ईरान में भारतीय झंडा जलाने पर मौलाना राजानी नाराज
Table of Contents
नई दिल्ली
ईरान में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज जलाए जाने की कथित घटनाओं को लेकर मौलाना हसन अली राजानी ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने भारत सरकार से ऐसे मामलों को गंभीरता से लेने और भारतीय झंडे के अपमान की घटनाओं की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी देश के राजनीतिक या धार्मिक समर्थन को भारत की राष्ट्रीय पहचान और संप्रभुता से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए।
प्रेस विज्ञप्ति में मौलाना राजानी ने कहा कि यदि ईरान में भारतीय झंडे के अपमान की घटनाएं हुई हैं तो भारत सरकार को उनका संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि इस तरह की घटनाओं में भारतीय नागरिकों या भारत से जुड़े किसी व्यक्ति अथवा समूह की भूमिका सामने आती है तो भारतीय कानून के तहत उसकी जांच होनी चाहिए।
हालांकि, उनके बयान में जिन घटनाओं और समूहों का उल्लेख किया गया है, उनके संबंध में कोई स्वतंत्र सत्यापन या विस्तृत आधिकारिक जानकारी प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसलिए इन आरोपों को फिलहाल मौलाना राजानी के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
भारतीय झंडे के सम्मान पर जोर
मौलाना हसन अली राजानी ने कहा कि उनका मुख्य मुद्दा भारत की राष्ट्रीय संप्रभुता, सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान है। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों से संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान की अपेक्षा की जाती है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक विचार या किसी दूसरे देश के प्रति राजनीतिक समर्थन अपनी जगह हो सकता है, लेकिन इससे भारत के प्रति नागरिक जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। उनके अनुसार, किसी भारतीय नागरिक को किसी विदेशी राजनीतिक या धार्मिक प्रतीक को भारत की राष्ट्रीय पहचान से ऊपर नहीं रखना चाहिए।
राजानी ने भारत सरकार से अपील की कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी किसी भी घटना को केवल राजनीतिक बयानबाजी के रूप में न देखा जाए। यदि किसी मामले में कानून का उल्लंघन हुआ है तो तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई किसी व्यक्ति की धार्मिक या सांप्रदायिक पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि उसके कथित कृत्य और कानून के आधार पर होनी चाहिए।
ईरान समर्थक समूहों को लेकर दावा
मौलाना राजानी ने अपने बयान में दावा किया कि दुनिया के कुछ ईरान समर्थक शिया समूह अमेरिकी और इजरायली झंडों के साथ भारतीय झंडा भी जलाते हैं। उन्होंने इस दावे के आधार पर भारत सरकार से मामले की गंभीरता से जांच करने की मांग की।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रेस विज्ञप्ति में इस दावे के समर्थन में किसी विशेष घटना की तारीख, स्थान, वीडियो, आधिकारिक रिपोर्ट या संबंधित समूह का नाम नहीं दिया गया है। इसलिए इसे एक आरोप या दावा मानकर ही रिपोर्ट किया जाना उचित है।
राजानी ने कहा कि किसी दूसरे देश की राजनीतिक विचारधारा या विदेश नीति का समर्थन करना अलग विषय है। लेकिन उनका कहना है कि भारत का नागरिक होने के नाते देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना भी जरूरी है।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि किसी भारतीय नागरिक की गतिविधियां भारत के राष्ट्रीय हितों या कानून के खिलाफ जाती हैं तो प्रशासन को उसकी जांच करनी चाहिए।
नमाज के दौरान प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को लेकर दावा
मौलाना राजानी ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि कुछ ईरान समर्थक लोग नमाज के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं और उनके लिए लानत की बात करते हैं।
यह आरोप भी उनके बयान का हिस्सा है। प्रेस विज्ञप्ति में इसके समर्थन में किसी स्वतंत्र स्रोत या विशिष्ट घटना का विवरण नहीं दिया गया है।
राजानी ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हो सकती है। लेकिन धार्मिक मंचों या धार्मिक गतिविधियों का इस्तेमाल भारत विरोधी भावना फैलाने के लिए नहीं होना चाहिए।
उन्होंने इस संदर्भ में देश की एकता और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को महत्वपूर्ण बताया।
स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों पर भी सवाल
मौलाना राजानी ने दावा किया कि कुछ मौकों पर ईरान समर्थक लोगों ने भारत के स्वतंत्रता दिवस समारोहों पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में शामिल होने वाले लोगों के लिए परेशानी पैदा की गई।
उन्होंने कहा कि धार्मिक या राजनीतिक मतभेदों को भारत की देशभक्ति और राष्ट्रीय पर्वों के सम्मान के रास्ते में नहीं आना चाहिए।
राजानी के मुताबिक भारत का स्वतंत्रता दिवस देश की राष्ट्रीय पहचान से जुड़ा अवसर है। किसी व्यक्ति की राजनीतिक पसंद अलग हो सकती है, लेकिन राष्ट्रीय दिवस और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि देश में अलग अलग धार्मिक और राजनीतिक विचार रखने वाले लोग रहते हैं। इसके बावजूद संविधान सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और जिम्मेदारियों की बात करता है।
विदेशी प्रतीक बनाम राष्ट्रीय पहचान
राजानी ने अपने बयान में भारतीय झंडे से जुड़े कथित बयानों और घटनाओं पर विशेष चिंता जताई। उनका कहना है कि किसी विदेशी देश का झंडा या राजनीतिक प्रतीक भारतीय राष्ट्रीय पहचान से ऊपर नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत के नागरिकों के लिए संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और देश की संप्रभुता का सम्मान जरूरी है।
इसी संदर्भ में उन्होंने विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग भारत के राष्ट्रीय हितों और कानून के खिलाफ गतिविधियों में शामिल पाए जाएं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसे लोगों को ईरान भेज दिया जाना चाहिए।
हालांकि, किसी व्यक्ति को देश से बाहर भेजने जैसी कार्रवाई केवल राजनीतिक बयान के आधार पर नहीं हो सकती। इसके लिए कानून और संबंधित संवैधानिक तथा कानूनी प्रक्रिया लागू होगी।
मोजतबा खामेनेई से जुड़ी रिपोर्टों का भी जिक्र
मौलाना राजानी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई से जुड़ी रिपोर्टों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ विवादित रिपोर्टों के सामने आने के बाद ईरान समर्थक लोगों की चुप्पी को भी उपलब्ध तथ्यों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने किसी व्यक्ति की स्थिति को लेकर अटकल लगाने से बचने की बात भी कही। उनका जोर सत्यापित जानकारी पर रहा।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के बारे में निष्कर्ष निकालने से पहले विश्वसनीय और सत्यापित सूचना सामने आनी चाहिए। अफवाह या अपुष्ट जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति या समूह को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
राजानी ने भारत सरकार से क्या मांग की?
