होर्मुज संकट: अमेरिका ने बारूदी सुरंगें हटाईं, तनाव बरकरार
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खाड़ी क्षेत्र में कूटनीति तेज, ईरान पर अमेरिकी दबाव और सैन्य मौजूदगी बढ़ी
नई दिल्ली।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने दावा किया है कि रणनीतिक जलमार्ग में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटा दिया गया है। इससे तेल और दूसरे जरूरी सामान की समुद्री आवाजाही के लिए रास्ता खुलने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि क्षेत्र में तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है।
एक तरफ अमेरिकी सेना होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ ईरान पर अमेरिकी आर्थिक और सैन्य दबाव जारी है। इसी बीच कतर ने तेहरान के साथ बातचीत का रास्ता मजबूत करने की कोशिश शुरू की है।
कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी ने तेहरान में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। बातचीत का मुख्य मुद्दा क्षेत्रीय तनाव कम करना और संवाद के लिए माहौल तैयार करना रहा।
इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया की स्थिति को एक बार फिर दुनिया की नजरों में ला दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और व्यापारिक समुद्री रास्तों में शामिल है। यहां किसी भी तरह की लंबी रुकावट का असर सिर्फ खाड़ी देशों पर नहीं पड़ता। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार, तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था तक पहुंच सकता है।
अमेरिका का दावा, होर्मुज से सुरंगें हटाईं
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटा दिया गया है। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
अमेरिकी पक्ष के मुताबिक इस अभियान में 1,500 से अधिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने में मदद मिली। इन जहाजों पर करीब 75 करोड़ बैरल तेल था। अभियान में 20 से अधिक युद्धपोत और सैकड़ों विमान शामिल रहे। हालांकि सामान्य स्थिति की तुलना में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही अभी भी काफी कम है।
इस घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। जलमार्ग में खनन या सैन्य गतिविधि से जहाजों की आवाजाही पर सीधा असर पड़ सकता है।
फिलहाल अमेरिका ने रास्ता साफ होने की बात कही है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि क्षेत्र में सैन्य तनाव समाप्त हो गया है।
400 जहाज और 6,000 नाविक फंसे
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज के मुताबिक करीब 6,000 नाविक 400 जहाजों पर सवार होकर होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि ईरान के साथ युद्ध के कारण समुद्री व्यापार और जरूरी आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। लंबे समय तक होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित रहने पर इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
यह स्थिति बताती है कि संकट केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। समुद्री परिवहन, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कारोबार भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
खाड़ी देशों के लिए यह चिंता और बड़ी है। इन देशों की अर्थव्यवस्था में तेल निर्यात की बड़ी भूमिका है। इसलिए होर्मुज के रास्ते में किसी भी तरह की लंबी रुकावट उनके लिए आर्थिक जोखिम बढ़ा सकती है।
ट्रंप बोले, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई खत्म नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को अभी समाप्त नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ईरान सैन्य और आर्थिक रूप से गंभीर दबाव में है। ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज का खुलना अमेरिकी सैन्य अभियान के अंत का संकेत नहीं है। उन्होंने तत्काल ईरान के साथ बातचीत की संभावना से भी इनकार किया।
ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अमेरिका की रणनीति में फिलहाल सैन्य दबाव और आर्थिक प्रतिबंध दोनों शामिल हैं।
इसका दूसरा पहलू यह है कि ईरान भी पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा। तेहरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना की
ईरान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अमेरिका की ओर से लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों की आलोचना की। मंत्रालय ने दूसरे देशों से भी इन प्रतिबंधों में शामिल नहीं होने की अपील की।
ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार अमेरिकी प्रतिबंध संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकारों के खिलाफ हैं। ईरान ने अमेरिका पर डॉलर को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।
ईरान ने एक अलग बयान में नए अमेरिकी आर्थिक कदमों को राज्य आतंकवाद बताया। तेहरान का कहना है कि प्रतिबंधों का असर आम ईरानी नागरिकों की जिंदगी, स्वास्थ्य और आजीविका पर पड़ रहा है।
इससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक दूरी और बढ़ती दिखाई दे रही है।
ईरान बातचीत के लिए तैयार, लेकिन शर्त के साथ
तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कूटनीति का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है। लेकिन इसके लिए अमेरिकी दबाव कम होना और विश्वास बहाल होना जरूरी है।
अराघची ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के साथ हुई बातचीत के बाद कहा कि कूटनीति को फिर पटरी पर लाना असंभव नहीं है। हालांकि ईरान चाहता है कि अमेरिका दबाव की नीति छोड़कर सम्मानजनक तरीके से बातचीत करे।
