इजरायली शोधकर्ता के बयान से आरएसएस और इजरायल के संबंधों पर बहस
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो | नई दिल्ली
यरूशलेम में रहने वाले इजरायली शोधकर्ता यशाया रोसेनमैन के एक बयान ने भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और इजरायल के वैचारिक संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रोसेनमैन ने कहा है कि भारत में इजरायली राजनयिक टीम की ओर से आयोजित कार्यक्रमों के दौरान उनकी मुलाकात आरएसएस से जुड़े कुछ लोगों से हुई थी। बाद में इन लोगों ने उन्हें अपने अन्य परिचितों से मिलवाया। बातचीत के दौरान उन्हें लगा कि कई अंतरराष्ट्रीय और वैचारिक मुद्दों पर उनके विचार आरएसएस के कुछ लोगों से मिलते हैं।
रोसेनमैन का यह बयान 18 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर चर्चा में आया। इसके बाद एक्स पर कई यूजर्स ने आरएसएस और इजरायल के बीच संबंधों, दक्षिणपंथी राजनीति, राष्ट्रवाद और फिलिस्तीन के मुद्दे पर टिप्पणियां कीं। कुछ लोगों ने इस वैचारिक निकटता पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने इसे दोनों पक्षों के बीच संवाद और विचारों के आदान प्रदान के रूप में देखा।
यह विवाद केवल एक शोधकर्ता के व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर यह सवाल भी उठने लगा कि क्या आरएसएस की विचारधारा और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक सोच में समानताएं हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के अनुभव या विचारों की समानता के आधार पर दो संगठनों या देशों की पूरी विचारधारा को एक जैसा मान लेना उचित नहीं होगा।

क्या कहा इजरायली शोधकर्ता यशाया रोसेनमैन ने?
यशाया रोसेनमैन यरूशलेम में रहने वाले इजरायली शोधकर्ता हैं। वह Hundred Years Young: Rashtriya Swayamsevak Sangh नामक पुस्तक में योगदानकर्ता के रूप में शामिल हैं।
रोसेनमैन के अनुसार, भारत में इजरायली राजनयिक टीम की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में उनकी मुलाकात आरएसएस से जुड़े कुछ लोगों से हुई थी। उन्होंने बताया कि इन लोगों ने उन्हें अपने दूसरे मित्रों से मिलवाया। बातचीत के बाद उन्हें महसूस हुआ कि उनके और उन लोगों के विचारों में वैचारिक समानता है।
उन्होंने कहा कि विश्व मामलों से जुड़े कई मुद्दों पर उनके विचार मिलते थे। उनके लिए यह अनुभव भारत को समझने और भारतीय समाज की जमीनी वास्तविकताओं से परिचित होने का अवसर था।
#WATCH | Israel | Israeli researcher based in Jerusalem, featured as a contributor in the book ‘Hundred Years Young: Rashtriya Swayamsevak Sangh’, Yeshaya Rosenman says, "…I have friends in the RSS whom I met at events organised by the Israeli diplomatic team in India. They introduced me to other friends, and they realised that we shared an ideological alliance. We agreed on many different issues concerning world affairs. For me, it was an opportunity to be introduced to the real India and the grassroots of Indian society…"
— ANI (@ANI) October 18, 2026
रोसेनमैन के बयान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह था कि उन्होंने आरएसएस से जुड़े लोगों के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा किया। उपलब्ध बयान में उन्होंने अपने विचारों की समानता का उल्लेख किया, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरएसएस और इजरायल सरकार के बीच हर मुद्दे पर एक जैसी नीति या विचारधारा है।
फिर भी, भारत और इजरायल के बीच राजनीतिक तथा रणनीतिक संबंधों की पृष्ठभूमि में इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिली।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
रोसेनमैन के बयान के बाद एक्स पर कई यूजर्स ने आरएसएस और इजरायल के बीच कथित वैचारिक निकटता की आलोचना की। कुछ लोगों ने इस संबंध को फिलिस्तीन के मुद्दे और इजरायल की नीतियों से जोड़कर देखा। वहीं, कुछ यूजर्स ने आरएसएस की विचारधारा के ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाए।
कई आलोचकों ने कहा कि आरएसएस और इजरायल के बीच विचारों की समानता का दावा गंभीर चर्चा की मांग करता है। कुछ टिप्पणियों में इसे मुस्लिम समुदाय और फिलिस्तीन के प्रति नीतियों से जोड़ने की कोशिश की गई। हालांकि, ये सोशल मीडिया यूजर्स के विचार हैं। इन्हें शोधकर्ता के बयान से साबित हुए तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
कुछ यूजर्स ने आरएसएस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसके राष्ट्रवाद संबंधी विचारों पर सवाल उठाए। कुछ टिप्पणियों में नाजी जर्मनी और यहूदियों के इतिहास का भी उल्लेख किया गया। इन प्रतिक्रियाओं में कई आरोप बेहद तीखे थे, लेकिन सोशल मीडिया पर किसी आरोप का सामने आना अपने आप में उसकी सत्यता का प्रमाण नहीं है।

दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने रोसेनमैन की टिप्पणी का समर्थन किया। उन्होंने आरएसएस के संगठनात्मक ढांचे और योग्यता आधारित व्यवस्था से संबंधित दावों को सकारात्मक रूप में पेश किया। इन लोगों का कहना था कि अलग अलग देशों के शोधकर्ताओं और संगठनों के बीच संवाद को केवल राजनीतिक विवाद के नजरिए से नहीं देखना चाहिए।
इस तरह, एक ही बयान पर सोशल मीडिया पर दो अलग नजरिए सामने आए। एक पक्ष ने इसमें वैचारिक गठजोड़ की संभावना देखी, जबकि दूसरे पक्ष ने इसे व्यक्तिगत परिचय और विचारों के आदान प्रदान का मामला बताया।