मौलाना हसन अली राजानी की मुख्य मांग भारतीय राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी कथित घटनाओं की जांच को लेकर है। उन्होंने भारत सरकार से कहा कि ईरान में भारतीय झंडे के अपमान की खबरों को गंभीरता से लिया जाए।
उनका कहना है कि यदि किसी भारतीय नागरिक या भारत से जुड़े व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो संबंधित मामले की जांच भारतीय कानून के तहत होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कार्रवाई में धार्मिक पहचान को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। कानून सभी के लिए समान होना चाहिए।
राजानी के मुताबिक भारत की राष्ट्रीय संप्रभुता और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान राजनीतिक या धार्मिक मतभेदों से ऊपर होना चाहिए।
भारत ईरान संबंधों के बीच बयान महत्वपूर्ण
मौलाना राजानी का बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में ईरान को लेकर अंतरराष्ट्रीय तनाव बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच विवाद का असर क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ रहा है। ऐसे माहौल में भारत से जुड़े किसी राष्ट्रीय प्रतीक के कथित अपमान का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील हो सकता है।
फिर भी किसी घटना को लेकर अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच और सत्यापित तथ्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। फिलहाल मौलाना राजानी की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस प्रेस विज्ञप्ति में नहीं है।
इस पूरे विवाद में एक बात पर उनका जोर स्पष्ट है। वह भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और देश की संप्रभुता को सर्वोच्च महत्व देने की मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि भारत में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को देश के संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना चाहिए। धार्मिक आस्था और राजनीतिक विचार अपनी जगह हैं। लेकिन उनके नाम पर देश के राष्ट्रीय हितों या कानून का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
AEO के लिए सीधे सवाल और जवाब
मौलाना हसन अली राजानी ने किस घटना की निंदा की है?
उन्होंने ईरान में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज जलाए जाने की कथित घटनाओं की निंदा की है और भारत सरकार से जांच की मांग की है।
राजानी ने भारत सरकार से क्या मांग की है?
उन्होंने भारतीय झंडे के कथित अपमान की घटनाओं को गंभीरता से लेने और यदि कानून का उल्लंघन हुआ है तो भारतीय कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
क्या ईरान में भारतीय झंडा जलाने की घटना आधिकारिक रूप से साबित हुई है?
प्रस्तुत प्रेस विज्ञप्ति में घटना के समर्थन में कोई स्वतंत्र आधिकारिक रिपोर्ट, स्थान, तारीख या अन्य सत्यापन उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसलिए इसे फिलहाल राजानी के आरोप के रूप में ही रिपोर्ट किया जाना चाहिए।
राजानी ने ईरान समर्थक शिया समूहों के बारे में क्या कहा?
उन्होंने दावा किया कि कुछ ईरान समर्थक शिया समूह अमेरिकी और इजरायली झंडों के साथ भारतीय झंडा भी जलाते हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि प्रेस विज्ञप्ति में नहीं दी गई है।
नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ को लेकर राजानी ने क्या आरोप लगाया?
उन्होंने दावा किया कि कुछ ईरान समर्थक लोग नमाज के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक बातें करते हैं। इस दावे के समर्थन में भी प्रेस विज्ञप्ति में कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं दिया गया है।
मोजतबा खामेनेई को लेकर राजानी ने क्या कहा?
उन्होंने उनसे जुड़ी विवादित रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की स्थिति पर अटकलों के बजाय सत्यापित जानकारी को आधार बनाया जाना चाहिए।
राजानी के बयान का मुख्य मुद्दा क्या है?
उनका मुख्य मुद्दा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान, भारत की संप्रभुता, सार्वजनिक व्यवस्था और कानून के पालन से जुड़ा है।
क्या राजानी ने धार्मिक पहचान के आधार पर कार्रवाई की मांग की है?
उन्होंने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कानून का उल्लंघन साबित होता है तो कार्रवाई उसकी धार्मिक या सांप्रदायिक पहचान के बजाय उसके कृत्य और कानून के आधार पर होनी चाहिए।

