रियाद एयरपोर्ट हमला: जानिए, उमरा पर निकले एक भारतीय परिवार की खुशियां कैसे मातम में बदल गईं ?
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
सऊदी अरब के रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 10 अक्टूबर को हुए हमले ने एक भारतीय परिवार की जिंदगी बदल दी। हैदराबाद के रहने वाले मोहम्मद यूसुफ अली अपने परिवार के साथ उमरा करने जा रहे थे। यह परिवार के लिए पहला उमरा था। यात्रा का मकसद बड़े बेटे की इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले की खुशी मनाना और अल्लाह का शुक्र अदा करना था। लेकिन मदीना़ के लिए उड़ान का इंतजार कर रहे परिवार पर ऐसा कहर टूटा कि खुशियों का यह सफर कभी न भूलने वाली त्रासदी बन गया।
अरब न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, यूसुफ अली अपने बड़े बेटे के साथ जूस खरीदने के लिए गए थे। परिवार के बाकी सदस्य उड़ान के इंतजार में थे। इसी दौरान हाउती हमले में दागा गया एक प्रोजेक्टाइल उस इलाके में आ गिरा। घटनास्थल से कुछ सौ मीटर दूर मौजूद पिता और बेटा इसकी चपेट में आ गए। दोनों गंभीर रूप से घायल हुए और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।
यूसुफ अली की हालत बेहद नाजुक थी। उनके रिश्तेदार और पड़ोसी मोहम्मद अकबर हाशमी ने अरब न्यूज को बताया कि यूसुफ की दूसरे दिन मौत हो गई। हाशमी के अनुसार, हमले में यूसुफ का एक पैर बुरी तरह कट गया था। वह इस हमले में मारे गए 13 लोगों में शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, हमले में करीब 300 लोग घायल हुए थे।
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बेटे के दाखिले की खुशी में उमरा का कार्यक्रम
मोहम्मद यूसुफ अली हैदराबाद के रहने वाले थे। वह आईटी इंजीनियर के तौर पर काम करते थे और उनका काम सऊदी अरब तथा भारत के बीच चलता था। इस बार भारत लौटने पर उन्होंने तय किया कि अगली यात्रा पूरे परिवार के साथ करेंगे।
इस सफर में यूसुफ अली, उनकी पत्नी, दो बेटे, बेटी और उनकी रिश्तेदार शामिल थीं। परिवार पहली बार एक साथ उमरा करने जा रहा था। यात्रा का एक खास कारण बड़े बेटे का इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला था।
मोहम्मद अकबर हाशमी ने बताया कि बड़े बेटे के इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश के बाद उमरा की योजना बनाई गई थी। परिवार इस उपलब्धि के लिए ईश्वर का शुक्र अदा करना चाहता था। उनके लिए यह यात्रा केवल धार्मिक तीर्थयात्रा नहीं थी, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और परिवार की खुशियों से जुड़ा एक यादगार अवसर भी था।
किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस सफर को परिवार ने दुआओं और उम्मीदों के साथ शुरू किया था, वह इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगा।
अस्पताल में भर्ती हैं दोनों बेटे
हमले में यूसुफ अली के बड़े बेटे को गंभीर चोटें आईं। उसे कई चिकित्सकीय प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा। परिवार के रिश्तेदार मोहम्मद अकबर हाशमी के अनुसार, बड़े बेटे के दोनों घुटनों की चोटों के उपचार के लिए घुटने की टोपियों को बदलना पड़ा। उसके पेट का ऑपरेशन भी किया गया, क्योंकि टूटे हुए कांच के टुकड़े पेट में घुस गए थे और उनमें से एक ने लीवर को भी प्रभावित किया था।
रिपोर्ट के अनुसार, बड़े बेटे को अस्पताल में लगभग तीन सप्ताह और रहना पड़ सकता है। यूसुफ अली का दूसरा बेटा भी अस्पताल में भर्ती है। दोनों बच्चों की चोटों ने परिवार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
यूसुफ अली की बेटी और उनके साथ यात्रा कर रहीं रिश्तेदार को अपेक्षाकृत कम चोटें आई थीं। इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यूसुफ की पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ी। वह सुरक्षित हैं और अस्पताल में रहकर घायल बच्चों की देखभाल कर रही हैं।
एक तरफ पति की मौत का दुख है, दूसरी तरफ दोनों बेटों के इलाज की चिंता। परिवार के लिए इस सदमे से उबरना आसान नहीं है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मोहम्मद अकबर हाशमी ने परिवार की हालत का जिक्र करते हुए कहा कि यूसुफ अली की मौत से सभी गहरे सदमे में हैं। उनके मुताबिक, परिवार ने अपना सब कुछ खो दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों को उनके पिता की मौत की जानकारी दे दी गई है। ऐसे समय में जब दोनों बेटे खुद अस्पताल में इलाज करा रहे हैं, पिता को खोने की खबर ने उनके दुख को और गहरा कर दिया है।
यूसुफ अली परिवार के साथ धार्मिक यात्रा पर निकले थे। बड़े बेटे की शैक्षणिक सफलता उनके लिए गर्व का विषय थी। वह इस खुशी को परिवार के साथ साझा करना चाहते थे। लेकिन रियाद एयरपोर्ट के पास हुए हमले ने उनके परिवार से एक महत्वपूर्ण सदस्य छीन लिया।
इस घटना ने सऊदी अरब में काम करने वाले भारतीयों और उनके परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। विदेश में रोजगार के सिलसिले में रहने वाले अनेक भारतीय अपने परिवारों के साथ धार्मिक यात्राओं और छुट्टियों की योजना बनाते हैं। ऐसे में नागरिक इलाकों पर होने वाले हमले आम लोगों की जिंदगी पर कितना गहरा असर डाल सकते हैं, यूसुफ अली का परिवार इसकी दर्दनाक मिसाल बन गया है।
नागरिक ठिकानों पर हमले की आलोचना
मोहम्मद अकबर हाशमी ने हमले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब पर हाउतियों का यह हमला गलत है। उनके अनुसार, हवाई अड्डों और शॉपिंग मॉल जैसे नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने का कोई औचित्य नहीं है।
रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए इस हमले में यूसुफ अली की मौत और उनके बेटों के घायल होने की घटना बताती है कि संघर्ष और हमलों का सबसे बड़ा खामियाजा अक्सर आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है। धार्मिक यात्रा पर निकले परिवार के लिए यह घटना जिंदगी भर का दर्द बन गई।
उमरा का यह सफर यूसुफ अली के परिवार के लिए इबादत, शुक्र और खुशी का अवसर होना था। बड़े बेटे के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले के बाद शुरू हुई यह योजना पूरे परिवार के लिए यादगार बन सकती थी। लेकिन हमले ने सब कुछ बदल दिया।
अब परिवार के सामने यूसुफ अली को खोने के गम के साथ घायल बच्चों के इलाज और उनके भविष्य की चिंता भी है। जिस पिता ने अपने बेटे की सफलता पर परिवार को उमरा कराने की योजना बनाई थी, वह अब उनके साथ नहीं है। परिवार के लिए यह केवल एक यात्रा का अधूरा रह जाना नहीं, बल्कि जिंदगी की दिशा बदल देने वाला हादसा है।
सवाल-जवाब
प्रश्न: रियाद एयरपोर्ट हमले में किस भारतीय की मौत हुई?
उत्तर: अरब न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, हैदराबाद के आईटी इंजीनियर मोहम्मद यूसुफ अली की हमले में घायल होने के बाद मौत हो गई।
प्रश्न: यूसुफ अली का परिवार सऊदी अरब क्यों जा रहा था?
उत्तर: परिवार उमरा करने जा रहा था। यह यात्रा उनके बड़े बेटे के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले की खुशी में आयोजित की गई थी।
प्रश्न: हमले में यूसुफ अली के परिवार के कितने सदस्य घायल हुए?
उत्तर: उनके दोनों बेटे गंभीर रूप से घायल हुए। उनकी बेटी और साथ यात्रा कर रहीं रिश्तेदार को भी चोटें आईं, लेकिन इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