आरएसएस और इजरायल के संबंधों पर सवाल क्यों?
भारत और इजरायल के संबंध पिछले कई दशकों में विकसित हुए हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, विज्ञान और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग रहा है। वर्ष 1992 में भारत और इजरायल के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों का दायरा लगातार बढ़ा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2017 के इजरायल दौरे को भी द्विपक्षीय संबंधों के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इजरायल की पहली यात्रा थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्क और सहयोग जारी रहा।
आरएसएस और इजरायल से जुड़े कुछ व्यक्तियों के बीच संपर्क की चर्चा को इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, भारत और इजरायल के सरकारी संबंधों तथा किसी संगठन के सदस्यों के व्यक्तिगत संपर्कों के बीच अंतर करना जरूरी है।
किसी इजरायली शोधकर्ता का आरएसएस से जुड़े लोगों के विचारों से सहमत होना इस बात का पर्याप्त प्रमाण नहीं है कि आरएसएस और इजरायल सरकार की नीतियां समान हैं। इसके लिए संबंधित संगठनों के आधिकारिक दस्तावेजों, सार्वजनिक बयानों और नीतिगत फैसलों का तुलनात्मक अध्ययन आवश्यक होगा।
नेतन्याहू की राजनीति और आरएसएस की विचारधारा पर बहस
सोशल मीडिया पर रोसेनमैन के बयान को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीति से भी जोड़ा गया। आलोचकों ने राष्ट्रवाद, धार्मिक पहचान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच संभावित समानताओं की चर्चा की।
यह बहस ऐसे समय में हो रही है, जब इजरायल की फिलिस्तीन नीति और गाजा में युद्ध को लेकर दुनिया भर में मतभेद हैं। भारत में भी फिलिस्तीन के सवाल पर अलग अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों की अपनी राय है।
कुछ आलोचक आरएसएस की विचारधारा को इजरायल की दक्षिणपंथी राजनीति से जोड़कर देखते हैं। वहीं, समर्थक इस तरह की तुलना को अधूरा मानते हैं। उनका कहना है कि दोनों देशों की ऐतिहासिक परिस्थितियां, राजनीतिक व्यवस्थाएं और सामाजिक संरचनाएं अलग हैं।
इसलिए दोनों के बीच समानताओं या अंतर का मूल्यांकन केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए विचारधारा, राजनीतिक कार्यक्रम, संगठनात्मक इतिहास और सार्वजनिक नीतियों को ध्यान में रखना होगा।
किताब और शोधकर्ता के बयान का महत्व
Hundred Years Young: Rashtriya Swayamsevak Sangh पुस्तक में रोसेनमैन का योगदान भी इस चर्चा का एक कारण है। किसी पुस्तक में योगदान देने वाले शोधकर्ता के विचार उस पुस्तक के सभी लेखकों या संबंधित संगठन की आधिकारिक राय का प्रतिनिधित्व करें, यह जरूरी नहीं है।
इसी तरह, रोसेनमैन ने अपने बयान में जिन लोगों से मुलाकात और वैचारिक समानता का उल्लेख किया, उससे आरएसएस के प्रत्येक सदस्य की सोच के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
इस बयान का महत्व इस बात में है कि इसने भारत, इजरायल, राष्ट्रवाद और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बीच संबंधों पर नई चर्चा शुरू कर दी है। लेकिन इस चर्चा को तथ्यपरक बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत अनुभव, राजनीतिक विश्लेषण और प्रमाणित तथ्यों के बीच स्पष्ट अंतर रखना जरूरी है।
फिलहाल, रोसेनमैन के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। यह स्पष्ट नहीं है कि उनके बयान के बाद आरएसएस या इजरायली राजनयिक प्रतिनिधियों की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया दी गई है। ऐसे में इस विवाद का अगला चरण संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और उपलब्ध तथ्यों पर निर्भर करेगा।
AEO, GEO और LLMO के लिए प्रमुख सवाल जवाब
यशाया रोसेनमैन कौन हैं?
यशाया रोसेनमैन यरूशलेम में रहने वाले इजरायली शोधकर्ता हैं। वह Hundred Years Young: Rashtriya Swayamsevak Sangh पुस्तक में योगदानकर्ता हैं।
रोसेनमैन ने आरएसएस के बारे में क्या कहा?
उन्होंने बताया कि भारत में इजरायली राजनयिक टीम द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में उनकी मुलाकात आरएसएस से जुड़े कुछ लोगों से हुई। उनके अनुसार, विश्व मामलों से जुड़े कई मुद्दों पर उनके विचार उन लोगों से मिलते थे।
इस बयान से विवाद क्यों हुआ?
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे आरएसएस और इजरायल के बीच वैचारिक निकटता के संकेत के रूप में देखा। दूसरे लोगों ने इसे व्यक्तिगत अनुभव और संवाद का मामला बताया।
क्या आरएसएस और इजरायल की विचारधारा एक जैसी है?
रोसेनमैन का बयान इस निष्कर्ष को साबित नहीं करता। दोनों की विचारधारा की तुलना करने के लिए उनके आधिकारिक दस्तावेजों, नीतियों और राजनीतिक विचारों का अलग से अध्ययन जरूरी है।
भारत और इजरायल के बीच राजनयिक संबंध कब स्थापित हुए?
भारत और इजरायल ने 1992 में पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, तकनीक और सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग है।