यहीं से कतर की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। दोहा लंबे समय से पश्चिम एशिया के जटिल संकटों में बातचीत का रास्ता निकालने की कोशिश करता रहा है। मौजूदा हालात में भी कतर ईरान और दूसरे पक्षों के बीच तनाव कम कराने की कोशिश कर रहा है।
कतर की कूटनीति पर नजर
कतर के प्रधानमंत्री की तेहरान यात्रा ऐसे समय हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रम और उसके सुरक्षा तथा स्थिरता पर पड़ रहे असर पर चर्चा हुई।
कतर के विदेश मंत्रालय के मुताबिक बातचीत का उद्देश्य तनाव कम करना और संवाद के लिए अनुकूल माहौल बनाना था।
यह कोशिश कितनी सफल होती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल दोनों देशों के बयानों में अंतर काफी बड़ा है। अमेरिका सैन्य और आर्थिक दबाव बनाए रखना चाहता है। ईरान दबाव खत्म होने की शर्त पर बातचीत की बात कर रहा है।
नया अमेरिकी विमानवाहक पोत भी पहुंचेगा
तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखने का फैसला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट स्ट्राइक ग्रुप आने वाले हफ्तों में सैन डिएगो से रवाना होने वाला है।
यह स्ट्राइक ग्रुप सात महीने से ज्यादा लंबे अभियान पर जा सकता है। यह उस अमेरिकी विमानवाहक पोत की जगह लेगा जो पहले से क्षेत्र में तैनात है। रिपोर्ट के अनुसार यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन पिछले सप्ताह मध्य पूर्व पहुंचा था।
एक तरफ अमेरिका बातचीत के दबाव के बीच सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ कतर जैसे देश कूटनीतिक रास्ता खोज रहे हैं। इससे पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति की जटिलता समझी जा सकती है।
खाड़ी देश तेल के लिए दूसरे रास्ते खोज रहे
होर्मुज संकट का असर खाड़ी देशों की रणनीति पर भी दिखाई देने लगा है। कुवैत अपने तेल निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार पर बातचीत कर रहा है। इसका उद्देश्य कुवैती कच्चे तेल के निर्यात के लिए ऐसे रास्ते तैयार करना है जिनसे होर्मुज पर निर्भरता कम की जा सके।
इससे यह संकेत मिलता है कि खाड़ी देशों में अब सिर्फ मौजूदा संकट से निपटने पर ध्यान नहीं है। वे भविष्य में समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करने की योजना पर भी विचार कर रहे हैं।
गाजा और वेस्ट बैंक में भी तनाव
होर्मुज संकट के बीच गाजा और वेस्ट बैंक की स्थिति भी सामान्य नहीं हुई है। 28 अगस्त को गाजा में इजरायली हमलों में पांच लोगों की मौत की जानकारी सामने आई।
गाजा के नागरिक सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक खान यूनिस के पास अल करारा में तीन लोगों के शव बरामद किए गए। बाद में दो और लोगों की मौत की जानकारी दी गई।
इसी दिन इजरायली सेना ने उत्तरी वेस्ट बैंक के जेनिन इलाके में भी हवाई हमला करने की जानकारी दी। सेना ने कहा कि उसने कई आतंकियों को निशाना बनाया।
इस तरह पश्चिम एशिया में एक साथ कई मोर्चे सक्रिय हैं। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव, होर्मुज में समुद्री संकट, गाजा में हिंसा और खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंता एक दूसरे से अलग नहीं देखी जा सकती।
पाकिस्तान और कुवैत ने बढ़ाया रक्षा सहयोग
इसी बीच पाकिस्तान और कुवैत ने रक्षा और सैन्य सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
समझौते का उद्देश्य सैन्य सहयोग बढ़ाना, विशेषज्ञता साझा करना और दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय मजबूत करना बताया गया है। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर भी चर्चा की।
AEO के लिए सीधे सवाल और जवाब
होर्मुज जलडमरूमध्य में क्या हुआ है?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार होर्मुज में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाया गया है और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखने की कोशिश की गई है।
क्या होर्मुज संकट खत्म हो गया है?
नहीं। सुरंगें हटाने के अमेरिकी दावे के बावजूद क्षेत्र में सैन्य और राजनीतिक तनाव जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सैन्य कार्रवाई खत्म होने की बात से इनकार किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
यह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा और व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यहां लंबे समय तक आवाजाही रुकने से तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकते हैं।
कतर ईरान के साथ बातचीत क्यों कर रहा है?
कतर का कहना है कि उसका प्रयास क्षेत्रीय तनाव कम करना और संवाद के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है।
ईरान अमेरिका से बातचीत के लिए तैयार है?
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी दबाव कम होना और विश्वास बहाल होना जरूरी है।
अमेरिका मध्य पूर्व में सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट स्ट्राइक ग्रुप को मध्य पूर्व भेजने की तैयारी है।
होर्मुज संकट का खाड़ी देशों पर क्या असर है?
कुवैत जैसे देश तेल निर्यात के लिए वैकल्पिक पाइपलाइन और व्यापारिक रास्तों पर विचार कर रहे हैं ताकि होर्मुज पर निर्भरता कम की जा सके।
निष्कर्ष:
होर्मुज से बारूदी सुरंगें हटाने का अमेरिकी दावा समुद्री व्यापार के लिए राहत की खबर जरूर है, लेकिन इसे पश्चिम एशिया में तनाव खत्म होने का संकेत नहीं माना जा सकता। अमेरिका सैन्य दबाव बनाए हुए है। ईरान प्रतिबंधों का विरोध कर रहा है। कतर बातचीत की कोशिश कर रहा है। खाड़ी देश वैकल्पिक तेल मार्ग तलाश रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि होर्मुज में स्थायी शांति और सुरक्षित जहाजरानी का रास्ता निकलता है या संकट फिर किसी नए मोड़ पर पहुंचता है।

