मिडिल ईस्ट युद्ध का साया: कुवैत में ईरानी समुदाय पर बढ़ा दबाव
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रिपोर्ट: नौशाद अख्तर, कुवैत सिटी
मिडिल ईस्ट में भड़के भीषण युद्ध का असर अब जमीनी स्तर पर आम लोगों के दैनिक जीवन में दिखने लगा है। खाड़ी देश कुवैत में रह रहे ईरानी नागरिक बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और मिसाइल हमलों के कारण स्थानीय स्तर पर संवेदनशील माहौल बन गया है। स्थिति इतनी पेचीदा हो चुकी है कि कुवैत सिटी के एक लोकप्रिय रेस्टोरेंट ने अपने नाम से ‘ईरानी’ शब्द ही हटा दिया है।
नाम बदलने पर मजबूर हुआ मशहूर रेस्टोरेंट
कुवैत सिटी में पर्सियन व्यंजन परोसने वाले एक जाने-माने रेस्टोरेंट ने हाल ही में अपने बोर्ड से “ईरानी कुज़ीन” शब्द हटा दिया। वर्षों से कुवैती और विदेशी ग्राहकों की पसंद रहे इस ठिकाने ने यह कदम किसी सरकारी फरमान से नहीं, बल्कि बिगड़ते माहौल और संवेदनशीलता को देखते हुए उठाया है।
रेस्टोरेंट के एक कर्मचारी के अनुसार युद्ध छिड़ने के बाद पैदा हुई स्थिति बहुत नाजुक है। प्रबंधन ने एहतियात के तौर पर रेस्टोरेंट के नाम से ईरान का संदर्भ हटाने का निर्णय लिया। हालांकि इस नाम बदलाव का उनके व्यापार पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है और ग्राहक पहले की तरह ही आ रहे हैं।
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कुवैत में रह रहे 52,000 ईरानियों पर संकट
कुवैत में लगभग 52,000 ईरानी नागरिक रहते हैं। इनमें से बड़ा हिस्सा मछली पकड़ने वाली नावों, सब्जी मंडियों, बेकरी और निर्माण कार्यों में कम मजदूरी पर काम करने वाले मजदूरों का है। वहीं दूसरी तरफ कई ईरानी व्यापारी कपड़े, कालीन, मेवे और गहनों के पारंपरिक कारोबार से जुड़े हैं।
राजधानी के ऐतिहासिक मुबारकिया बाजार में कपड़े का कारोबार करने वाले 35 वर्षीय ईरानी नागरिक हुसैन ने अपनी चिंता व्यक्त की। वे पिछले 18 वर्षों से कुवैत में रह रहे हैं और उनके कपड़े की कई दुकानें हैं।
हुसैन कहते हैं कि वे लंबे समय से यहां शांति से रह रहे हैं और कभी नहीं चाहते कि दोनों देशों के बीच किसी तरह का विवाद हो। अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के बाद 28 फरवरी से ईरान ने कुवैत के साथ सीधी उड़ानें निलंबित कर दी हैं। इस वजह से वे अपनी बेटी से मिलने ईरान भी नहीं जा पा रहे हैं।
निरंतर मिसाइल और ड्रोन हमले से बढ़ता तनाव
पिछले छह महीनों से अधिक समय से कुवैत लगातार युद्ध की चपेट में है। ईरान और उससे जुड़े समूहों द्वारा तेल प्रतिष्ठानों, नागरिक बुनियादी ढांचों और अमरीकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों व ड्रोन से हमले किए जा रहे हैं।
जुलाई के महीने में जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच वार्ता टूटी, तब से हमलों की तीव्रता काफी बढ़ गई। हाल ही में कुवैत सिटी के एक आवासीय परिसर में ड्रोन हमले के कारण भीषण आग लग गई थी। इस अनिश्चितता के माहौल ने कुवैत में रह रहे ईरानियों के मन में डर पैदा कर दिया है।
कुवैती अधिकारियों की सख्त निगरानी
तनावपूर्ण माहौल के बीच कुवैत प्रशासन सुरक्षा को लेकर बेहद मुस्तैद है। अधिकारियों ने संदिग्ध गतिविधियों और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से संबंध रखने के संदेह में कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है। सुरक्षा कारणों से कुवैत के एकमात्र ईरानी स्कूल को भी बंद कर दिया गया है।
व्यापार के मोर्चे पर युद्ध से पहले कुवैत और ईरान के बीच लगभग 300 मिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता था। इसमें मुख्य रूप से खाद्य पदार्थ, कालीन, मछली और निर्माण सामग्री का निर्यात शामिल था।
‘हम तो बस रोज़ी-रोटी कमाने आए हैं’
सोने के बाजार में काम करने वाले 30 वर्षीय अली का कहना है कि उन्हें किसी ने सीधा नुकसान नहीं पहुंचाया है, लेकिन युद्ध के समय चिंता का माहौल बनना स्वाभाविक है। वे बताते हैं कि आम ईरानी नागरिक किसी राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहते, वे केवल शांति से अपनी रोजी-रोटी कमाना चाहते हैं।
दूसरी ओर कुवैती नागरिक भी स्वीकार करते हैं कि ईरानी समुदाय कुवैत के इतिहास और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। मुबारकिया बाज़ार में खरीदारी करने आई एक कुवैती महिला ने कहा कि ईरानियों को कुवैत के समाज से अलग करके देखना नामुमकिन है।
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