दिल्ली जामा मस्जिद में ईरानी चीफ जस्टिस की नमाज़, शिया सुन्नी एकता का संदेश
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नौशाद अख्तर, नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच राजधानी दिल्ली से एक ऐतिहासिक तस्वीर सामने आई है। इजरायल और अमेरिका के साथ ईरान के बढ़ते संघर्ष ने दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय को एक नया मोड़ दे दिया है। जिस शिया और सुन्नी एकजुटता के लिए सालों से कोशिशें की जा रही थीं, वह अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगी है। इस बड़े बदलाव का नजारा 4 सितंबर 2026 को दिल्ली की मशहूर जामा मस्जिद में देखने को मिला।
ईरान के मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) आयतुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसनी एजेई ने दिल्ली की जामा मस्जिद में जुमे की नमाज़ अदा की। खास बात यह रही कि शिया बहुल देश ईरान के इस सबसे बड़े न्यायिक प्रमुख ने सुन्नी इमाम मौलाना सैयद शाबान बुखारी की अगुवाई में नमाज़ पढ़ी। इस एक घटना ने पूरी दुनिया में इस्लामी भाईचारे और आपसी सद्भाव का बहुत बड़ा संदेश दिया है।
जामा मस्जिद में जुमे की नमाज़ का दृश्य
ईरान के चीफ जस्टिस आयतुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसनी एजेई एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए हैं। शुक्रवार 4 सितंबर को वे बेहद सादगी के साथ जामा मस्जिद पहुंचे। उस समय मस्जिद में हजारों की संख्या में स्थानीय नमाजी मौजूद थे।
शाही इमाम मौलाना सैयद शाबान बुखारी ने जुमे की नमाज़ की इमामत की। ईरानी चीफ जस्टिस ने नमाज़ियों की पहली कतारों में बैठकर इमाम के पीछे नमाज़ अदा की। शिया और सुन्नी परंपराओं में नमाज़ के तरीकों में कुछ अंतर होता है। इसके बावजूद एक शिया धर्मगुरु और शीर्ष अधिकारी का सुन्नी इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ना आपसी सम्मान का बड़ा उदाहरण बना।
नमाज़ खत्म होते ही मस्जिद परिसर में मौजूद लोगों ने ईरानी चीफ जस्टिस का गर्मजोशी से स्वागत किया। भारतीय नमाज़ियों ने उनसे हाथ मिलाया और गले लगकर अपनी खुशी जताई। नमाज़ के बाद आयतुल्लाह एजेई ने जामा मस्जिद के शाही इमाम से बंद कमरे में खास मुलाकात भी की। दोनों नेताओं के बीच वर्तमान वैश्विक हालात, धार्मिक समरसता और समाज के हित से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

कश्मीर नेता मौलवी इमरान अंसारी से मुलाकात
अपनी इस दिल्ली यात्रा के दौरान ईरानी चीफ जस्टिस ने ऑल जम्मू एंड कश्मीर शिया एसोसिएशन के अध्यक्ष और जेकेपीसी के वरिष्ठ नेता मौलवी इमरान अंसारी से भी मुलाकात की। यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस बैठक में भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली और भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही भी मौजूद थे। बैठक के दौरान मौलवी इमरान अंसारी ने ईरान के प्रति कश्मीर के लोगों के गहरे लगाव को जाहिर किया।
इमरान अंसारी ने ईरान के शहीदों को याद किया। उन्होंने आयतुल्लाह सय्यद अली हुसैनी खामेनेई और मीनाब स्कूल हादसे में मारे गए मासूम बच्चों के लिए दुआ की। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और कहा कि दुख की इस घड़ी में हर संवेदनशील इंसान पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है।
Delhi: Chief Justice of Iran, Ayatollah Gholam-Hossein Mohseni-Eje'i, says, "Over the past nearly half a century—that is, for the last 48 years—Iran has made great sacrifices for its independence and freedom, and to liberate itself from the yoke of colonial powers and the… pic.twitter.com/TVhfruZQWU
— ANI (@ANI) September 3, 2026
कश्मीर और ईरान का सदियों पुराना संबंध
बैठक में कश्मीर और ईरान के सांस्कृतिक रिश्तों पर काफी विस्तार से बात हुई। मौलवी इमरान अंसारी ने कहा कि कश्मीर और ईरान का रिश्ता सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। यह रिश्ता सदियों पुराना है और इसकी जड़ें सभ्यता तथा संस्कृति में हैं।
कश्मीर की पहचान बनाने में ईरान का बहुत बड़ा योगदान रहा है। फारसी भाषा, साहित्य, इस्लामी अध्ययन, वास्तुकला, कविता और हस्तशिल्प कलाएं ईरान से ही कश्मीर पहुंची थीं। सदियों से विद्वानों और विचारकों की आवाजाही दोनों क्षेत्रों के बीच होती रही है। इसने ज्ञान और आपसी सम्मान का एक मजबूत पुल बनाया।
