Muslim World

मीरवाइज की पहल रंग लाई, कश्मीर,जम्मू और लद्दाख में दिखी मुस्लिम एकता

श्रीनगर:

कश्मीर की वादी इन दिनों एक बेहद अनूठी और सकारात्मक पहल की गवाही बन रही है। पिछले कुछ सालों से यहां के युवाओं का एक तबका नशे की गिरफ्त में आ रहा था। सामाजिक ताना-बाना बिखर रहा था। ऐसे मुश्किल वक्त में मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा यानी एमएमयू ने एक बड़ा कदम उठाया। इसके तहत कश्मीर, जम्मू और लद्दाख में शुक्रवार के दिन जुमे के खुतबे में एकरूपता लाने का फैसला किया गया। इस ऐतिहासिक मुहिम का असर अब साफ नजर आने लगा है।

शुक्रवार को जब मस्जिदों और इमामबाड़ों में अजान गूंजी, तो नजारा कुछ अलग ही था। हनफी, जाफरी, अहले-हदीस, बरेलवी और देवबंदी जैसे तमाम अलग-अलग फिरकों और विचारधाराओं से जुड़े उलेमा एक मंच पर तो नहीं आए, लेकिन उनकी सोच एक हो गई। कश्मीर घाटी के दसों जिलों के साथ-साथ सुदूर लद्दाख के कारगिल, द्रास और लेह तक में सत्तर से ज्यादा बड़े मजमुओं में एक ही साझा विषय पर खुतबा दिया गया। यह विषय था ईमान और उसकी हिफाजत।

इस पूरी कवायद का मकसद साफ था। मुस्लिम समाज को अंदर से मजबूत करना और युवाओं को भटकने से बचाना। जानकारों का मानना है कि यह भारत के इस संवेदनशील हिस्से में धार्मिक सौहार्द की एक नई इबारत लिख रहा है।

अलग सोच, फिर भी एक सुर

कश्मीरी समाज में यह चर्चा लंबे समय से थी कि अलग-अलग मसलक या फिरके होने की वजह से कई बार आपसी दूरियां बढ़ जाती हैं। लेकिन मीरवाइज उमर फारूक की अगुवाई वाली एमएमयू ने इस दीवार को गिराने की कोशिश की है। पंद्रह सितंबर को हुए उलेमा सम्मेलन में जो बीज बोया गया था, वह अब पौधा बन चुका है।

बड़ी जामा मस्जिदों से लेकर पुरानी खानकाहों और मदरसों तक, हर जगह मौलवियों ने अपनी मिंबर यानी उपदेश मंच की पवित्रता और स्वतंत्रता को बनाए रखा। किसी पर कोई दबाव नहीं था। सबने अपनी मर्जी से इस मुहिम में हिस्सा लिया। सबसे बड़ी बात यह रही कि हर जगह एक ही संदेश गूंजा कि मुसलमानों को अपनी आपसी एकजुटता बनाए रखनी होगी।

खुतबे के दौरान उलेमा ने खुलकर बात की। उन्होंने माना कि आज का कश्मीरी युवा कई मोर्चों पर जूझ रहा है। एक तरफ भौतिकवाद की अंधी दौड़ है, तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल और नैतिक मूल्यों में गिरावट आ रही है। ऐसे दौर में केवल किताबी बातें करने से काम नहीं चलेगा। माता-पिता, शिक्षकों और उलेमा सबको मिलकर आगे आना होगा।

नशाखोरी और सामाजिक बुराइयों पर वार

इस साझा खुतबे का सबसे अहम पहलू उन सामाजिक बुराइयों पर सीधी चोट करना था जो आज दीमक की तरह समाज को खोखला कर रही हैं। वक्ताओं ने युवाओं में फैलती नशाखोरी, अपराध और शादी में होने वाली अनावश्यक देरी जैसे गंभीर मुद्दों पर खुलकर बात की।

मस्जिदों से यह पैगाम दिया गया कि पैसा और दुनियादारी की चमक-धमक इंसान को उसके असल रास्ते से भटका देती है। हर मोमिन की जिम्मेदारी है कि वह अपने ईमान की रक्षा करे। अपने उसूलों से कभी समझौता न करे। चाहे हालात कैसे भी हों, सत्यनिष्ठा और मानवीय मूल्यों को अपने आचरण में उतारना ही असली इस्लाम है।

खास बात यह है कि यह पहल सिर्फ एक दिन का ड्रामा नहीं है। एमएमयू ने साफ कर दिया है कि यह सिलसिला आने वाले शुक्रवारों को भी जारी रहेगा। आने वाले हफ्तों में उम्मत की एकता के अलावा नशीले पदार्थों के सेवन, आत्महत्या, मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक मूल्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर भी इसी तरह की सामूहिक चर्चाएं होंगी।

जमीनी स्तर पर बदलाव की उम्मीद

आम लोगों ने इस पहल का दिल से स्वागत किया है। श्रीनगर से लेकर पुंछ और राजौरी तक के लोगों का कहना है कि अगर हमारे धार्मिक अगुआ इसी तरह एकजुट होकर समाज को सही रास्ता दिखाते रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब भटके हुए युवा फिर से मुख्यधारा में लौट आएंगे।

अलग-अलग धार्मिक शैलियों और व्याख्याओं वाले उलेमा का एक मंच पर आकर इस तरह से सोचना वाकई में एक बड़ा बदलाव है। यह सिर्फ एक मजहबी रस्म नहीं है, बल्कि एक ऐसा सामाजिक आंदोलन बन चुका है जिसकी कश्मीर को इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत थी।

सवाल और जवाब

सवाल: कश्मीर में साझा खुतबा अभियान किसने आयोजित किया?

जवाब: मुत्तहिदा मजलिस ए उलेमा जम्मू कश्मीर (MMU) की अपील पर 16 अक्टूबर 2026 को कश्मीर, जम्मू और लद्दाख में साझा खुतबा अभियान आयोजित किया गया।

सवाल: साझा खुतबा का मुख्य विषय क्या था?

जवाब: इसका मुख्य विषय ईमान यानी आस्था था। उपदेशों में ईमानदारी, नैतिक आचरण, युवाओं के मार्गदर्शन और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया गया।

सवाल: अभियान में किन मुद्दों पर आगे चर्चा होगी?

जवाब: MMU के अनुसार, आगामी कार्यक्रमों में नशाखोरी, मानसिक स्वास्थ्य, आत्महत्या की रोकथाम, युवा चुनौतियां, सोशल मीडिया का जिम्मेदार इस्तेमाल, पारिवारिक मूल्य और पर्यावरण संरक्षण शामिल होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *