातचीत करते हुए दिखाई देने की बात कही गई।

बीजेपी ने इस वीडियो को लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर वंदे मातरम के अपमान का आरोप लगाया और सार्वजनिक माफी की मांग की।

विवाद अब राष्ट्रीय बहस में बदला

वंदे मातरम पर बहस अब केवल गीत की पंक्तियों तक सीमित नहीं है। इसमें धर्म, राष्ट्रवाद, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक पहचान जैसे सवाल भी जुड़ गए हैं।

शर्मिला टैगोर की टिप्पणी ने इस बहस को एक नया चेहरा दे दिया है। बीजेपी के नेताओं ने इसे राष्ट्रवाद से जोड़ दिया है। कंगना रनौत ने इसे कला और कविता के संदर्भ में समझने की बात कही है। दूसरी ओर, शर्मिला टैगोर के बयान को धार्मिक विविधता के नजरिए से देखने वाले लोग भी सामने आए हैं।

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वंदे मातरम को केवल राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में देखा जाए या उसके ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भों पर भी चर्चा की जाए।

भारत की बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक संरचना को देखते हुए यह बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप के साथ आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक मंचों पर भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो सकती है।

AEO के लिए सवाल और जवाब

शर्मिला टैगोर ने वंदे मातरम पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि एक ईश्वर में विश्वास करने वाले लोगों को गीत के कुछ हिस्सों को स्वीकार करने में कठिनाई हो सकती है। उनकी चिंता धार्मिक विविधता और लोगों को साथ लेकर चलने से जुड़ी थी।

बीजेपी ने शर्मिला टैगोर की टिप्पणी पर क्या कहा?
बीजेपी सांसद अभिजीत गांगुली ने उनकी टिप्पणी को राष्ट्र विरोधी बताया और इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की।

कंगना रनौत ने शर्मिला टैगोर के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
कंगना ने कहा कि वह शर्मिला टैगोर की आपत्ति का सम्मान करती हैं, लेकिन वंदे मातरम की उनकी व्याख्या से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कविता में रूपक और प्रतीकों के इस्तेमाल का उल्लेख किया।

वंदे मातरम किसने लिखा था?
वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख प्रतीकों में शामिल रहा है।

वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में विवाद क्यों है?
बीजेपी पूरे गीत को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाती रही है। कांग्रेस सार्वजनिक आयोजनों में शुरुआती दो अंतरों के गायन के पक्ष में रही है।

शर्मिला टैगोर का रविंद्रनाथ टैगोर से क्या संबंध है?
शर्मिला टैगोर प्रसिद्ध टैगोर परिवार से आती हैं। वह रविंद्रनाथ टैगोर के परिवार से संबंधित हैं।

क्या वंदे मातरम पर धार्मिक बहस पहले भी हुई है?
हां। गीत के कुछ हिस्सों में देवी के रूपकों और धार्मिक संदर्भों के कारण अलग अलग समय पर इस पर बहस होती रही है।

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