इमरान अंसारी ने भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों पुरानी सभ्यताएं हैं जो व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़ी रही हैं। आज के समय में व्यापार, शिक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय सहयोग के क्षेत्र में यह संबंध और मजबूत हो सकते हैं। उन्होंने कर्बला के पैगाम का जिक्र करते हुए कहा कि न्याय, सब्र और नैतिक ताकत का संदेश ही इंसानियत को सही रास्ता दिखा सकता है।
ब्रिक्स मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आए हैं एजेई
आयतुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसनी एजेई की यह भारत यात्रा केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों तक सीमित नहीं है। इसका एक बड़ा कानूनी और कूटनीतिक पहलू भी है। वे 4 से 6 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) देशों के मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए हैं।
इस सम्मेलन में भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और ईरान सहित ब्रिक्स के सदस्य देशों के शीर्ष न्यायिक प्रमुख शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच कानूनी ढांचे को मजबूत करना, व्यापारिक विवादों को जल्द सुलझाना और डिजिटल न्याय प्रणाली को बढ़ावा देना है।
इस सम्मेलन के इतर ईरानी चीफ जस्टिस की भारत के कानूनी विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भी बैठकें तय हैं। भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह और उत्तरी दक्षिणी परिवहन गलियारे (INSTC) जैसे बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट चल रहे हैं। ऐसे में कानूनी और न्यायिक स्तर पर सहयोग बढ़ने से व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
इत्तेहाद का पैग़ाम: ये विडियो उन लोगों के मुंह पर तमाचा है जो शिया और सुन्नी के बीच नफरत पैदा करते है।
— Rizwan Haider (@TheRizwanTalks) September 4, 2026
ईरान के चीफ़ जस्टिस आयतुल्लाह ग़ुलाम हुसैन मोहसनी एज़ेई ने दिल्ली की जामा मस्जिद में सुन्नी इमाम की इक़्तेदा में जुमे की नमाज़ अदा की।#Iran #India #Unity #Ejei https://t.co/DiWDoK6ffw pic.twitter.com/lQuM2TbITV
पश्चिम एशिया का तनाव और शिया सुन्नी एकजुटता
ईरान पर इजरायल और अमेरिका के बढ़ते दबाव के बाद दुनिया भर के मुस्लिम देशों में एक नया राजनीतिक और सामाजिक समीकरण बन रहा है। अब तक मध्य पूर्व के राजनीति में शिया और सुन्नी देशों के बीच तीखे मतभेद देखने को मिलते थे। लेकिन मौजूदा युद्ध ने इन दूरियों को कम करने का काम किया है।
दुनिया भर के आम मुसलमान अब ईरान को पश्चिमी शक्तियों के खिलाफ एक मजबूत आवाज के रूप में देख रहे हैं। यही वजह है कि सुन्नी बहुल देशों में भी ईरान के प्रति सहानुभूति बढ़ी है। दिल्ली की जामा मस्जिद में देखने को मिला यह नजारा इसी अंतरराष्ट्रीय बदलाव की एक छोटी सी झलक है। भारत में रहने वाले करोड़ों मुसलमान भी इस एकजुटता को सकारात्मक रूप में देख रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में जामा मस्जिद की यह घटना आने वाले समय में धार्मिक संवाद को नया रास्ता दिखाएगी। शिया और सुन्नी समुदायों के बीच इस तरह के कदम से न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में सामाजिक सौहार्द मजबूत होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. ईरानी चीफ जस्टिस ने दिल्ली की किस मस्जिद में नमाज़ पढ़ी?
ईरान के चीफ जस्टिस आयतुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसनी एजेई ने 4 सितंबर 2026 को दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में जुमे की नमाज़ पढ़ी।
2. उन्होंने किसकी इमामत में नमाज़ अदा की?
उन्होंने जामा मस्जिद के सुन्नी इमाम मौलाना सैयद शाबान बुखारी की अगवाई में नमाज़ अदा की।
3. ईरानी चीफ जस्टिस के भारत दौरे का मुख्य उद्देश्य क्या है?
वे 4 से 6 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित हो रहे ब्रिक्स (BRICS) देश के मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में भाग लेने आए हैं।
4. मौलवी इमरान अंसारी के साथ बैठक में किस मुद्दे पर चर्चा हुई?
बैठक में कश्मीर और ईरान के सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों, फारसी साहित्य, हस्तशिल्प, आपसी व्यापार और वैश्विक शांति पर बात हुई।
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