यूएई और ईरान ने क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए संवाद पर दिया जोर
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अरब न्यूज़ डेस्क/अरूशा, तंजानिया।
संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के सांसदों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता मजबूत करने के लिए बातचीत और आपसी समन्वय को जरूरी बताया है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकटों का समाधान केवल टकराव से नहीं निकल सकता। इसके लिए गंभीर, ईमानदार और लगातार संवाद की जरूरत है।
यह बात संयुक्त अरब अमीरात के फेडरल नेशनल काउंसिल यानी एफएनसी के अंतर संसदीय संघ समूह के प्रमुख और रक्षा, आंतरिक मामलों तथा विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष डॉ. अली राशिद अल नुआइमी और ईरानी संसद के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख मनूचेहर मोत्तकी के बीच हुई मुलाकात में सामने आई।
दोनों नेताओं की यह बैठक तंजानिया के अरूशा में आयोजित 153वीं इंटर पार्लियामेंटरी यूनियन यानी आईपीयू असेंबली के दौरान हुई। बैठक में संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच संसदीय सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा, राजनीतिक संवाद और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
क्षेत्रीय संकटों के समाधान के लिए संवाद जरूरी
डॉ. अली राशिद अल नुआइमी ने कहा कि क्षेत्रीय संकटों का समाधान ईमानदार और स्पष्ट बातचीत के जरिए ही तलाशा जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत में क्षेत्र के लोगों के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।
उनके अनुसार ऐसे समाधान की जरूरत है जिस पर संबंधित पक्ष सहमत हो सकें। इससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत किया जा सकता है।
यूएई की ओर से दिया गया यह संदेश ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया लंबे समय से राजनीतिक तनाव और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। क्षेत्र में विभिन्न देशों के बीच मतभेद हैं। कई मुद्दों पर कूटनीतिक तनाव भी बना रहता है। ऐसे माहौल में संसदीय संवाद को एक वैकल्पिक और शांतिपूर्ण रास्ते के रूप में देखा जा रहा है।
यूएई ने संसदीय कूटनीति पर दिया जोर
डॉ. अल नुआइमी ने संसदीय संस्थाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संसदें केवल कानून बनाने का काम नहीं करतीं। वे अलग अलग देशों के बीच संपर्क बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा सकती हैं।
उनके मुताबिक संसदीय कूटनीति के जरिए ऐसे संवाद के रास्ते खुले रह सकते हैं जो कभी कभी औपचारिक सरकारी चैनलों के मुकाबले अधिक सहज होते हैं।
संयुक्त अरब अमीरात का फेडरल नेशनल काउंसिल भी इसी दिशा में संसदीय संपर्क बढ़ाने पर जोर देता रहा है। यूएई के प्रतिनिधि ने कहा कि एफएनसी मित्र देशों और सहयोगी देशों की संसदों के साथ बातचीत और संपर्क के माध्यमों को लगातार मजबूत करना चाहता है।
इसका उद्देश्य केवल द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना नहीं है। इसके जरिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आपसी समझ और शांतिपूर्ण समाधान की संस्कृति को भी बढ़ावा देना है।
यूएई और ईरान के बीच संसदीय सहयोग
बैठक में यूएई और ईरान के बीच संसदीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने माना कि संसदों के बीच नियमित बातचीत से कई साझा मुद्दों पर समझ विकसित की जा सकती है।
ईरान और संयुक्त अरब अमीरात पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण देश हैं। दोनों के बीच राजनीतिक और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर अलग अलग समय में मतभेद रहे हैं। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखना क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
ऐसे में सांसदों की मुलाकात को केवल एक औपचारिक बैठक के तौर पर नहीं देखा जा सकता। यह संसदीय स्तर पर संपर्क बनाए रखने की कोशिश भी है।
बैठक में दोनों पक्षों ने संवाद, समन्वय और परामर्श जारी रखने की जरूरत पर सहमति जताई। उनका कहना था कि ऐसा संपर्क दोनों देशों के साझा हितों को आगे बढ़ा सकता है।
अच्छे पड़ोसी संबंधों पर भी जोर
यूएई और ईरान के सांसदों ने अच्छे पड़ोसी संबंधों के महत्व को भी रेखांकित किया। दोनों पक्षों का मानना है कि क्षेत्र की सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति से सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
इसके लिए राजनीतिक समझ जरूरी है।
आपसी बातचीत जरूरी है।
विश्वास कायम करना जरूरी है।
और सबसे अहम है कि मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश जारी रहे।
पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर होने वाली चर्चाओं में यह मुद्दा लगातार महत्वपूर्ण रहा है। क्षेत्र के किसी एक देश में पैदा होने वाला तनाव कई बार दूसरे देशों को भी प्रभावित करता है। व्यापार, ऊर्जा, समुद्री मार्ग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी इसका असर पड़ सकता है।
इसी कारण क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बातचीत में सभी संबंधित देशों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
अंतर संसदीय संघ की बैठक में हुई चर्चा
यह मुलाकात 153वीं इंटर पार्लियामेंटरी यूनियन असेंबली के दौरान हुई। आईपीयू दुनिया भर की संसदों को एक मंच पर लाने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में शामिल है।
ऐसे मंच पर विभिन्न देशों के सांसदों को एक दूसरे के साथ संवाद करने का अवसर मिलता है। क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समस्याओं पर विचारों का आदान प्रदान होता है। इसके अलावा संसदों के बीच सहयोग बढ़ाने के रास्ते भी तलाशे जाते हैं।
अरूशा में हुई यूएई और ईरान के प्रतिनिधियों की बैठक इसी व्यापक संसदीय संवाद का हिस्सा थी।
दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंचों पर साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर संपर्क बढ़ाने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि संसदें मतभेदों के बीच संवाद का पुल बनाने में मदद कर सकती हैं।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर नजर
बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने में संसदीय संस्थाओं की भूमिका पर भी जोर दिया गया।
आज पश्चिम एशिया के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं। सुरक्षा संकट के साथ राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक दबाव और देशों के बीच अविश्वास भी बड़ी समस्या है।
ऐसे माहौल में केवल सरकारों के बीच बातचीत पर्याप्त नहीं मानी जा रही। संसदों और सांसदों के बीच संवाद भी महत्वपूर्ण हो गया है।
संसदीय कूटनीति के जरिए उन मुद्दों पर बातचीत की जा सकती है जिनका सीधा संबंध आम लोगों की जिंदगी से है। शांति, सुरक्षा, विकास और आर्थिक सहयोग ऐसे ही मुद्दे हैं।
डॉ. अल नुआइमी ने सतत विकास के प्रयासों को भी क्षेत्रीय सहयोग से जोड़ने पर जोर दिया। उनका कहना था कि शांति और स्थिरता के बिना विकास का लक्ष्य हासिल करना कठिन है।
यूएई का संदेश क्या है
इस बैठक से संयुक्त अरब अमीरात का एक स्पष्ट संदेश सामने आता है। क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान संवाद और समझ के जरिए तलाशा जाना चाहिए।
यूएई ने संसदीय कूटनीति को इसी प्रयास का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया है। एफएनसी की ओर से मित्र और सहयोगी देशों की संसदों के साथ संपर्क बढ़ाने की बात कही गई है।
दूसरी ओर ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बातचीत यह भी दिखाती है कि क्षेत्रीय मतभेदों के बावजूद संवाद के चैनल खुले रखना जरूरी है।
दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने साझा हितों पर बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के लिए समन्वय की आवश्यकता को स्वीकार किया।
बातचीत से ही निकल सकता है रास्ता
यूएई और ईरान के सांसदों की अरूशा बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि क्षेत्रीय संकटों के समाधान के लिए बातचीत का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए।
मतभेद रह सकते हैं।
राजनीतिक असहमति भी हो सकती है।
लेकिन संवाद खत्म नहीं होना चाहिए।
डॉ. अली राशिद अल नुआइमी और मनूचेहर मोत्तकी की बैठक में इसी सोच को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने कहा कि बातचीत, समन्वय और परामर्श साझा हितों को आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अच्छे पड़ोसी संबंध जरूरी हैं। इसके लिए राजनीतिक और संसदीय स्तर पर लगातार संपर्क बनाए रखना भी जरूरी है।
तंजानिया के अरूशा में हुई यह बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संसदीय पहल के रूप में सामने आई है। आने वाले समय में यदि यूएई और ईरान के सांसदों के बीच संवाद और बढ़ता है तो इससे दोनों देशों के संबंधों के साथ साथ व्यापक पश्चिम एशियाई क्षेत्र में शांति और स्थिरता की कोशिशों को भी समर्थन मिल सकता है।
फिलहाल दोनों देशों की ओर से सबसे अहम संदेश साफ है।
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए टकराव से ज्यादा जरूरी है संवाद।
और संवाद के लिए संसदों के दरवाजे खुले रहना जरूरी है।

